भारतीय जनता अगर उल्लू और मक्कार न होती

भारतीय जनता अगर उल्लू और मक्कार न होती 

भारतीय जनता अगर उल्लू और मक्कार न होती तो न तो हम पाकिस्तान जैसे

कुख्यात पड़ोसी से परेशान होते

और न ही अपने ही देश के स्वर्ग जैसे अद्भुत नजारे से हद तक मरहूम न होते।

दोस्तों, भारतीय जनता अगर उल्लू और मक्कार न होती

तो भारत का अजेय विजेताओं छत्रपति वीर शिवाजी

महाराणा प्रताप और बाजीराव पेशवा को अंतिम सांस तक दुश्मन से लड़ाई न करनी पड़ती।

इतना ही नहीं दोस्तों,,

 भारतीय जनता अगर उल्लू और मक्कार न होती तो आज आजादी हमारी अधूरी न होती

और न ही देश के लिए अपनी जान की बाजी लगाने वालों को जेल

और देश को लूटने वाले मसखरों को थाल में सजा कर राज गद्दी की सौगात न मिली होती।

हमारी आजादी की कीमत 

 भारतीय जनता अगर उल्लू और मक्कार न होती तो

आज भी सहीद ए आजम भगतसिंह जैसे क्रांतिकारी क्रांतिवीर को सरकार से

सहीद का दर्जा पाने के लिए आजादी के सत्तर साल बाद भी तरसना न पड़ता। 

दोस्तों, भारतीय जनता अगर उल्लू और मक्कार न होती

तो वीर सावरक और सुभाष चंद्र बोस के परिवार गुमनामी में

और हद दर्जे के लुटेरों के परिवारों की आज भी जै जै कार न होती।

दोस्तोंं, भारतीय जनता अगर उल्लू और मक्कार न होती तो

वीर अब्दुल हमीद की सहादत को सलाम करने की बजाय

तीन पीढ़ी से लगातार भारत विरोधी मानसिकता रखने

वाले कश्मीर के अब्दुल्ला परिवार की आज भी इस देे में चांदी न होती।

भारत की जनता के मसीहा 

भारतीय जनता अगर उल्लू और मक्कार न होती तो

हमें आज उन मठाधीश परिवारजनों के पैर के तलवे न चाटने पड़ते

जो खुद अंग्रेजी खुशामद की न केवल पैदाइश हैं बल्कि आज भी

पड़ोसी की पैदाइश बनने को बेताब रहते हैं।

दोस्तोंं, भारतीय जनता अगर उल्लू और मक्कार न होती तो

भारत की छवि आज निहायत ही दूसरी होती

जिसमें सब कुछ तो होता

लेकिन झूठ और मक्कारी का वह ड्रामा न होता जो कांग्रेस

लगभग हर दिन और हर जगह करती रहती है।

भारतीय जनता अगर उल्लू और मक्कार न होती तो कुल मिलाकर हम कुछ और ही होते। 

भारतीय जनता के सितारे 

क्रमशः 

धन्यवाद

के पी सिंह किर्तीखेड़ा 12022019

About KPSINGH

मैने बचपन से निकल कर जीवन की राहों में आने के बाद सिर्फ यही सीखा है कि "जंग जारी रहनी चाहिए जीत मिले या सीख दोनों अनमोल हैं" मैं परास्नातक समाज शास्त्र की डिग्री लेने के अलावा CTET और UP TET परीक्षाएं पास की हैं ।मैंने देश के हिन्दी राष्ट्रीय समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में लेखन किया है जैसे प्रतियोगिता दर्पण विज्ञान प्रगति आदि ।

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