पाकिस्तान पैदाइशी नापाक और धूर्त देश है

पाकिस्तान पैदाइशी नापाक और धूर्त देश है

पाकिस्तान पैदाइशी नापाक और धूर्त देश है

इसमें रत्तीभर शक नहीं है और न ही किसी अमन पसंद व्यक्ति को होना चाहिए, 

क्योंकि असलियत यही है कि इसमें कोई शक नहीं है कि पाकिस्तान पैदाइशी सोच

और पाकिस्तान चाहने वालों की हसरत ही नापाक थीं हैं और रहेंगी। 

इसकी फितरत में ही वह शैतानी खून है जिसको चैन नहीं

चांडाल चौकड़ी की धूर्तता पसंद है।

पाकिस्तान आज दुनिया में एक ऐसे देश के रूप में पहचाना जाता है

जिसकी स्थापना ही धूर्तता पूर्ण हसरत मात्र को पूरी करने के लिए हुई थी।

पाकिस्तान एक ऐसा देश है जहां ऐसे लोग रहते हैं जिनकी असलियत ही इतनी डांवाडोल है कि

उन्हें खुद नही पता कि वह कौन हैं क्यों पाकिस्तान में ऐसे लोगों का नापाक जमावड़ा है

जो कभी सलवार उतार कर तलवार के डर से मुसलमान बने थे

लेकिन धीरे धीरे उनका बनावटी चेहरा और उनकी छद्म पहचान ही हकीकत बन गई है।

पाकिस्तान का धूर्त इतिहास 

पाकिस्तान पैदाइशी नापाक और धूर्त देश है इसे

जानने के लिए पहले थोड़ा ऐतिहासिक होमवर्क कर लेना चाहिए

क्योंकि अगर आप पाकिस्तान की असलियत जानने के पहले

इसके बनने की असलियत जान लेंगे

तो आपको यह समझने में कतई कोई दिक्कत नहीं होगी कि

पाकिस्तान पैदाइशी नापाक और धूर्त देश है ।

दोस्तों,आपको पता है कि अंग्रेज़ी सरकार का सबसे बड़ा हथियार

फूट डालो और राज करो  की चाल थी।

शायद इसी लिए लार्ड कर्जन ने जब फूट डालो और राज करो की नीति को धरातल पर लाने के लिए

बंगाल का विभाजन हिन्दू और मुस्लिम मानसिकता को दूषित करने के लिए किया था

तो इस देश में एक बहुत बड़ा स्वदेशी और बायकाट आंदोलन उठ खड़ा हुआ था।

वंदेमातरम् की गूंज को धरती से आकाश तक पहुचाने वाला यह स्वदेशी आंदोलन

भारत का पहला आंदोलन था जिसमें भारत की महिलाएं तथा बच्चे भी

कश्मीर से कन्याकुमारी तक शामिल और सजग हुए थे।

दोस्तों, यह आंदोलन और इसकी सफलता अद्भुत अद्वितीय और बेमिसाल थी

शायद इसीलिए अंग्रेजी सरकार इस आंदोलन या इस आंदोलन से पैदा हुए राष्ट्रवाद से घबरा गई थी।

यह घबराई हुई सरकार हिन्दुस्तान की एकता पर चोट करना चाहती थी

तभी उसने एक ऐसा हथियार आजमाया जिसकी मार से हम सब भारतवासी सिहर उठते हैं।

दोस्तों यह मार हमें कभी 

कुलभूषण जाधव के रूप में तो कभी सरबजीत के रूप में

या फिर विंग कमांडर अभिनंदन के रूप में सहनी और भोगनी पड़ती है। 

पाकिस्तान की अम्मा मुस्लिम लीग 

दोस्तों, स्वदेशी आंदोलन के बीच अंग्रेजी प्रयास से एक ऐसी हकीकत ने जन्म लिया था

जिसने आगे के 41वर्षों को दूषित और कलंकित कर दिया था।

दोस्तों यह लहर कुछ और नहीं बल्कि 1906 में मुस्लिम लीग की स्थापना थी।

आपको बता दें कि बंगाल का विभाजन पूर्वी बंगाल तथा पश्चिमी बंगाल

के रूप में करने वाले कर्जन ने 

बंगाल विभाजन का समर्थन करने के लिए 1904 में ही ढाका के नवाब

समीमुल्ला को अपने पक्ष में कर लिया था।

1 अक्टूबर 1906 को आगा खाँ के नेतृत्व में मुस्लिमों का एक प्रतिनिधि मंडल

वायसराय लार्ड मिंटो से अपने लिए कुछ विशेष अधिकारों के लिए मिला था।

आप को ताज्जुब होगा कि यह प्रतिनिधि मंडल भी नकली था, 

क्योंकि इसे खुद अंग्रेजी सरकार ने तैयार किया था और साथ ही साथ

भड़काऊ मांग रखने के लिए उकसाया था, 

ताकि मुस्लिम समुदाय को हिन्दुओं के साथ जुड़ने से रोका जा सके।

इस चालबाजी के जन्म दाता अलीगढ़ कालेज के प्रिंसिपल चार्ल्सबोल्ड थे।

यानी यह सब नौटंकी चार्ल्सबोल्ड की थी। 

जब यह नकली या प्रायोजित प्रतिनिधि मंडल वायसराय के सामने पहुंचा तो इसने

इन कुछ मांगो को रखा था जैसे:

हमें मुसलमानों के लिए अलग निर्वाचन क्षेत्र चाहिए और

विधानमंडलों में मुसलमानों को जनसंखया के अनुपात मे स्थान चाहिए।

मुस्लिम शैक्षिक संस्थानों की स्थापना होनी चाहिए तथा सरकार से इन्हें मदद मिलनी चाहिए। 

अंग्रेज़ी हुकूमत ने लीग को खूब भड़काया 

हद तो तब हो गई थी जब 1909 में इनू फालतू मांगों को सरकार ने मान लिया

और साम्प्रदायिकता के बीज बो दिए गए।

वायसराय से भेंट के बाद बंगाल के घटिया नवाब समीमुल्ला ने

मुस्लिम लीग के निर्माण की पहल की थी।

दिसंबर 1906 में मोहम्मडन एजूकेशन कांग्रेस के सिलसिले में

मुसलमान ढाका में इकट्ठा हुए थे।

समीमुल्ला ने मौका देखकर इसी कांग्रेस में मुस्लिम लीग की स्थापना का प्रस्ताव रखा था

जिसे मान लिया गया था और इस प्रकार इस कांग्रेस या कांफ्रेंस की समाप्ति के दिन ही

30 दिसम्बर 1906 को नवाब बकर उल मुल्क की अध्यक्षता में

आल इंडिया मुस्लिम लीग बनाने का निर्णय लिया गया।

मुस्लिम लीग का संविधान बनाने की कमेटी बनी

जिसके संयुक्त सचिव नवाब मोहसिन मुल्क तथा वकार उल मुल्क थे।

मुस्लिम लीग का पहला अधिवेशन दिसंबर 1908 में अमृतसर में हुआ था।

इसकी अध्यक्षता सर सैय्यद इमाम ने की थी  इसी

अधिवेशन में आगा खान को स्थाई अध्यक्ष बनाया गया था।

आगा खान इस पद पर 1913 तक रहे थे।

मुस्लिम लीग के पहले अधिवेशन में निम्नलिखित उद्देश्य निर्धारित किए गए थे जैसे

भारतीय मुसलमानों के अंदर ब्रिटिश सरकार के प्रति वफादारी पैदा करना

तथा सरकार के कार्यों के प्रति मुसलमानों में भ्रामक धारणाओं को दूर करना।

भारतीय मुसलमानों के राजनीतिक तथा अन्य अधिकारों की रक्षा करना

और उनकी आवश्यकताओं व भावनाओं को सम्राट के सामने प्रस्तुत करना।

 

मुस्लिम लीग से पैदा हुई थी पाकिस्तान की मांग

धन्यवाद

के पी सिंह किर्तीखेड़ा 2032019

About KPSINGH

मैने बचपन से निकल कर जीवन की राहों में आने के बाद सिर्फ यही सीखा है कि "जंग जारी रहनी चाहिए जीत मिले या सीख दोनों अनमोल हैं" मैं परास्नातक समाज शास्त्र की डिग्री लेने के अलावा CTET और UP TET परीक्षाएं पास की हैं ।मैंने देश के हिन्दी राष्ट्रीय समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में लेखन किया है जैसे प्रतियोगिता दर्पण विज्ञान प्रगति आदि ।

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