करुणा किसे कहते हैं?

करुणा किसे कहते हैं?

करुणा किसे कहते हैं?

यह एक बेहद सामान्य सा सवाल है और इसका उत्तर भी पहली नजर में बेहद सामान्य है।

क्योंकि आप किसी से भी पूछ लीजिए कि करणा क्या है, 

तो वह बिना एक पल की देरी किये झटपट बता देगा कि किसी पर दया करना ही करुणा है।

अब सवाल उठता है कि क्या सच में करुणा इतनी ही साधारण सच्चाई का नाम है, 

या फिर करुणा के मायने और भी कुछ हैं?

इसका उत्तर किसी भी व्यक्ति की इस जिज्ञासा को शांत करने का उपाय हो सकता है कि

आखिर जिसे पूरा संसार करुणा के नाम से जानता है वह करुणा किसे हैं? 

करुणा को जानने के पहले 

करुणा को जानने के पहले एक रोचक जानकारी

आइए पढ़ते और समझते हैं कि आखिर यह करुणा नामक सच्चाई क्या है?

दोस्तों जातक कथाओं के जरिए स्वयं बुद्ध एक प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहते हैं कि

एक बार जब वह हांथी के अवतार में थे तब जंगल अचानक भीषण आग लग गई।

आग से बचने के लिए सारे जंगल वासी इधर से उधर अपनी अपनी जान बचाने के लिए भाग रहे थे।

बुद्ध कहते हैं मैं हाथी के रूप में एक जगह खड़ा था तभी मैने

अपना एक पांव पल भर के लिए ऊपर उठा लिया लेकिन

जैसे ही मैंने पैर उठाया था उसी वक्त एक खरगोश हांथी के पैर वाली जगह पर बैठ गया।

 

जीवन का नाम करुणा है

मैं तब परेशान हो गया कि अगर पांव रखता हूं तो वह खरगोश मर जाएगा

लेकिन अगर उसे बचाता हू तो मैं स्वयं काल के गाल में चला जाऊंगा।

खैर, जब काफी सोच विचार कर लिया तो मैने निश्चय किया कि,

“मैं पैर अब खरगोश के ऊपर नहीं रखूंगा चाहे मुझे ही मरना पड़े”।

आगे की कहानी यह है कि अंतत: हाथी जल कर राख हो गया लेकिन वह छोटा सा खरगोश बच गया।

बुद्ध कहते हैं हांथी का खरगोश के लिए पैर उठाने के लिए

प्रेरित करने की शक्ति का नाम ही करुणा है। करुणा वही है

जिसके कारण हाथी खुद मर गया और वह नहीं बचा। 

हमारा जीवन और करुणा 

करुणा किसे कहते हैं? 

इस क्रम में अगर हम सामान्य मानव जीवन और करुणा की बात करें तो हकीकत यह है कि

करुणा के बिना जीवन कृत्रिम है, करुणा के बिना जीवन पाखंड और नीरस भी है।

नैतिक मूल्यों के मामले में आज मनुष्य अवमूल्यन से ग्रस्त हो चुका है। 

यह सब हमारे जीवन में करुणा के अभाव की वजह से हुआ है।

आप किसी भी देश मत जाइए  आप किसी भी प्रदेश मत जाइए। 

आप किसी भी जिला मत जाइए। 

आप किसी और के गांव या घर मत जाइए। 

आप केवल और केवल अपने घर में ही नजर दौड़ाइएआप को पता चल जाएगा कि

करुणा का अगर आज के मानव में अभाव है तो उसका कारण केवल स्वार्थ है।

आज जीवन में स्वार्थ वह सच्चाई है जिसके सामने कोई और सच्चाई काम नहीं करती।

मनुष्य के स्वार्थ का भोजन ही सच्चाई है यानी स्वार्थ जब बढ़ जाता है

तब मनुष्य के जीवन से करुणा चली जाती है। 

जीवन में करुणा का काम क्या है?

करुणा किसे कहते हैं?
या फिर किसी से यह पूछना कि करुणा का जीवन
में क्या महत्व है?
केवल और केवल इस बात से समझा जा सकता है
कि गौतम के ह्रदय में जब करुणा ने जन्म लिया था तो वह बुद्ध बन गए थे। 

इसका मतलब यह हुआ कि करुणा मनुष्य को सचमुच में मनुष्य बनाती है।

करुणा के अभाव में जीवन बारूद से भयंकर हो जाता है लेकिन

अगर आप के मन में करुणा है तो इस पूरे संसार में इस करुणा का फर्क पड़ता है।

करुणा के ही दम पर यह संसार स्थिर और जिंदा है। 

करुणा से संसार को क्या मिलता है? 

करुणा से संसार को नैतिकता का बल मिलता है।

नैतिकता का बल ही संसार को समय की धुरी में सच्चे कार्यों की प्रेरणा देता है।

जब संसार में सच्चे कार्यों की प्रबलता सार्थक होती है तो संसार में कल्याण की भावना बढती है।

जब कल्याण की भावना बढती है तो अधिकतम लोगों का जीवन सुखमय होता है।

जब अधिकतम लोगों का जीवन सुखमय होता है तो संसार में सत्कर्म बढते हैं।

जब संसार में सत्कर्म बढते हैं तो संसार में रामराज्य की स्थापना होती है।

जब रामराज्य की स्थापना होती है तो दैहिक दैविक और भौतिक कष्टों का विनाश हो जाता है।

और जब सचमुच संसार से दैहिक दैविक भौतिक कष्ट विदा ले लेते हैं तो

हर घर में सुख शांति और सम्वृद्धि आती है।

संसार में सुख शांति और सम्वृद्धि से बड़ा कुछ भी नहीं है।

इसे तो देवता भी प्राप्त करना चाहते हैं। 

धन्यवाद

के पी सिंह किर्तीखेड़ा 06122018

About KPSINGH

मैने बचपन से निकल कर जीवन की राहों में आने के बाद सिर्फ यही सीखा है कि "जंग जारी रहनी चाहिए जीत मिले या सीख दोनों अनमोल हैं" मैं परास्नातक समाज शास्त्र की डिग्री लेने के अलावा CTET और UP TET परीक्षाएं पास की हैं ।मैंने देश के हिन्दी राष्ट्रीय समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में लेखन किया है जैसे प्रतियोगिता दर्पण विज्ञान प्रगति आदि ।

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