आखिर किसान आत्महत्या क्यों कर रहा है?

आखिर किसान आत्महत्या क्यों कर रहा है?

भारत कृषि प्रधान देश है। और आजाद भारत के प्रथम प्रधानमंत्री ने भी कृषि को भारत की आत्मा कहा था। भारत की 65% आबादी कृषि व कृषि आधारित कार्यों से आय अर्जित कर जीवन यापन करती हैं ।किंतु कृषि में बढ़ती लागत रसायनों को कीटनाशकों फसल के बीज नींदई गुड़ाई के खर्चे में कृषि कार्यों में लागत दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है ।जिसके परिणाम स्वरुप कृषि मैं लागत ज्यादा आ रही है। फल तथा फसलों के उचित दाम नहीं मिल रहे हैं । कृषि घाटे का सौदा साबित हो रही है। इन सबके बीच फसलों पर मौसम की मार प्राकृतिक आपदाओं जैसे ओलावृष्टि अतिवृष्टि सूखा के कारण फसल नष्ट हो जाती है किसान को बहुत अधिक घाटा होता है। किसान ने कृषि कार्य के लिए साहूकारों या बैंकों से कर्ज लिया हुआ होता है। और वह समय पर नहीं दे पाने के कारण शर्मिंदगी महसूस करता है ।तथा आत्महत्या जैसे ही कदम उठाने पर मजबूर  होता है।

एम एस स्वामीनाथन रिपोर्ट २००६ के अनुसार

किसानों के उत्थान और कृषि क्षेत्र में आ रही समस्याओं को दूर करने के लिए केंद्र सरकार ने 2004 में एम एस स्वामीनाथन अध्यक्षता में समिति गठित की थी ।जिसकी रिपोर्ट समिति ने 2006 में सरकार को दी थी। जिसके अनुसार 1 क्विंटल गेहूं उत्पादन करने में₹880 का खर्च आता है इसमें किसान की फैमिली की लेबर को जोड़कर फसल का डेढ़ गुना किसान को मूल्य देना की सिफारिश की गई है किंतु कोई भी सरकार इस समिति की सिफारिशों को लागू नहीं कर पा रही हैं जिससे किसानों की और दुर्दशा होती जा रही है और किसान आत्महत्या करने पर मजबूर होते जा रहे किंतु यह भी सत्य है कि किसानों को उपज का वाजिब दाम जब तक नही दिया जाएगा  किसान आत्महत्या करने पर मजबूर होता रहे गा।

साहूकारों तथा बैंक का कर्ज

किसानों पर कृषि कार्यों को करने के लिए धन की आवश्यकता के स्वरूप साहूकारों या बैंक से ऋण लेना  पड़ता है।ऋण किंतु किसी भी कारणवश किसान समय पर नहीं दे पाता जिस से साहूकार तथा बैंक परेशान करते हैंनहीं चुकाने पर किसानों की जमीन भी नीलाम कर देते हैं जिस कारण से भी किसानों को आत्महत्या करने पर मजबूर होना पड़ता है किसानों के वास्तविक उत्थान के लिए साहूकारों तथा बैंक से किसान को ऋण मुक्ति करना चाहिए जिससे किसान को एक अवसर दिया जाए और लागत का डेढ़ गुना किसानोंं को उनके जीवन को खुशहाली सेेे भर  संपन्न किया जा सकेे किसान की मेहनत अतुलनीय हैै किसान अगर खेत में खेेती करना छोड़ दे तो पूरे देश में भोजन का  संकट आ जाएगा समय रहते सरकारों को किसानोंं के हितों के लिए कार्य करना चाहिए जिससेे जय जवान जय किसान का नारा सच साबित होता रहे।

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