वैलेंटाइन डे मतलब आओ नकली प्यार करें

वैलेंटाइन डे मतलब आओ नकली प्यार करें! 

वैलेंटाइन डे मतलब आओ नकली प्यार करें! 

दोस्तों, कुछ कहने के पहले मैं आपको वैलेंटाइन डे की कहानी सुनाना चाहता  हूं। 

इस कथा का वर्णन सन12 60 में संकलित की गई

‘आरिया आफ जैकोब्स डी वराजिन’ नामक किताब में मिलता है।

इस कथा के अनुसार रोम में तीसरी शताब्दी में सम्राट क्लाडियस का साम्राज्य था।

सम्राट विवाह के खिलाफ विचार रखता था उसके अनुसार

विवाह करने से पुरुषों में बुद्धि और शक्ति की कमी हो जाती है।

राजा कुल मिलाकर शादी विवाह के सख्त खिलाफ था।

उसकी यह राजाज्ञा थी कि उसका कोई भी सैनिक या कर्मचारी विवाह नहीं करेगा ।

सौभाग्य से इसी राज्य में एक संत रहता था जिसका नाम वैलेंटाइन था।

उसने इस अव्यवहारिक तथा क्रूर आदेश का न केवल विरोध किया

बल्कि चुपके से तमाम सैनिकों तथा कर्मचारियों  का विवाह भी संपन्न करा दिया।

जब संत की इस बात की जानकारी राजा को हुई तो

उसने संत को गिरफ्तार करके फांसी की सजा सुना दी।

राजा इस बात से अनजान था कि संत वैलेंटाइन राजा की बेटी से ही प्यार करते थे।

संत को 6 फरवरी को सजा सुनाई गई कि 14 फरवरी को फांसी दी जाएगी।

6से14 फरवरी के बीच 8 दिनों को संत ने बहुत ही प्यार में बिताया।

कहा जाता है कि जिस दिन संत को फांसी होनी थी उस दिन को संत ने बहुत ही स्पेशल मनाया

तभी से इस दिन को आज तक लोग वैलेंटाइन डे के रूप में मनाते हैं।

अब यह बात अलग है कि आज  यह दिन बाजारों के लिए कमाई का जबर्दस्त दिन बन चुका है।

वैलेंटाइन डे आज की   हकीकत 

वैलेंटाइन डे मतलब आओ नकली प्यार करें बस यूं ही लिखी गई एक लाइन भर नहीं है

बल्कि यह आज के राज और समाज की सच्चाई है।

यह सचमुच की सच्चाई उस सच्चाई की है जिसकी हकीकत महज यह है कि

इस दिन लोग प्यार के नाम पर गजब का ड्रामा और वह सब कुछ करते हैं

या करना चाहते हैं जिसका दूर दूर तक कम से कम वैलेंटाइन के प्यार से

कोई संबंध या मतलब नहीं होता।

जो प्यार का मतलब भी नहीं जानते वह आकर्षण को प्यार समझ कर

संत वैलेंटाइन को याद जरूर करते हैं लेकिन जब उनका क्षणिक मतलब पूरा हो जाता है

तब वह सब कुछ भूल जाते हैं।

आज वैलेंटाइन डे सबसे बड़ा मार्केट है गांव देहात से लेकर मेट्रोपॉलिटन सिटीज तक

यह धंधा इस कदर हर दिन बढ़ रहा है कि धंधेबाज इस दिन प्यार के नाम पर

लाखों करोड़ों की कमाई कर रहे हैं और कहीं न कहीं किसी न किसी एंगल से

संत वैलेंटाइन को बदनाम कर रहे हैं। 

वैलेंटाइन डे संत याद हैं सहीद नहीं 

आज भारत की आबादी में आधे से ज्यादा युवा लोग हैं जो प्यार के नाम पर

14 फरवरी को पूरी सिद्दत से रोम के महान संत को अपने स्वार्थ के लिए याद करते हैं

लेकिन

धन्य है भारत का हर वह युवा जो 14 फरवरी तो जानता है

लेकिन उसे यह नहीं पता कि 14 फरवरी को ही सहीद

ए आजम भगतसिंह राजगुरु और सुखदेव को 23 मार्च 1931 को जो फांसी हुई थी

उसका फरमान इसी 14 फरवरी की तारीख को ही जारी किया गया था।

आज प्यार के नाम पर प्यार का वह गजब तमाशा चल रहा है कि

अदालतें भरी पड़ी हैं अस्पताल भरे पड़े हैं कचरों के डिब्बे उफान पर हैं

लेकिन पूरी दुनिया प्यार के नाम पर ढोंंगी बनने की जिद पर उतर आई है। 

धन्यावाद

के पी सिंह किर्तीखेड़ा 10022019

About KPSINGH

मैने बचपन से निकल कर जीवन की राहों में आने के बाद सिर्फ यही सीखा है कि "जंग जारी रहनी चाहिए जीत मिले या सीख दोनों अनमोल हैं" मैं परास्नातक समाज शास्त्र की डिग्री लेने के अलावा CTET और UP TET परीक्षाएं पास की हैं ।मैंने देश के हिन्दी राष्ट्रीय समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में लेखन किया है जैसे प्रतियोगिता दर्पण विज्ञान प्रगति आदि ।

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