शाह फैसल की बात कितनी सही कितनी झूठ

शाह फैसल की बात कितनी सही कितनी झूठ? 

शाह फैसल की बात कितनी सही कितनी झूठ?

दोस्तों, इससे पहले कि हम इस बात की पड़ताल करने में मशगूल हो जाएं

आपको यह बताना बेहद जरूरी है कि शाह फैसल

जम्मू-कश्मीर राज्य के पहले आईएएस बनने का सौभाग्य प्राप्त करने वाले युवा हैं

इनका गृह जनपद कुपवाड़ा है।

शाह फैसल ने 2009 में आईएएस परीक्षा पास की थी वह भी मेरिट में दूसरे स्थान पर आकर।

दोस्तों, शाह फैसल ने 9 जनवरी 2019 को अपनी नौकरी से इस्तीफा

  यह कहते हुए दे दिया है कि वह 10 साल से जेल में बिता रहे थे

इसलिए खुद को कैद से मुक्त होने के लिए यह कदम उठा रहे हैं।

 

शाह फैसल अजूबा नहीं हैं 

आपको बता दें शाह फैसल कोई अजूबा नहीं हैं और न ही कोई अनोखे और पहले व्यक्ति हैं

जिन्होंने इतनी बड़ी नौकरी से इस्तीफा दिया है बल्कि शाह फैसल से पहले

इस देश में एक नहीँ बल्कि सैकड़ों लोगों ने सरकारी नौकरी वह भी कलक्टरी तक से इस्तीफा दिया है।

यहां पर आपको यह बताना जरूरी है कि इससे पहले यानी शाह फैसल की

जेल से आजादी के पहले भी तमाम लोगों ने शाह फैसल से भी बड़े बड़े पदों से इस्तीफा दिया है

लेकिन शाह फैसल और उनके इस्तीफे के कारणों में जमीन का अंतर रहा है।

शाह फैसल ने जहां इस नौकरी और देश का अपमान करते हुए इस्तीफा दिया है

वहीं बाकी लोगों ने इस नौकरी और इस देश का सम्मान रखते हुए इस्तीफा दिया है।

लोगों ने जहां देश की सेवा में खुद को और भी गहराई से जोड़ने की कोशिश में इस्तीफा दिया है

तो शाह फैसल ने इस देश के दुश्मनों से कदम से कदम मिलाकर चलने के लिए इस्तीफा दिया है ।

शाह फैसल के मन में अगर रत्तीभर भी भारत के लिए प्यार और श्रद्धा होती

तो वह इस्तीफा तो देते लेकिन वह अपने बयानों से इस देश के संविधान और

इस विश्व की सबसे कठिन परीक्षा का अपमान भी नहीं करते। 

 

क्या शाह फैसल को पता है इस नौकरी के मायने क्या हैं?

शाह फैसल ने जिस आईएएस की नौकरी से इस्तीफा दे दिया है

उसी नौकरी के इंटरव्यू में एक सवाल अक्सर पूछा जाता है कि

आप आईएएस क्यों बनना चाहते हैं तो अक्सर झूठ मूठ कह दिया जाता है कि

हम देश की सेवा करने के लिए आई ए एस बनना चाहते हैं।

यह सवाल एक कामन सवाल है जिसका जवाब आपको जरूरी नहीं है कि नौकरी दिला ही दे

लेकिन जब यह पूछा जाता है कि आपको आईएएस क्यों बनाया जाए तो

इसका जवाब मायने रखता है और हो सकता है कि आपको नोकरी दिला दे।

दोस्तों यहां पर इस परीक्षा और इस नौकरी को समझने के लिए दो सवाल हैं

जिनमें यह बात छिपी हुई है कि भारत में आईएएस की परीक्षा पास करना

और इस पद की जिम्मेदारी निभाना दो अलग अलग चीजें हैं।

शाह फैसल हों या भारत का कोई भी अन्य जाति धर्म

का युवक वह तब तक इस नौकरी और इसके दायित्व को ईमानदारी से नहीं समझ सकता

जब तक उसके दिल दिमाग में भारत की बजाय अपने घर का भूत सवार रहेगा।

शाह फैसल भले ही आज आईएएस को जेल बता रहे हों लेकिन ईमानदारी की बात यही है कि

जब इस आदमी से इंटरव्यू में पूछा गया होगा कि आप आईएएस क्यों बनना चाहते हैं

तो निश्चित ही इस कश्मीरी आदमी ने झूठ बोला होगा।

आज जब दस साल में रुपया और रुतबा हासिल करने

की बारी एक निश्चित अवधि तक के लिए खत्म हो गई है तो

इन जनाब को वह नौनौकरी जेल लगने लगी है जिसने कश्मीर में ही नहीं पूरी दुनिया में नाम दर्ज कराया। 

खास खबर बनने की कहीं लत तो नहीं है फैसल मियां को? 

एक आईएस का क्या काम होता है अगर कोई आदमी पूरी ईमानदारी से जान ले तो

वह यह कतई नहीं कह सकता कि इस पद पर रहते हुए वह दुनिया का कल्याण नहीं कर सकता ।

वह यह बात केवल झूठ मूठ और किसी जाति धर्म के

नाम पर मर मिटने वाले झुंड का हिस्सा बनने की गरज से भले कहता फिरे

लेकिन सच यह है कि अगर आप में जरा सी भी गैरत और ईमानदारी है

तो आप तमाम संवैधानिक बंधनों के बाद भी एक दो नहीं लाखों करोड़ों का भला कर सकते हैं।

इस देश में मुहम्मद मुस्तफा जैसे भी आईएस हुए हैं जो यूपी के फतेहपुर जैसे

अति पिछड़े और सवर्ण बाहुल्य इलाके में डीएम रहे हैं और पूजे गये हैं अपने काम की वजह से।

कहने का मतलब यही है कि अगर आपको अलगाव वाद का मजा लूटकर

पीढियों की ऐशगाह बनाना है तो फिर आपके लिए किसी पार्टी का भक्त होना ज्यादा जरूरी है

बजाय भारतीय संविधान की रक्षा करते हुए अपने दायित्व निभाने के।

मैं दावे के साथ यह कहना चाहता हूं कि अलगाव वाद

की पट्टी पढाने के लिए देश से बढ़कर अपनी जाति या अपने घर के बारे में सोचना एक बात है

लेकिन सब कुछ अपना भूल कर अपने देश की सेवा

करने के जज्बे से भरा भदूला होना बिल्कुल ही दूसरी बात है।

याद रखें यह नौकरी केवल मजा ही नहीं देती अपने राष्ट्रीय दायित्व के कारण

यह नौकरी कुछ खास मानसिकता रखने वालों को सजा भी देती है। 

 

इस नौकरी के असली मायने

अगर आप यह समझते हों कि भारतीय सिविल सेवा किसी क्लर्क की तरह एक नौकरी है

या फिर आप यह समझते हों कि भारतीय सिविल सेवा कोई स्कूल टीचर की नौकरी है

तो आप गलत सोचते हैं। 

यह पोस्ट मैन या बिजली विभाग के इंचार्ज की तरह की नौकरी नहीं है।

यह पुलिस या अर्ध सैनिक बलों की तरह की नौकरी नहीं है।

भारतीय सिविल सेवा किसी सरकारी डाक्टर या कम्पाउंडर की नौकरी नहीं है।

सिविल सेवा सच पूछिए तो किसी भी अन्य सरकारी

नौकरी या फिर प्राईवेट नौकरी की तरह की नौकरी नहीं है

बल्कि यह भारत की किसी भी नौकरी की पराकाष्ठा है।

कुछ पत्रकारिता के माहिरों को लगता है कि भारतीय सिविल सेवा से

वह ज्यादा चिंतनशील कार्य करते हैं तो यह भी एक भ्रम है।

भारतीय सिविल सेवा हकीकत में केवल प्रस्थिति नहीं है बल्कि सच यह है कि

भारतीय सिविल सेवा प्रस्थिति नहीं भूमिका का नाम है वह भी प्रदत्त नहीं

केवल और केवल अर्जित प्रस्थिति का नाम है भारतीय सिविल सेवा।

शाह फैसल ही नहीं आज तक सैकड़ों लोग इस सिविल सेवा के वास्तविक भार को

झेल नहीं पाए हैं और इस्तीफा देकर चलते बने हैं। 

धन्यवाद

के पी सिंह किर्तीखेड़ा 06022019

 

 

About KPSINGH

मैने बचपन से निकल कर जीवन की राहों में आने के बाद सिर्फ यही सीखा है कि "जंग जारी रहनी चाहिए जीत मिले या सीख दोनों अनमोल हैं" मैं परास्नातक समाज शास्त्र की डिग्री लेने के अलावा CTET और UP TET परीक्षाएं पास की हैं ।मैंने देश के हिन्दी राष्ट्रीय समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में लेखन किया है जैसे प्रतियोगिता दर्पण विज्ञान प्रगति आदि ।

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