मोदी से किसको क्या दिक्कत है?

मोदी से किसको क्या दिक्कत है? 

मोदी से किसको क्या दिक्कत है?

माफ करना मेरे दोस्तों, अगर आपको यह बात सच में जानना है कि

मोदी से किसको क्या दिक्कत है?

तो आपको पहले मेरी एक बात और भी समझनी होगी

वह बात यह है कि भारतीय सिविल सेवा परीक्षा इस भारत देश की ही नहीं

बल्कि विश्व की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक है।

अब आप खुद अंदाजा लगा सकते हैं कि इस परीक्षा को पास करने के लिए

परीक्षार्थी किन किन किताबों को और किन किन विद्वानों और आदर्शों को पढते होंगे?

मोदी ही असली दिक्कत हैं 

सबसे बड़ी बात तो यह है कि आप सोचिए इस विश्व की सबसे कठिन परीक्षा में

पूछा क्या जाता होगा?

जहां तक मुझे पता है अगर आप हिंदी को इस परीक्षा के एक विषय के रूप में चयन करते हैं

तो आपको तुलसीदास, कबीरदास, सूरदास, मीराबाई जय शंकर प्रसाद, 

महाकवि निराला, सुमित्रा नंदन पंत, राष्ट्र कवि दिनकर सोहनलाल द्विवेदी

आदि को आप को पढना पड़ता है।

इसी तरह आप जिस भी विषय को भारतीय सिविल

सेवा परीक्षा के एक विषय के रूप में चयन करते हैं तो आपको

उस विषय के गहरे ज्ञान के लिए उस विषय के माहिर लोगों के विचारों

अनुभवों और तथ्यों को पढ़ना पड़ता है।

सिविल सेवा और मोदी

आप यह सोच रहे होंगे कि बात तो मैंने मोदी जी से शुरू की थी

लेकिन मैं भारतीय सिविल सेवा में कैसे पहुंच गया?

जी हां दोस्तों इसका भी एक कारण है।

दोस्तों इसका असली कारण यह है कि मैं आपको यह बताना चाहता था कि

विश्व की सबसे कठिन और बड़ी परीक्षा में जिनके बारे में पूछा जाता है

जरा उनके बारे में गौर करें।

तुलसीदास, मीराबाई, सूरदास, कालिदास, कबीरदास यह वह नाम हैं

जिनके साथ एक भी बी ए, एम ए, एम फिल और पीएचडी आदि की डिग्री नहीं है

फिर भी इन डिग्रियों को हासिल करने वाले इन्ही लोगों को पढ़कर ही

सब कुछ हासिल करते हैं तो आखिर क्यों?

मोदी बिना डिग्री ही सबक हैं 

क्या सूरदास, तुलसीदास, कबीरदास को इस देश की

सबसे प्रतिष्ठित परीक्षा के पाठ्यक्रम में शामिल करना चाहिए?

क्यों कि जिसके पास स्पष्ट डिग्री नहीं है तो उसके बारे में पढ़ने का फायदा ही क्या?

लेकिन दोस्तों इसके बाद भी भारतीय सिविल सेवा

परीक्षा जैसी प्रतिष्ठित परीक्षा में ऐसे ही लोगों को

पाठ्यक्रम बनाया गया है जिनके नाम कोई डिग्री नही है तो

इसका एकमात्र कारण यह है कि महान कोई डिग्री से नहीं बल्कि

अपने आचरण विचार कृतित्व और व्यक्तित्व से बनता है जैसे

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदर दास मोदी।

कुछ खलमंडली टाइप के अज्ञानी कम खुरपेछी ज्यादा लोग जो

इस देश में खुद को सबसे बड़ा डिग्री धारी समझते हैं वो मोदी जी से

उनकी डिग्री पूछने का  आंदोलन चला रहे हैं।

देश की गली गली में यह खलमंडली टाइप के लोग

जब मोदी जी की डिग्री के बारे में सवाल करते हैं तो उनकी हालत

पढे लिखे उन्हीं गैर जानकारों के समान हो जाती है जो

इस सवाल का आज तक कोई जवाब नहीं ढूंढ पाए हैं कि बिना डिग्री वालों को

डिग्री वाले आई ए एस परीक्षा को पास करने के लिए आखिर क्यों पढते हैं?

आप गौर करें दिक्कत किसे है? 

मोदी से किसको क्या दिक्कत है?

इस विषय पर यूं तो एक महा ग्रंथ तैयार हो सकता है लेकिन यहां आपको

बस इस बात पर गौर करना है कि इस देश के संविधान को किसी की डिग्री से मतलब नहीं है।

आप चाहे डिग्री धारी हों या डिग्री विहीन सभी को देश की जनता का

नायक बनने का बराबर अधिकार है।

लेकिन इसके बावजूद अरविंद केजरीवाल केवल और केवल मोदी विरोधियों को

खुश करने के लिए एक बेमतलब और बेहयात बात पर हर वक्त फिदा रहते हैं

और यह कोशिश करते रहते हैं कि चूंकि वह ज्यादा बड़ी बड़ी डिग्री वाले हैं

इसलिए जनता नरेंद्र मोदी की बजाय अरविंद केजरीवाल उर्फ “सड़” जी को देश का पीएम बना दे। 

 

करम कल्लों की फौज को दिक्कत है

मोदी से किसको क्या दिक्कत है इस क्रम में देश को

बर्बाद करने का तानाबाना बुनने वाले वह सरगना भी शामिल हैं

जिन्हें मोदी आज की डेट में कदम कदम पर न केवल चुनौती पेश कर रहे हैं

बल्कि उनकी लुटिया भी डुबोने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी है।

मोदी से हर उस तिकड़मी आदमी को दिक्कत है जो राजनीति के नाम पर

भाई भतीजावाद के नाम पर धर्म और जाति के नाम पर अभी तक भारत को निपट उल्लू बनाए था

लेकिन मोदी ने आकर सजी सजाई बगिया ही तहस नहस करनी शुरू कर दी है।

मोदी से उस हर नकली देश भक्त नेता को दिक्कत है जो बातें  तो भारत की करता है

लेकिन उसका सारा दिमाग अपनी आने वाली सात

पीढियों के लिए उस तानाबाना बुनने में लगा रहता है जिससे वह

और उनका पूरा कुनबा बस और बस मजा करता रहे जिंदगी के साथ भी जिंदगी के बाद भी। 

मोदी से निपट ढोंगियों को दिक्कत है

मोदी से असली दिक्कत लोकपाल और लोकतंत्र के ढोंगियों को है।

आश्चर्य और शर्म की बात है कि भारत की भोली-भाली जनता को

लोकतंत्र का तथाकथित पाठ पढ़ाने वाली झूठी और मक्कार पार्टियां

कभी अपनी घर की खेती वाली पार्टियों में लोकतंत्र नहीं ला पाईं 

जबकि जनता को दिनरात लोकतंत्र का ही ऊंचेे बेसुरे सुर में पाठ पढ़ाते रहते हैं। 

माया मुलायम लालू ममता केजरी नायडू पवार ठाकरे पाकरे और पता नहीं कौन कौन

अगड़म बगड़म हैं जो देश को लूटने वाले गैंग से ज्यादा आज कुछ नहीं हैं। 

असली दिक्कत मोदी से इन्हीं महान ढोंगी आत्माओं को है।

अगर आप सोचते हों कि जनता को मोदी से कोई दिक्कत है तो यह झूठ है।

असली दिक्कत उन्हे है जो असली में इस देश के लिए ही सबसे बड़ी दिक्कत बन चुके हैं।

जिनके बैंकों में लक्ष्मी माता का दुर्लभ प्रवाह रुक गया है उन्हें ही मोदी से दिक्कत है

और इसीलिए वह सारे खलमंडली एक साथ मोदी मोदी का मंत्र जाप करते हैं आजकल।

लेकिन इन मक्कार और ढोंगियों को याद रखना चाहिए कि अब

इनकी घटिया राजनीति नहीं चलने वाली है।

आज जनता जानती है कि उसका असली मसीहा मोदी है न कि

गोदी में पार्टी पार्टी खेलने वाले देश के असली गुनहगार और दुश्मन। 

धन्यवाद

के पी सिंह किर्तीखेड़ा 11022019

About KPSINGH

मैने बचपन से निकल कर जीवन की राहों में आने के बाद सिर्फ यही सीखा है कि "जंग जारी रहनी चाहिए जीत मिले या सीख दोनों अनमोल हैं" मैं परास्नातक समाज शास्त्र की डिग्री लेने के अलावा CTET और UP TET परीक्षाएं पास की हैं ।मैंने देश के हिन्दी राष्ट्रीय समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में लेखन किया है जैसे प्रतियोगिता दर्पण विज्ञान प्रगति आदि ।

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