क्या आप भी अकेले हैं?

क्या आप भी अकेले हैं? 

क्या आप भी अकेल हैं और आपका जवाब हां है तो यह पोस्ट सचमुच

केवल और केवल आप के लिए ही है।

क्योंकि इस पोस्ट में हम अकेलेपन को किसी बीमारी

की तरह नहीं बल्कि अकेलेपन को एक औषधि के रूप में देखने दिखाने वाले हैं।

दोस्तोंं,  मैं इस बात को पूरे विश्वास के साथ कह सकता हूँ कि आप ने

अपने जीवन में यह कहावत जरूर सुन रखी होगी कि अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता।

लोगों ने एक नहीँ सैकड़ों बार आपको इस कहावत का उदाहरण देकर जरूर

समझाने की कोशिश की होगी और बार बार यही बताने समझाने और कहने की

कोशिश की होगी कि अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता।

लेकिन दोस्तों आज यहां मामला उल्टा होने वाला है क्योंकि मैं यहां अपनी इस पोस्ट में

इसका ठीक उल्टा बताने वाला हूँ।

कहने का मतलब यह है कि मैं आपको आज अपनी

इस पोस्ट में यही समझाने बताने और कहने वाला हूँ कि दोस्तों

अकेला चना सचमुच में भाड़ फोड़ सकता है।

अकेला चना यूं भाड़ फोड़ सकता है

क्या आप अकेले हैं और यह बात मान चुके हैं कि अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता?

आप अगर यह बात आजतक सच मानते रहे हैं हैं और आगे भी इसी लकीर को पीटने वाले हैं, 

तो सावधान और तैयार हो जाइए। 

क्यों कि मैं आज से आपकी यह धारणा बदलने वाला हूँ कि

आज तक आप जो भी सोचते और समझते रहे हैं वह कतई सही नहीं है,

सच यह है कि अकेला चना भी भाड़ को फोड़ सकता है।

यानी अकेला व्यक्ति भी वह कर सकता है जिसकी आप ने कभी कल्पना भी न कई हो।

यहां पर सबसे बड़ा सवाल यह है कि अकेेला चना

अगर भाड़ फोड़ सकता है तो आखिर वह तरीका क्या है?

धैर्य से करें सामना अकेलेपन का 

दोस्तों, धैर्य रखें वह तरीका कोई अद्भुत अकल्पनीय तरीका नहीं है

बल्कि यह तरीका बेहद आसान और आम है।

आप जरूर इस वक्त यही सोचते होंगे कि आखिर वह

कौन सा तरीका है जिसकी वजह से अकेला चना भाड़ को फोड़ सकता है?

दोस्तों  वह तरीका और उपाय यह है कि हम उस अकेले चने को भाड़ में न डालकर

सबसे पहले खेत में डालेंगे और आप जानते हैं कि खेत

कभी भी बीज को वापस करते वक्त कंजूसी नहीं दिखाता।

हमारे खेत हमें एक एक दाने के बदले लाखों दानों की सौगात देते हैं।

अकेला कुछ भी नहीं होता 

कहने का मतलब यही है कि जीवन का यही वह सिद्धांत है जिसकी वजह से

हम न केवल अपने अकेलेपन को खत्म कर सकते हैं बल्कि अकेले पन को

ताकत भी बना सकते हैं।

बस इस सब के लिए सबसे जरूरी यही है कि हम अपने अकेले पन को

उस अकेले चने से तुलना न करें जो भाड़ को फोड़ नहीं सकता बल्कि हमें

अपने अकेलेपन को उस चने की तरह सोचना होगा जिसे हम भाड़ में डालने की बजाय

सबसे पहले खेत में डालते हैं और फिर खेत से इतने

चने लेकर आते हैं कि भाड़ को फोड़ा ही नहीं फाड़ा भी जा सकता है। 

सफल लोग सिर्फ अकेले होते हैं 

इस पोस्ट में हमें आपको यह बताना है कि अकेले होना या किसी तरह

अकेले रह जाना ही आपकी असफलता का कारण नहीं होता

बल्कि अगर गहराई से विचार करें तो हमें पता चलता है कि दुनिया का हर महापुरुष

और दुनिया का हर सफल व्यक्ति केवल और केवल या तो अकेला था

या फिर जब उसे सफलता मिली तब वह अकेला ही बचा था।

क्योंकि अक्सर यह होता है कि सफलता के लिए जिस मेहनत और लगन की जरूरत होती है

उसे हासिल करते करते किसी भी व्यक्ति के नकली साथी

अपना धैर्य खो देते हैं साथ ही साथ साथ छोड़ कर नौ दो ग्यारह हो जाते हैं।

इस तरह जब व्यक्ति की परीक्षा की असली घड़ी होती है तो उसके पास

साथ देने वाला कोई नहीं होता लेकिन जैसे ही व्यक्ति सफल होता है या प्रसिद्ध प्राप्त कर लेता है

तब उसके आसपास एक नहीँ सैकड़ों लोगों का समूह हो जाता है।

मैरी काॅम और मैरी क्वीन 

आप इसके लिए किसी का भी उदाहरण ले सकते हैं चाहे आप

छठवीं बार विश्व मुक्केबाजी प्रतियोगिता को जीतने वाली मैरीकाॅम का उदाहरण ले लें

या फिर लोगों के घरों में चौका बर्तन करके नोबेल पुरस्कार प्राप्त करने वाली

अद्वितीय महिला महान वैज्ञानिक मैरी क्वीन का उदाहरण ले लें।

आप इसके लिए महात्मा गांधी सुभाष चंद्र बोस का भी नाम ले सकते हैं

क्योंकि आईएनए के निर्माण और उसके बाद उसके सफल संचालन के लिए

बोस सैल्यूट के काबिल हैं तो दक्षिण अफ्रीका में अपने कष्ट मय संघर्षों से

गोरी सत्ता को हिलाने वाले बापू भी प्रसिद्धि पाने तक केवल अकेले थे।

इतना ही नहीं सहीद ए आजम भगतसिंह जिसे आज देश दुनिया का

बच्चा बच्चा गांधी से भी ज्यादा राष्ट्र समर्पित व्यक्ति मानता है तो वह भी

अपनी इस अद्वितीय छवि को गढ़ने के अंतिम पड़ाव यानी फांसी के फंदे में अकेले थे।

सहीद-ए-आजम भगतसिंह 

भगतसिंह के साथ साथ राजगुरु सुखदेव भी जो आज

दुनिया जहान में पूजे जाते हैं वह भी अपने अपने फंदे में अकेले ही थे।

यहां तक कि इलाहाबाद के अल्फ्रेड पार्क भारत का आजाद जब

एक देश द्रही गगद्दार की साजिश का शिकार होकर अंग्रेजी सत्ता से

लोहा लेते हुए स्वर्ग सिधारे तब वह भी अपनी पिस्तौल की तन्हा गोली के साथ सिर्फ अकेले थे।

लेकिन आज भारत की आजादी के लिए अपने प्राणों

की आहुति देने वाला कोई भी भारत का सच्चा सपूत अकेले नहीं है।

भारत की आजादी के लिए अपने पूरे जीवन भर दर दर भटकने वाले

हमारे अमर क्रांतिकारी सदैव हमारे दिलों में राज करते हैं और आजीवन करते रहेंगे।

यहां पर ध्यान देने की बात यह है कि हम यहां पर

अपने देश की आजादी के आंदोलन को बखान नहीं कर रहे

बल्कि हमारा उद्देश्य दुनिया के हर प्रसिद्धि की कहानी बताकर

असलियत में यह बताना है कि संसार में सभी सफल और याद किए जाने वाले लोग भी अकेले ही थे

अत: आप अपने अकेलेपन को अपनी असफलता का कारण न बनाएं। 

 

धन्यवाद

के पी सिंह किर्तीखेड़ा 07012019

About KPSINGH

मैने बचपन से निकल कर जीवन की राहों में आने के बाद सिर्फ यही सीखा है कि "जंग जारी रहनी चाहिए जीत मिले या सीख दोनों अनमोल हैं" मैं परास्नातक समाज शास्त्र की डिग्री लेने के अलावा CTET और UP TET परीक्षाएं पास की हैं ।मैंने देश के हिन्दी राष्ट्रीय समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में लेखन किया है जैसे प्रतियोगिता दर्पण विज्ञान प्रगति आदि ।

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