क्या आपको किसी ने ‘न’ बोला है?

क्या आपको किसी ने ‘न’ बोला है? 

क्या आपको किसी ने ‘न’ बोला है?

बुरा मत मानिए मेरा यह सवाल किसी और से नहीं बल्कि केवल और केवल आप से है।

आप सोचेंगे कि यह सवाल केवल आप से ही क्यों आखिर और भी लोग तो हैं इस दुनिया में?

तो जनाब मेरे दोस्तों, जरा मेरी बात का मतलब समझिए

मेरा मतलब जिस तरह आप से है यानी इस पोस्ट को पढने वाले से तो

उसी तरह इस पोस्ट को पढ़ने वाले का सम्बन्ध मुझसे है।

यानी इस सवाल का सम्बन्ध हर उस व्यक्ति से है जो अपने जीवन में आगे बढना तो चाहता है

लेकिन

“अगर किसी ने ‘न’कह दिया तो”

इस फोबिया का शिकार है और अंततः न तो वह कभी किसी से कुछ सीख पाता है, 

या किसी तरह की कोई मदद मांग पाता है और न ही वह अपने जीवन में

कभी किसी भी प्रकार की सफलता का स्वाद चख पाता है।

सरल शब्दों में कहें जिसे किसी के इंकार या न कहने

का डर है वह अपने जीवन में कभी सफल नहीं हो सकता। 

 

किसी ने ‘न’ कह दिया तो? 

क्या किसी ने आपको ‘न’ बोला है?

इस बात का सबसे आसान उदाहरण यही है कि हम

अक्सर अपने बचपन से किशोरावस्था में जो कुछ फील करके बड़े होते हैं, 

और जब बात किसी से अपनी फीलिंग्स बताने की होती है तो

हमें इसी न के डर का सामना करना पड़ता है।

हम सोचते हैं कि जिससे हम कुछ कहना चाहते हैं अगर उसने इंकार कर दिया

यानी उसने ‘न’कह दिया तो हमारा क्या होगा?

इसका परिणाम यह होता है कि हम अपने इस मनोवैज्ञानिक डर की वजह से

बचपन से ही डरना सीख जाते हैं, 

और वह कभी नहीं हासिल कर पाते जो हासिल करने की हसरत रखते हैं।

शायद इसीलिए विद्वान और अनुभवी लोगों द्वारा इस

कंडिशन में रहने या पड़ने वालों को यही सलाह दी है कि

जितना जल्दी हो सके अपने दिल की बात उससे कह देना चाहिए

जिसे आप सचमुच कुछ कहना चाहते हैं। क्या किसी ने ‘न’ बोला है? 

यह तो महज एक  उदाहरण है

क्या आपको किसी ने ‘न’ बोला है?

इस संबंध में ऊपर जो उदाहरण आपने पढा वह महज एक उदाहरण है

जबकि जीवन की सच्चाई यही है कि इस तरह के उदाहरणों से

हमारा आपका पूरा जीवन भरा पड़ा है।

क्या आपने महसूस किया है कि पूरी दुनिया सफल व्यक्ति से

उसकी सफलता का राज जानने के लिए हर वक्त उत्सुक रहती है।

जबकि दूसरी ओर सफल व्यक्ति खुद हैरान परेशान रहते हैं कि

आखिर दुनिया हमसे जानना क्या चाहती है क्योंकि हमने तो वही किया है

जो किसी को भी करना चाहिए।

यहाँ ध्यान देने की बात यही है कि यद्यपि सफल लोगों को लगता है कि

वह आम हैं लेकिन वह सचमुच कुछ खास होते हैं।

यहां खास कहने का आशय यह है कि जीवन में सफल वही होता है

जो किसी के संभावित न कहने से घबराता नहीं है 

हम आम लोगों को देखते हैं वह कोई भी काम करने के पहले ही इस सोच से भर जाते हैं कि

अगर किसी ने हम पर विश्वास नहीं किया तो हम क्या करेंगे ।

वह यह भी सोचते हैं कि अगर हमने जीवन में आगे बढने के लिए किसी  से मदद मांगा

और उसने न कर दिया तो क्या होगा? 

कहने का मतलब है हम में से लगभग सभी असफल लोगों की

यह खासमखास हकीकत होती है कि हम किसी से कुछ कहने के पहले ही

यह सोचकर हार मान लेते हैं कि अगर सामने वाले ने न कर दिया तो क्या होगा? 

 

 

जरा इस तरह भी सोचिए 

क्या आपको किसी ने ‘न’ कहा है?

इसी सवाल के जवाब के संदर्भ में बात अगर हम आगे बढ़ाएं तो

मान लीजिए आपको किसी की मदद चाहिए और आप

इस बात से भी परिचित हैं कि आपको कौन मदद कर  सकता है ।

बावजूद इसके आप को उनसे मदद मांगने में संकोच होता है।

आपको लगता है कि अगर उन्होंने न कह दिया तो क्या होगा।

दोस्तों हम यहां तक तो सोच लेते हैं कि अगर किसी ने

हमारे कुछ मांगने या कहने पर न कर दिया तो क्या होगा? 

लेकिन आश्चर्य और घोर ताज्जुब की बात यह है कि इसके आगे हम कुछ भी सोच नहीं पाते।

सच तो यह है कि क्या होगा का सवाल ही बेमानी है।

सोचना तो उसे चाहिए जिसका कुछ हो सकता हो लेकिन

जो खुद किसी की मदद की अपेक्षा कर रहा है उसे इस चिंता में नहीं पड़ना चाहिए।

किसी ने हमें हमें न कह दिया तो क्या होगा हम यह तो सोच लेते हैं

लेकिन हम यह नहीं सोच पाते की अगर हम अपनी बात ही किसी को नहीं बताएंगे

तब तो होने और न होने की कोई संभावना ही नहीं बनेगी।

इस लिए संकोच में रहकर कुछ न कहने से अच्छा है किसी से अपने मन की बात कह देना चाहिए।

क्योंकि अगर किसी ने आपकी मदद कर दी तब तो

बाजी ही पलत जाएगी लेकिन नहीं कहेंगे तो बाजी क्या भाजी भी नहीं पलटेगी। 

धन्यवाद

के पी सिंह किर्तीखेड़ा 10012019

 

 

 

About KPSINGH

मैने बचपन से निकल कर जीवन की राहों में आने के बाद सिर्फ यही सीखा है कि "जंग जारी रहनी चाहिए जीत मिले या सीख दोनों अनमोल हैं" मैं परास्नातक समाज शास्त्र की डिग्री लेने के अलावा CTET और UP TET परीक्षाएं पास की हैं ।मैंने देश के हिन्दी राष्ट्रीय समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में लेखन किया है जैसे प्रतियोगिता दर्पण विज्ञान प्रगति आदि ।

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