कैरियर बनाम जॉब

कैरियर बनाम जॉब

नमस्कार दोस्तौ,
कैरियर बनाम जॉब को समझना अति आवश्यक है क्योंकि
आज की युवा पीढ़ी अपने कैरियर को लेकर अतिचिंतित रहती है |
जैसे ही इण्टर (+2) परीक्षा पास कर लेते हैं, प्रत्येक युवा निरन्तर घर ,परिवार, सगे -सम्बन्धियों और मित्रों से कैरियर शब्द को सुनते रहते हैं |
परन्तु उन्हें कैरियर शब्द का वास्तविक अर्थ नहीं समझाया जाता है |
केवल इतना बताया जाता है कि एक अच्छी नौकरी या जॉब पाना ही कैरियर है |
दोस्तो आज हम कैरियर बनाम जॉब की चर्चा करेंगे और जानेंगे किस प्रकार कैरियर बना सकते हैं |
जॉब कई तरह के होते हैं |
यदि हम योग्य होते हैं तो हमें जॉब आसानी से मिल जाती है |
परन्तु ये जरुरी नहीं है कि वो हमारी इच्छा के अनुरूप हो और हमें वह जॉब करने में आनन्द आता हो |
साथ ही जॉब में एक बॉस भी होता है जिसका दबाव सदैव हमारे मस्तिष्क में रहता है |
और कभी – कभी हम इस दबाव के कारण तनावग्रस्त हो जाते हैं,
जो शरीर पर बुरा प्रभाव डालते हैं | सरकार निरन्तर सरकारी नौकरियों में कटौती करती जा रही है |
लम्बे समय के उपरान्त जब भी रिक्तियाँ निकालती हैं उसमें युवाओं को कई चरणों में कठोर प्रतियोगी परीक्षा का सामना करना पड़ता है |
 अथिकतम मात्र एक प्रतिशत युवाओं का ही चयन हो पाता है |
निराश होकर. युवा मजबूरन निजी कंपनी में चले जाते हैं जहाँ मनमाने ढंग से उनका शोषण किया जाता है |
जॉब एक बोझिल कार्य माना जाता है वहीं कैरियर आनन्द मन से किया जाने वाला कार्य होता है |
इसे करने में थकान नहीं होता है और रोजाना नये जोश व उत्साह के साथ किया जाता है |
क्योंकि यह हमारे रूचि के अनुरूप होता है |
अतः कैरियर का अर्थ यह होता है – जिसे हम खुशी मन से बिना दबाव के करते हैं |
और निरन्तर विकास करते हुए अपनी तमाम इच्छाओं को पूर्ण करते हैं,
परन्तु इसका अर्थ यह कदापि नहीं लगाना चाहिये कि कैरियर बनाने के लिए मेहनत नहीं करना पड़ता है |

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मेहनत ही सफलता की कुंजी है |
प्रत्येक बालक की रुचि अलग -अलग होती है |
सभी माता -पिता को अपने बच्चे की रुचि को पहचानकर उसी क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित व उत्साहित करना चाहिए |
जिससे बालक को कैरियर चयन में सुविधा हो और उसके सफल होने के अधिक अवसर उत्पन्न हो सके |
निम्न बातें हमें कैरियर निर्माण में सहायक हो सकते हैं —-
👉 जिस तरह हम दूसरों के गुण – दोष को आसानी से बता देते हैं उसी तरह सर्वप्रथम
हम स्वयं को पहचानें कि हममें क्या गुण है जो हम औरों से बेहतर कर पाते हैं |
👉 कार्य निर्धारण के पश्चात उपयुक्त योजना अर्थात् समय सारणी तैयार करें |
👉 अल्पकालिक और दीर्घकालिक लक्ष्य बनायें |
अधिक उत्तम होगा यदि लक्ष्यों को यादों के साथ जोड़ दिया जाय, जैसे अल्पकालिक लक्ष्यों में टी़वी, फ्रीज कम्प्यूटर, लैपटॉप खरीदना या किसी पर्यटक स्थल पर घूमना निश्चित कर सकते हैं |
इसी तरह दीर्घकालिक लक्ष्यों में गाड़ी, जमीन, घर या विदेश भ्रमण रखा जा सकता है |
इन लक्ष्यों को अपनी डायरी में अवश्य लिख लें |
👉 समय – समय पर अपने प्रयासों का आँकलन करते रहना चाहिए और उसी के अनुरूप मेहनत को तीव्र करना चाहिए |
👉 यदि कभी निराशा उत्पन्न हो तो अपने द्वारा लिखे लक्ष्यों को पढ़े, इससे आत्मविश्वास बढ़ेगा |
👉 सदैव सफल व्यक्तियों के विचार पढें और सकारात्मक सोच रखें |
शेष अगले पोस्ट में —–

लेखक —— प्रमोद कुमार

 

 

About PRAMOD KUMAR

मेंने ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन राजस्थान में कम्पलीट किया |इसके बाद B. Ed कर्नाटक से किया | लेखन की चाह बचपन से ही थी, कॉलेज आते आते इसमें कुछ निखार आ गया |कॉलेज में यह स्थिति थी कि यदि कोई निबंध प्रतियोगिता होती और उसमें मेरे शामिल हो जाने से प्रतियोगिता दूसरे और तीसरे स्थान के लिए रह जाता | वापस राजस्थान आने पर अपना विद्यालय खोला ,सरकारी शिक्षक बनकर त्याग पत्र दे दिया |बिजनेस में एक सम्मानित ऊँचाई को पाकर धरातल पर आ गया |अब अपने जन्म स्थल पर कर्म कर रहा हूँ, जहाँ शिक्षा देना प्रमुख कर्म है | बचे समय में लिखने का अपना शौक पुरा करता हूँ |

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