राष्ट्रीय युवा दिवस और युवा वर्ग

राष्ट्रीय युवा दिवस और युवा वर्ग 

राष्ट्रीय युवा दिवस और युवा वर्ग नामक इस पोस्ट का एकमात्र मकसद यही है कि

आज राष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर हम आप सब लोग कुछ चर्चा युवाओं की कर लें

तो कुछ चर्चा युवाओं के आदर्श प्रतीक स्वामी विवेकानंद की भी कर लें।

दोस्तों, हम आप सभी लोग जानते हैं कि भारत सरकार ने 1984 में

यह निर्णय लिया था कि वह हर साल 12 जनवरी को

स्वामी विवेकानंद जी के जन्म दिवस के उपलक्ष्य में राष्ट्रीय युवा दिवस मनाएगी।

इस निर्णय के बाद भारत सरकार 1985 सेे नियमित रूप से 12 जनवरी को

राष्ट्रीय युवा दिवस मनाती है तथा 12 जनवरी से ही युवा सप्ताह की शुरुआत करती है।

दोस्तों, यहां तक तो हम समझ गये कि राष्ट्रीय युवा दिवस हम क्यों और कब से मना रहे हैं

लेकिन हमें यह जानना भी बेहद जरूरी है कि आखिर हम युवा किसे कहते हैं?

हम युवा किसे कहते हैं? 

हम युवा किसे कहते हैं?

इस सवाल का जवाब यह है कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर

आजकल इस शब्द की जो अवधारणाएं हैं उनके अनुसार

भारत सरकार युवा उसे मानती है जिनकी आयु राष्ट्रीय

युवा नीति 2003 के अनुसार 13 से 35 वर्ष के बीच होती है।

जबकि अगर हम संयुक्त राष्ट्र संघ की परिभाषा की बात करें तो उसके अनुसार युवा वह है

जिसकी उम्र 15 से 24 वर्ष होती है।

इसी तरह राष्ट्र मंडल देशों की अपनी गणना के

अनुसार युवा उसे कहते हैं जिसकी उम्र 15 से 29 वर्ष के बीच होती है।

यहां एक बात यह भी ध्यान में रखने वाली है कि युवा

केवल आप उम्र से ही नहीं होते इसके लिए जोश और जज्बा भी मायने रखता है। 

वास्तविक युवा कौन हैं? 

स्वामी विवेकानंद की 156 वीं जयंती के अवसर पर युवा शब्द के मायने की बात करें तो

इतिहास साक्षी है किसी राज्य के लिए युवा वही है जो  अस्त्र-शस्त्र संचालन करें तो

समाज और राष्ट्र ने युवा उसे माना है जो सजग शक्ति के प्रतीक होते हैं।

युवा कौन है इस पर भावनात्मक रूप से विचार करें तो युवा वह है जिसमें

बालपन का अल्हड़पन और किशोरावस्था का उत्साह होने के साथ ही साथ

वैचारिक प्रौढ़ता के प्रस्फुटन का सम्मिश्रण होता है।

इन सब बातों से भी महत्वपूर्ण यह है कि युवा कहलाने

की योग्यता केवल खून की दौड़ान या फैशन की लपक झपक ही नहीं होती

बल्कि असली युवा वह होता है जो तन मन से भी

सजग उत्साही और हर पल जीवंतता का प्रतीक होता है।

अगर आज आप भी जनसंखया विस्फोट, दहेज के दानव के साथ ही साथ

हिन्दू मुस्लिम के अलावा ऊंच नीच की भावना से ग्रस्त हैं तो आप

भले ही 13 से 35 वर्ष के ही क्यों न हों आप कतई युवा नहीं हैं। 

भगत सिंह हैं युवाओं की पहचान 

राष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर अगर हम युवाओं की असली पहचान की बात करें तो

भगत सिंह, स्वामी विवेकानंद, चंद्र शेखर आजाद, राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खां

करतार सिंह सरोपा, बंगाल की अनुशीलन समिति के कर्णधारों

चटगांव के मिस्टर सूर्य सेन की क्रांति मंडली,महाराष्ट्र के वीर सावरकर सहित

चापेकर बंधुओं के दिल दिमाग और खून की दौड़ान को ही हम युवा कहते हैं।

हमारी भारतीय सभ्यता उसे युवा नहीं कहती जो अच्छी खासी नौकरी में होने के बाद भी

दहेज मांगकर शादी करता है और बेटी के होने के पहले ही भ्रूण हत्या करके

अपने कुटिल मांबाप की इच्छा पूरी करना ही युवाओं का सपना समझता है।

आज के हालात यह हैं कि जो हमें युवा दिखते हैं वह वास्तव में युवा नहीं बल्कि

युवाओं के वेश में छद्म युवा होते हैं। 

धन्यवाद

के पी सिंह किर्तीखेड़ा 12012019

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मैने बचपन से निकल कर जीवन की राहों में आने के बाद सिर्फ यही सीखा है कि "जंग जारी रहनी चाहिए जीत मिले या सीख दोनों अनमोल हैं" मैं परास्नातक समाज शास्त्र की डिग्री लेने के अलावा CTET और UP TET परीक्षाएं पास की हैं ।मैंने देश के हिन्दी राष्ट्रीय समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में लेखन किया है जैसे प्रतियोगिता दर्पण विज्ञान प्रगति आदि ।

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