लड़की: मासूम मुहब्बत का पहला दिन

मासूम मुहब्बत का पहला दिन 

                                    लड़की: वह जब भी छत मे होती तो लगभग यह एक शर्त थी कि वह मुझे ही देखने की कोशिश करती, मगर मजाल है कभी मैने उसे अपनी तरफ देखते हुए देखा हो? जब कुछ समझ में नही आया तो एक दिन मैने भी एक जोरदार प्लान बनाया ,मैने तय किया कि आज मैं उसके स्कूल से आने के पहले ही घर आ जाऊंगा और उसे पता न चले इस लिए मैं छत पर बने कमरे में पहले से ही बैठ जाऊंगा।

ताकि जब वह आए तो अगर मुझे चाहती होगी तो झटपट छत पर आकर मुझे निगाहों में तलाश करेगी और अगर वह मुझे चाहने लगी है मेरा यह सोचना केवल वहम होगा तो पहली बात तो स्कूल से सीधा घर आकर ऊपर नही आएगी और यदि किसी काम से ऊपर वह आ भी गई तो मुझे तलाश नही करेगी ।

जरा ठहरिए 

दोस्तों आप सोच रहे होंगे मैं हूं कौन?और यह कौन सी कहानी लेकर बैठ गया तो दोस्तों, मेरा पूरा नाम यस प्रताप सिंह है लेकिन मैं चाहूंगा, कि आप मुझे केवल “यस” नाम से जानें आप लोग ।मैं किसी शहर में नही रहता बल्कि आपको बता दूं  कि मैं गांव से आजकल शहर अपनी दीदी और जीजा के पास रहकर पढने आया हूँ ।

                                              मेरे जीजा वैभव सिंह राजपूत रेजिमेंट में पोस्टेड हैं जो इस समय राजौरी पुंछ जम्मू-कश्मीर में तैनात हैं ।मेरी दीदी का नाम नीरजा सिंह है उनका डेढ साल का एक बेटा सिद्धार्थ है ।

मेरा आना उसका जाना 

जी हां दोस्तों जब जीजा जी की कुछ दिन पहले तबीयत खराब हुई थी तभी मुझे अम्मा बाबू जी ने मुझे शहर में दीदी जीजा के पास इस लिए भेज दिया था कि एक तो मेरी पढाई अब शहर मे जाने से बेहतर हो जाएगी दूसरे दीदी की कुछ मदद हो जाएगी ।आज मुझे याद आता है मेरा शहर में पहला दिन ।

उस दिन बेहद सर्दी थी पारा लगभग पांच डिग्री था, शायद इसीलिए मुझे श्याम नगर कानपुर की पंडित समोसे वाली गली नही मिल रही थी जहां मेरी दीदी और जीजा मेरा इंतज़ार कर रहे थे ।मैं अम्माजी का कुछ सामान भी दीदी के लिए लेकर आया था इसलिए मुझे काफी परेशानी हो रही थी एक तो श्याम नगर की कीचड़ वाली गलियां ऊपर से पंडित समोसे वाली गली की लुकाछिपी।

सच कहूं तो काफी बोर और परेशान था कि तभीमुझे एक लड़की साइकिल से आते हुई दिखी ।मैने रोकने की कोशिश की तो पहले तो वह रुकी नही फिर कुछ दूर आगे जा कर मुझे घूरने लगी ।मैंने सोचा होगी कोई बात और ज्यादा ध्यान नही दिया पर तभी गजब हो गया ।

चूंकि उस लड़की को यह लगा था कि मैं अकेला समझ कर उसे रोकने की कोशिश कर रहा हूं लेकिन सच कुछ और था ।उस लड़की ने अपनी पीछे आ रही सहेलियों को मैसेज करके बुला लिया था और मुझे कुछ पता ही नही था कि माजरा क्या है ।जैसे ही उसकी सहेलियों ने मेरे पास आकर स्टाइल से अपनी-अपनी साइकिल रोकी तो मुझे थोड़ा भ्रम जरूर हुआ था ।

खैर जल्दी ही जो मैं सोच रहा था वह सही साबित हुआ ।

दोस्तों फिर आगे मेरा क्या हुआ

आपको अगली बार बताऊंगा।

तब तक के लिए, ,,,टेक केयर

बाई बाई

 

धारावाहिक :मासूम मुहब्बत का

पहला दिन की पहली किस्त 

लेखक केपी सिंह

24022018

About kpsingh

मैने बचपन से निकल कर जीवन की राहों में आने के बाद सिर्फ यही सीखा है कि "जंग जारी रहनी चाहिए जीत मिले या सीख दोनों अनमोल हैं" मैं परास्नातक समाज शास्त्र की डिग्री लेने के अलावा CTET और UP TET परीक्षाएं पास की हैं ।मैंने देश के हिन्दी राष्ट्रीय समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में लेखन किया है जैसे प्रतियोगिता दर्पण विज्ञान प्रगति आदि ।

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