कादर खान क्या सच में नहीं रहे?

कादर खान क्या सच में नहीं रहे? 

कादर खान क्या सच में नहीं रहे?

यह एक फालतू सवाल है जिसका उत्तर आज पूरे भारत ही नहीं

भारतीय हिन्दी फिल्मों को पसंद करने वाले दुनिया के हर देश में

बच्चा बच्चा जानता है कि हां हमारे भारतीय फिल्मों के सबसे ज्यादा

काबिल फनकारों में भी सबसे काबिल और नायाब

कलाकार और उससे भी ज्यादा महान इंसान कादर खानअब हमारे बीच नहीं हैं।

दोस्तोंं, मैं इसके बाद भी आपसे यही पूछूंगा कि  कादर खान क्या सच में अब नहीं रहे?

अब आप जवाब देने की बजाय खुद मुझसे सवाल करेंगे कि जब

आज पूरी दुनिया कादर खान के गम में आंसुओं में डूबी है

तो आपको ऐसा क्यों पूछ रहे हैं कि कादर खान क्या सच में हमारे बीच नहीं रहे? 

मेरे सवाल का मतलब यह है

जी हां दोस्तों, मेरे सवाल कि कादर खान क्या सच में नहीं रहे का यह अर्थ नहीं है कि

मुझे यह बात पता नहीं है कि बालीवुड के नायाब फनकार कादर खन का 

एक लम्बी बीमारी के बाद 81 वर्ष में टोरंटो में 1जनवरी 2019 को में निधन हो गया है।

महान कादर खान का अंतिम संस्कार भी कनाडा में ही किया जाएगा।

हर दिल अजीज कामेडी स्टार पट कथा तथा बेहतरीन संवाद लेखक

कादर खान के बारे में बताया गया है कि वह सोमवार 31 दिसंबर को ही

कनाडा के टोरंटो में कोमा में चले गए थे।

कादर खान के बेटों सरफराज और सहनवाज के अनुसार

उन्होंने अपने जीवन की आखिरी सांस साल के आखिरी दिन ही ली।

कनाडा के समय के अनुसार 31 दिसंबर की शाम 6 बजे उनका निधन हुआ है।

जहां तक मेरे सवाल का मतलब है वह यह नहीं है कि मुझे उनके निधन की सूचना नहीं है

बल्कि मेरा मानना है कि वह क्या कभी हमारे दिलों

और हमारी आत्मा से ताउम्र पल भर के लिए भी अलग हो सकते हैं???

शायद नहीं नहीं कभी नहीं।।

महान कादर खान की महानता

कादर खान साहब का जन्म आजादी के पहले काबुल अफगानिस्तान में हुआ था।

इनके बारे में कहा जाता था कि इनके जन्म के पहले इनकी मां को तीन बेटे हुए थे

मगर दुर्भाग्य देखिए तीनों बच्चों की तब मौत हो गयी जब वह सात सात आठ आठ साल के थे।

जब कादर खान साहब की वालिदा  को चौथा बच्चा होना था

यानी खुद कादर खान साहब का जन्म हुआ था तभी इनकी मां ने इनके पिता से कहा कि

शायद यह सर जमीं हमारे बच्चों को रास नहीं आती इसलिए

आइए  बम्बई चल कर इस बच्चे को पलने बढने देते हैं।

1937 में कादर खान का जन्म काबुल अफगानिस्तान में हुआ था

लेकिन जल्द ही इनके मांबाप बम्बई आ गए थे।

यहां आकर सबसे खेद जनक बात यह हुई कि  कादर खान साहब के मांबाप का तलाक हो गया।

तलाक के बाद सौतेलै बाप की संगत में खान साब का बचपन बेहद दुर्दिन में बीता। 

कादर खान बेमिसाल हैं और रहेंगे

कादर खान साहब की तारीफ करनी चाहिए क्योंकि

उन्होंने बचपन गरीबी में काटने के बाद ही सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थी।

वह आगे चलकर सिविल इंजीनियरिंग के प्रोफेसर भी

रहे यह बात उनकी काबलियत बताने के लिए काफी है।

सबसे खास बात यह है कि आज हम उन्हें जिस कारण याद कर रहे हैं

उसके लिए न भूतो न भविष्यत कहा जाए तो कतई अतिश्योक्ति नहीं होती।

जी हां दोस्तों, बालीवुड की अद्भुत हस्ती कादर खान

एक एक नहीँ बल्कि दो दो मोर्चों पर बेताज बादशाह रहे हैं।

वह फिल्मों में संवाद लेखन के साथ ही साथ अभिनय में भी उंचाई पर विराजमान रहे थे।

वह एक बेहतरीन पट कथा और संवाद लेखक तो थे ही वह

निर्देशक और कमाल के अद्वितीय अभिनेता भी रहे हैं।

1980/1990 में व्यावसायिक फिल्मों में अमिट छाप

और असीम उंचाई हासिल करने वाले कादर खान फिलहाल

4 दिसंबर 2014 के बाद सार्वजनिक सक्रियता से दूर हो गए थे। 

कादर खान कृतित्व और व्यक्तिव 

क्रमशः

धन्यवाद

के पी सिंह किर्तीखेड़ा 02012019

 

 

 

About KPSINGH

मैने बचपन से निकल कर जीवन की राहों में आने के बाद सिर्फ यही सीखा है कि "जंग जारी रहनी चाहिए जीत मिले या सीख दोनों अनमोल हैं" मैं परास्नातक समाज शास्त्र की डिग्री लेने के अलावा CTET और UP TET परीक्षाएं पास की हैं ।मैंने देश के हिन्दी राष्ट्रीय समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में लेखन किया है जैसे प्रतियोगिता दर्पण विज्ञान प्रगति आदि ।

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