कैरियर बनाम जॉब -पार्ट 2

कैरियर बनाम जॉब – पार्ट 2

        कैरियर बनाम जॉब – पार्ट 2 में आपका स्वागत है |
               दोस्तो आपने मेरे पिछले पोस्ट     में कैरियर और जॉब में अन्तर को समझा, साथ ही कैरियर निर्माण के बारे में जाना |
इस पोस्ट कैरियर बनाम जॉब – पार्ट 2 में कैरियर निर्माण की आवश्यकता को और बेहतर तरीके से समझने का प्रयास करेंगें |

👨‍👩‍👧 लोगों के प्रकार ( Types of people  )

दोस्तो, यदि हम लोगों को समय और पैसे ( Time and money ) के आधार पर बाँटे तो हमें चार कैटेगरी मिलती है —
 
⏺पहली कैटेगरी⏺         पहली कैटेगरी में वे लोग आते हैं जिनके पास समय खूब होता है परन्तु पैसा नहीं होता है |
इस श्रेणी में सरकारी नौकरी वाले लोग आते हैं जो मुश्किल से आठ घंटे की नौकरी करते हैं |
और बाकी समय इधर – उधर की राजनीति करके या बाजार घूमकर या टी वी देखकर अपना समय व्यतीत करते हैं |
इनके पास समय खूब होता है परन्तु पैसे की बात करें तो एक सीमित आय होती है जो केवल घर खर्च के लिए ही पर्याप्त होती है |
                     मुंशी प्रेमचंद जी ने अपनी पुस्तक में इनकी आय को अच्छी तरह से समझाया है
कि सरकारी नौकर की तनख्वाह पूनम के चाँद की तरह होती है जो महीने की एक तारीख को तो खूब दिखाई देती है |
पर धीरे – धीरे घटती जाती है और महीने का बीच आते – आते गायब हो जाता है |

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⏺दूसरी कैटेगरी⏺         दूसरी कैटेगरी  में वे लोग आते हैं जिनके पास पैसा होता है परन्तु समय नहीं होता है |
इस श्रेणी में टाटा, बीड़ला, डालमिया जैसे धनाढय लोग आते हैं |
ये रोजाना 18. से 20 घंटे काम करते हैं और इनके पास कितना धन है इन्हें खुद पता नहीं होता है |
यदि इनका पोता कहे कि चलिये दादा जी एक महीने विदेश घूमकर आते हैं |
तो इनका जवाब होगा – बेटा तुम चले जाओ, अपने साथ 10-20 दोस्तों को भी ले जाओ,
पैसा जितना चाहो मुझसे ले लो मेरे पास समय नही है |

⏺तीसरी कैटेगरी⏺         तीसरी कैटेगरी   में वे लोग आते हैं जिनके पास न तो समय होता है और न ही पैसा |
इस श्रेणी में व्यस्त बेरोजगार आते हैं |
हम गांवों ,कस्बों और शहरों में गली नुक्कड़ों में ताश की मंडली देख सकते हैं |
ये लोग सुबह से शाम तक का समय ताश खेलकर बिताते हैं |
अतिआवश्यक कार्य के लिए भी इनके पास समय नहीं होता है |
यहाँ मैं अपना एक व्यक्तिगत अनुभव शेयर करना चाहूँगा —–
                       मेरा एक मित्र था जो ताश खेलने का बेहद शौकीन था |
अक्सर मैं अपने काम के सिलसिले से उसके गाँव जाया करता था |
मुझे उससे मिलने के लिए उसके घर नहीं जाना पड़ता था ,
क्योंकि मैं उसके अड्डे के बारे में जानता था |
एक दिन मैं उसी के पास बैठा था और वह अपने मित्रों के साथ ताश खेल रहा था |
इसी बीच घर से समाचार आया कि भैंस बीमार है,
माँ डॉक्टर बुलाने को कह रही है घर में कोई आदमी नहीं है |
यह समाचार मेरे वहाँ रहते तीन बार आया पर मेरा मित्र हर बार यही जवाब देता कि चलो मैं आ रहा हूँ |
मैं वहाँ से आ गया था और अगले दिन मुझे खबर लगी कि उसकी भैंस मर चुकी है |
ऐसे लोग घर की पुँजी को खत्म करते जाते हैं, इनके पास धन होने की कल्पना करना मूर्खता है |
मैं इस मित्र से  कई बार कैरियर बनाम जॉब के बारे में चर्चा कर चुका हूँ |

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⏺चौथी कैटेगरी⏺       चौथी कैटेगरी में वे लोग आते हैं जिनके पास समय और पैसा दोनों होते हैं |
इस श्रेणी में गायक , लेखक इत्यादि आते हैं |
ये साल में थोड़ा ही काम करके विश्व को कुछ ऐसी रचनाएं दे जाते हैं |
जिनसे रॉयल्टी के रुप में जिन्दगी भर पैसा आता है और आर्थिक गुलामी से आजाद रहते हैं |
इनके पास पैसे और समय की कमी नहीं होती है, अपने परिवार के साथ आनन्दमय जीवन बिताते हैं |
🇳🇪हिन्दुस्तान में 97%आबादी पहली तीन कैटेगरी में आती है, केवल 3% लोग ही चौथी कैटेगरी में आते हैं |
क्योंकि पहली तीन कैटेगरी के लौग कठोर परिश्रम ( Hard work ) करते हैं और चौथी कैटेगरी के लोग स्मार्ट वर्क करते हैं |

 

 

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☢हार्ड वर्क और स्मार्ट वर्क में अन्तर☢

☢(Difference between Hard work and Smart work  )☢

हार्ड वर्क और स्मार्ट वर्क को और अच्छी तरह से समझ लेते हैं —–

जैसे एक गथा सुबह से शाम तक बोझा को एक जगह से दूसरे जगह पहुँचाता है  |

और थोड़े से पैसे कमाता है तब जाकर मालिक उसे खाने को देता है  | इसी दौरान कभी बीमार हो गया या काम नहीं मिला तो मालिक उसे मारता – पीटता है , भरपेट खाना भी नहीं देता है |

दूसरी तरफ एक घोड़ा है जो साल में एक बार रेस के मैदान में जाता है |

और रेस जीतकर ढेर सारा पैसा कमाता है |

इसी पैसे से वह साल भर बैठकर खाता है और मालिक भी उसकी अच्छी सेवा करता है |

यहाँ गधे का काम हार्ड वर्क और घोड़े का काम स्मार्ट वर्क कहलाता है |

 

दोस्तो, अब हमें चुनना है कि हम  कैरियर बनाम जॉब को ठीक तरह से समझकर  घोड़े का जीवन जीयें या गधे का ?
निश्चित रुप से आप घोड़े के जीवन को चुनेंगे, परन्तु दोस्तो केवल इच्छा करने से यह सम्भव नहीं होगा |
इसके लिए हमें रेस जीतने तक परिश्रम करना होगा, उसके बाद दुनिया हमारी मुट्ठी में |
शेष अगले पोस्ट में ——————

 

सबसे रहस्यमयी मंदिर

आपका लेखक — प्रमोद कुमार

 

 

 

About PRAMOD KUMAR

मेंने ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन राजस्थान में कम्पलीट किया |इसके बाद B. Ed कर्नाटक से किया | लेखन की चाह बचपन से ही थी, कॉलेज आते आते इसमें कुछ निखार आ गया |कॉलेज में यह स्थिति थी कि यदि कोई निबंध प्रतियोगिता होती और उसमें मेरे शामिल हो जाने से प्रतियोगिता दूसरे और तीसरे स्थान के लिए रह जाता | वापस राजस्थान आने पर अपना विद्यालय खोला ,सरकारी शिक्षक बनकर त्याग पत्र दे दिया |बिजनेस में एक सम्मानित ऊँचाई को पाकर धरातल पर आ गया |अब अपने जन्म स्थल पर कर्म कर रहा हूँ, जहाँ शिक्षा देना प्रमुख कर्म है | बचे समय में लिखने का अपना शौक पुरा करता हूँ |

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8 Comments on “कैरियर बनाम जॉब -पार्ट 2”

  1. नौकरी की माला फेरने वाले नवयुवकों को सबक सिखाने के लिए और प्रेरणा लेने के लिए बहुत ही अच्छा लेख क्योंकि लेखक, कवि, गायक आदि मरकर भी अमर रहते हैं।

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