वाह रे भारतीय पुरुष

         वाह रे भारतीय पुरुष

वाह रे भारतीय पुरुष, हम भारतवासी जैसा की अच्छी तरह से जानते हैं कि हमारा देश स्त्री प्रधान देश है । हमारे देश में स्त्रियों को देवियों का दर्जा हासिल है ।

हमारे देश में दुर्गा काली लक्ष्मी सरस्वती इत्यादि जैसी देवियों कि बड़ी ही धूमधाम से पूजा की जाती है । यहां तक की हमारे देश का नाम भी सम्मान पूर्वक भारत मां के नाम से जाना जाता है । फिर भी हमारे देश में स्त्रियों का सम्मान तथा उनका वजूद दोनों ही संकट में है ऐसा क्या कारण है यही जानने की हम कोशिश करेंगे ।

स्त्रियों को लेकर पुरुष वर्ग की सोच-

हमारे देश में ज्यादातर पुरुषों की सोच यह दर्शाती है कि स्त्रियां मात्र घरेलू कार्य के लिए ही हैं तथा उनका संपूर्ण जीवन घर के कामकाज और पति की सेवा में ही होना चाहिए ।स्त्रियों को पुरुष वर्ग द्वारा कहीं गई सारी बातें माननी चाहिए चाहे वह गलत हो या सही स्त्री को तर्क करने पर उसे अशिष्ट कहा जाता है । यानी कि पुरुषों द्वारा कही गई सारी बातें सही हैं स्त्री को उसके विषय में कुछ भी कहने का अधिकार नहीं है चाहे वह स्त्री वर्ग के खिलाफ की बातें ही क्यों ना हो ।

हमारे देश के ज्यादातर पुरुषों की सोच तो यह भी है कि स्त्री मात्र  बिस्तर पर सोने का सामान है इससे ज्यादा कुछ नहीं ।

अधिकतर स्त्री वर्ग की सोच-

हमारे देश की स्त्रियां भी कुछ कम नहीं है यह भी पुरुषों की सोच में अपनी हामी भर्ती रहती हैं ।तथा  स्त्री वर्ग को ही नीचा दिखाने पर तूली रहती है जिस कारण पुरुष वर्ग के विचारों को पूरा सहयोग मिलता है जिससे पुरुष वर्ग इस्त्री वर्ग पर हावी होता है । हमारे देश की अधिकतर स्त्रियां एक दूसरे की बुराई में ही अपना समय व्यतीत करते हैं तथा स्त्री  वर्ग को खुद ही कमजोर बनाती हैं ।

निष्कर्ष- किसी भी मामले में स्त्री पुरुषों से कम हैं ऐसा स्त्रियां खुद समझते हैं । इस वजह से पुरुष उन पर हावी होता है। अतः स्त्रियों को स्वयं इस चीज को समझना होगा और समाज में अपनी पहचान स्थापित स्वयं ही करनी होगी तथा उन्हें अपने आप को स्वयं ही साबित करना होगा कि वह किसी से कम नहीं है ।

लेखक की डायरी से –  मैं पुरुष समाज से यह कहना चाहता हूं कि पुरुष समाज स्त्रियों को किसी भी तरह से कम ना माने क्योंकि पुरुष पुरुष का अस्तित्व ही स्त्री वर्ग से आता है तथा उसका संपूर्ण जीवन स्त्री पर ही आश्रित होता है ।पुरुषों का यह मानना कि स्त्रियां उनसे कम बुद्धिमान अथवा कमजोर होती हैं यह पुरुषों की नादानी है और कुछ नहीं अगर ऐसा ही चलता रहा तो जिस दिन स्त्रियां अपने आप को तथा अपने क्षमता को पहचान लेंगे उस दिन के बाद पुरुषों को अपना अस्तित्व बचाना भी मुश्किल हो जाएगा जो पुरुष वंश वंश चिल्लाते रहते हैं खासतौर से उनसे कहना चाहता हूं  कि स्त्रियों  का वंश तो सामने दिखता है परंतु पुरुषों का वंश तो स्त्रियों पर ही निर्भर है स्त्री चाहे तो अपना वंश खुद चला सकती है परंतु पुरुष अपना वंश पाने के लिए स्त्री का सहारा ही ले सकता है ।

इसलिए स्त्रियों को मात्र एक मशीन समझना पुरुषों की नादानी है । स्त्रियां सृष्टि की रचयिता है इन्हें सम्मान देना इन की इज्जत करना  पुरुषों का फर्ज़ बनता है । इन्हें अपने बराबर का समझें और इन्हें आगे बढ़ने में पूरा सहयोग दें अगर स्त्री sex का खिलौना है तो सेक्स करने वाले को जन्म देने वाली मां भी है ।

धन्यवाद ।

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One Comment on “वाह रे भारतीय पुरुष”

  1. बहुत अच्छी पोस्ट। इससे सामाजिक चिंतन में बदलाव की जरुरत है।

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