अम्मा जी के चरणों में समर्पित

अम्मा जी के चरणों में समर्पित

नमस्कार दोस्तों टाइटल्स देख कर जान ही गये होंगे की हम किस पर बात करने वाले हैं,

दोस्तों जिनके पास माँ होती है वह बहुत ही खुशकिस्मत वाले होते हैंऔर जिनके पास माँ नही होती है उससे बड़ा उसका दुर्भाग्य क्या हो सकता है’

लेकिन आजकल हम क्या देख रहे हैं कि कुछ नास्तिक लोग अपनी पत्नी के बहकावे में अपनी बूढ़ी माँ को छोड़ देते हैं और उसे दाने दाने के लिये मौहताज कर देते हैं’

वह नास्तिक यह नहीं जानता कि उसे कितने कष्ट से पाला पोसा है खुद भूखी रहकरउसका पेट भरा है खुद गीले में लेटकर उसे सूखे बिस्तर मे सुलाया है;

दोस्तों माँ के कदमों के के नीचे स्वर्ग होता है इसलिए जो माँ की सेवा कर ली समझो वह संसार की खुशियां पा ली

तेरी ममता से मिला मुझे जीवन यह प्यारा;

तूने तेरे प्यार से है मेरा जीवन यह सँवारा;

माँ तेरी खूबियों का गुणगान क्या करे तेरा ये बेटा;

जब किसी मुसीबत ने घेरा मुझको मैं सिर्फ तुझे है पुकारा”

1-माँ का प्यार-

दोस्तों हर मर्ज की दवा होती है माँ;

कभी डाँटती है तो कभी गले लगा लेती है माँ;

हमारी आंखों के आंसू अपनी आंखों में समा लेती है माँ;

हमारी खुशियों में शामिल होकर अपने गम भुला देती है माँ;

दुनिया की तपिश में हमें आँचल की सीतल छाया देती है माँ;

खुद चाहे कितनी थकी हो हमे देखकर अपनी थकान भूल जाती है माँ;

लब्जों में जिसे बयां नही किया जा सके ऐसी होती है माँ ;

भगवान भी जिसकी ममता के आगे झुक जातेंहै ऐसी होती है माँ;

2-माँ की सिक्छा-

दोस्तों वह माँ ही होती है जो पहली बार हमारे स्कूल की सुरुआत घर में ही करती है हमारे जीवन की सबसे पहली और प्यारी सिच्छक होती है वो हमें जीवन का सच्चा मार्गदर्शन और ब्यवहार करने का तरीका सिखाती है’

वो छोटे और असमर्थ बच्चे से मानसिक, शारीरिक, सामाजिक और बौद्धिक मनुष्य बनाती है अर्थात माँ की सिक्छा ही हमें प्रेरणा प्रदान करती है;

3-मां की डांट

दोस्तों माँ के डांटने में भी प्यार छिपा होता है माँ कभी अपने दिल से नहीं डांटती है;

माँ तो अपने बच्चे के भविष्य को लेकर चिंतित रहने की वजह से डांटती है कि कहीं मेरा बच्चा बिगड़ न जाये जो अपने माँ की डाँट खा ली तो समझो उसका जीवन सुधर गया अर्थात माँ की डांट से भी हमें जीवन जीने की प्रेरणा मिलती है;

“नींद अपनी भुलाकर सुलाया हमको,आँसू अपने गिराकर हँसाया हमको, दर्द कभी न देंना उस खुदा को, खुदा भी कहता है माँ जिसे”;
लेखक- दिलीप कुमार

जय हिंद , जय भारत,

 

 

 

 

About Dilip Kumar

My self dilip Kumar my address village and post chak korra Sadat District Fatehpur Up India and pincod (212622)and my qualifications Bsc and Bedside assistant with Upsdm

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