कटु वचन क्या क्या कर सकते हैं?

कटु वचन क्या क्या कर सकते हैं? 

कटु वचन क्या क्या कर सकते हैं?

भाइयों, बहनों और मेरे प्रिय दोस्तो. कटु वचन क्या क्या कर सकते हैं

इसे जानने के पहले हमारे आपके लिए जरूरी यह भी जानना है कि

आखिर कटु वचन कहते किसे हैं?

क्या कटु वचन का मतलब कटे फटे हुए वचनों से है या कुछ और?

दोस्तों, कटु वचन का मतलब कटे हुए या फटे हुए वचनों से नहीं है

बल्कि कटु वचन का मतलब ऐसे वचनों से है जो दिल और दिमाग के साथ ही साथ

आत्मा को ही काट पीट कर टुकड़े टुकड़े कर देते हैं।

कटु वचन की महिमा न्यारी 

इतना ही नहीं यह कटी पिटी और लुटी आत्मा इतनी विनाशकारी भी बन जाती है

कि यह महाभारत का युद्ध तक करा सकती है।

दोस्तों, मुझे नहीं लगता है कि  आपको यह याद दिलाने की जरूरत है कि

द्रोपदी के इन्हीं कटु वचनों के कारण दुर्योधन ने बदला लेने के लिए

महाभारत की रचना ही कर डाली थी।

कटु वचन क्या क्या कर सकते हैं इनके एक नहीँ सैकड़ों उदाहरण मौजूद हैं

जो हमको आपको सबको बार बार यह याद दिलाने के लिए काफी हैं कि

कटु वचन बहुत कुछ कर सकते हैं। 

क्या कटु वचन भारत का बंटवारा भी कर सकते हैं? 

क्या कटु वचन भारत पाकिस्तान का बंटवारा भी कर सकते हैं?

इस सवाल का साफ और सरल जवाब है जी हां कटु वचन

भारत पाकिस्तान का बंटवारा भी कर सकते हैं।

सच कहें तो कटु वचन सिर्फ भारत पाकिस्तान का बंटवारा कर ही नहीं सकते, 

बल्कि हकीकत में भारत पाकिस्तान का बंटवारा केवल और केवल कटु वचनों की ही देन है।

कटु वचन और हम सब

इस पोस्ट में अगर आप मेरे साथ शुरु से आखीर तक रहते हैं

तो आप न केवल यह जान पाएंगे कि कटु वचनों की ही देन भारत पाकिस्तान का बंटवारा है

बल्कि आपको इसके आगे यह भी पता चलेगा कि किसी और के नहीं

बल्कि भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू के कटु वचनों के कारण

भारत पाकिस्तान का बंटवारा और निर्माण हुआ था।

ताज्जुब न करें यह हकीकत है?

दोस्तों, यह सच है कि हमारे देश का विभाजन अंग्रेज़ी सरकार की नीतियों की हकीकत थी

लेकिन इससे भी बड़ी भारी सच्चाई यह है कि यदि हमारे देश का बंटवारा

भारत पाकिस्तान के रूप में हुआ है तो इसके लिए

सबसे बड़ा कारण भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू के वे कटु वचन हैं

जो उन्होंने भारत की आजादी को हासिल करते वक्त पाकिस्तान के निर्माता निर्देशक और

तथाकथित कायदे आजम जिन्ना को कहे थे।

दोस्तों आप में से शायद बहुत लोगों को यह जानकारी न हो कि जिन्ना के पिता के पिता हिन्दू थे

लेकिन जिन्ना के पिता अपने धंधे को चमकाने के लिए मुसलमान बने थे

और जिन्ना अपनी राजनीति को चमकाने के लिए मुसलमानों के मसीहा बने थे।

कटु वचन और भारत की आजादी 

जिन्ना को अंग्रेजी सरकार ने भड़काया था कि तुम पाकिस्तान मांगते रहो

हम तुम्हें पाकिस्तान देकर ही जाएंगे लेकिन इसके बाद भी इतिहास में यह दर्ज है कि

भारत की कोकिला सरोजनी नायडू ने जिन्ना और गांधी को साक्षात दो महात्मा कहा था।

इसका कारण यह था कि जिन्ना वह  व्यक्ति थे जिन्होंने गांधी जी को सबसे पहले यह कहा था

कि आप मुसलमानों की हर नाजायज़ मांगों को

मानकर मुस्लिम तुष्टिकरण को बढ़ावा देने जा रहे हैं।

यहां इन बातों का मतलब यह है कि जिन्ना शुरू से पाकिस्तान पर अडिग नहीं थे।

भले ही अंग्रेज उन्हें बरगलाते रहते थे लेकिन वह अंतिम तौर पर देश का विभाजन नहीं चाहते थे।

जिन्ना की बस एक ही जिद थी कि उन्हे आजादी के बाद भारत का प्रधानमंत्री बनाया जाए।

पंडित नेहरू भी भारत का प्रधानमंत्री बनना चााहते थे।

कटु वचन ने जब छेड़ी जंग

जब जिन्ना और नेहरू दोनों खुद को भारत का भावी प्रधानमंत्री की धुन में थे

तभी जिन्ना के डाक्टर ने कांग्रेस के नेताओं को एक संदेश भिजवाया था कि

आप लोग जिन्ना को प्रधानमंत्री बन जाने दीजिए क्यों कि वह ज्यादा दिन तक जिंदा नहीं रहने वाले।

जिन्ना के डाक्टर के संदेश को कांग्रेस ने ज्यादा गंभीरता से नहीं लिया।

अगर कांग्रेस ने जिन्ना के डाक्टर की बात मानी होती तो देश की दिशा और दशा कुछ और ही होती।

आपको बता दें कि भारत के विभाजन के सबसे कट्टर विरोधी गांधी जी थे।

वह नहीं चाहते थे कि भारत को विभाजित करने के बाद भारत को आजादी मिले

इसके लिए गांधी जी जिन्ना की जिद के आगे झुकने को भी तैयार थे।

सारा देश जानता है कि नेहरू और जिन्ना दोनों लोग भारत का प्रधानमंत्री बनना चाहते थे

शायद इसीलिए भारत का विभाजन तक स्वीकार करने की योजना बन गयी थी।

गांधी जी ने जब किया सुलह 

गांधी जी पहले ही यह कह चुके थे कि भारत

पाकिस्तान का बंटवारा मेरी लाश में होगा इसलिए वह अंतिम प्रयास के रूप में जिन्ना से बात की

गांधी जी ने जिन्ना से कहा कि अगर आप चाहें तो आप ही भारत के प्रधानमंत्री बन जााएं

पर भारत का विभाजन नहीं होना चाहिए।

जिन्ना खुद इस समय तक भारत का बंटवारा नहीं चाहते थे

इसलिए जिन्ना ने गांधी जी की बात मान ली।

यह वह नाजुक समय था कि अगर देश के नेता धैर्य रखते तो

भारत पाकिस्तान की कहानी कुछ अलग होती लेकिन शायद इतिहास को कुछ और ही मंजूर था।

जब नेहरू जी को यह बात पता चली कि जिन्ना भारत के प्रधानमंत्री बनने के बदले

पाकिस्तान की मांग को वापस लेने को तैयार हो गए हैं तो उनके मुंह से कुछ ऐसा निकल गया,

जिसने पल भर में इतिहास पलट कर रख दिया।

 

पंडित जी के कटु वचन 

पंडित जवाहर लाल नेहरू ने जब सुना  कि जिन्ना बंटवारे के बदले

भारत का प्रधानमंत्री बनना स्वीकार कर लिया है तो कहा,

“प्रधानमंत्री के रूप में जिन्ना को स्वीकारना तो दूर मैं जिन्ना को अपने मंत्रिमंडल का चपरासी तक नहीं बनाऊंगा। ”

बस यही एक वाक्य है जिसने भारत का विभाजन न होने की

सारी संभावना को ही खत्म कर दिया था।

जब नेहरू जी की बात जिन्ना को पता चली तो उन्होंने कसम ली थी कि

अब तो भारत पाकिस्तान बन कर ही रहेगा।

इस तरह आप खुद देख सकते हैं और समझ सकते हैं कि कटु वचन आखिर क्या क्या कर सकते हैं? 

धन्यवाद

के पी सिंह किर्तीखेड़ा 11012019

 

About KPSINGH

मैने बचपन से निकल कर जीवन की राहों में आने के बाद सिर्फ यही सीखा है कि "जंग जारी रहनी चाहिए जीत मिले या सीख दोनों अनमोल हैं" मैं परास्नातक समाज शास्त्र की डिग्री लेने के अलावा CTET और UP TET परीक्षाएं पास की हैं ।मैंने देश के हिन्दी राष्ट्रीय समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में लेखन किया है जैसे प्रतियोगिता दर्पण विज्ञान प्रगति आदि ।

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