मां- एक दर्दनाक मौत

मां  की ऎसी  एक दर्दनाक मौत

 

मां -एक दर्दनाक मौत, जय माता दी , दोस्तों आज मैं आपसे  मां – बेटे के पवित्र और मार्मिक रिश्ते को झुठला देनेl वाली घटना के बारे में कुछ कहना चाहूंगी।

 

एक  इंसान जीवनभर कमाता है और माता – पिता के रूप में अपनी खुशियां और सुविधाऐ आदि का भी ध्यान नहीं रखता। अपने बच्चों के लिए ही जीता है। उन्हीं में अपनी खुशियां ढूंढता है। फिर बच्चों को अपनी जिम्मेदारी सोंपकर मुक्त होना चाहता है।  और बच्चे अपनी सुखसुविधाऔं के लिए अपने मां- पिता को अलग कर दें। उन्हीं की सम्पत्ति पर राज करके उन्हैं मरने के लिए छोङ दें।ये कैसा रिश्ता है ?

मां की ऐसी दर्दनाक मौत की ये खबर मैंने विगत महीने अखबार में मैंने  पढी,कि एक मां की मौत हुई जिसकी लाश घर में सङ रही थी। उसकी खबर किसी बच्चे को न थी।   खबर में बताया कि वो महिला करोङों की मालकिन थी। उसके दो बेटे बटबारे. के बाद एक मां को और  एक पिता को लेकर अलग हो गये थे। छोटा बेटा मां को पैतृक घर में पडोसी को उनकी खानेकी जिम्मेदारी देकर अकेला छोडकर नये घर में शिफ्ट हो गया। क्पा अपना सबकुछ बेटों को सोंपकर गलती कर दी ?
मां की ममता को शर्मसार करने वाली मां की ऐसी दर्दनाक मौत की इस खबर ने मुझे झकझोर के रख दिया।मेरा मन विचलित हो उठा।
 * क्या इसलिए ही. इस समाज में बेटों की चाह में जन्म से पहले ही मां के पेट में  बेटियों मार दिया जाता  है ?
 *क्या इसी के लिए घन जुटाया था ? कहीं तो कुछ गलत धारणाऐं हैं।
या यूं कहूं कि हम अपने बच्चों को संस्कार नहीं दे पा रहे। मां शब्द की परिभाषा नहीं समझा पा रहे ।अपनी अहमियत नहीं बता पा रहे।
*क्यूं अलग हुए दोनों क्यूं लाचार हुए?
सच्चा साथी बनकर रहना चाहिए था.

इस पर मुझे एक पुरानी कहाबत याद आ रही है- पूत कपूत तौ क्यूं घन संचय.

पूत सपूत तौ क्यूं घन संचय

 

मां की ममता की इस दर्दनाक मौत यही सीख देती है कि हमें दौलत और शोहरत की बजाय अपने बच्चों को संस्कारों की दौलत और अपने परिवार की अहमियत समझाएं। घन्यबाद S.P sir का हमें ये मौका देने के लिए घन्यबाद

ये भी पढें-👇

लाडो ना आना इस देश part – 1

लाडो – ना आना इस देश part-2

About Anamika sharma

I am a housewife

View all posts by Anamika sharma →

One Comment on “मां- एक दर्दनाक मौत”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *