सिद्धाश्रम रहस्य

सिद्धाश्रम रहस्य

लेखक – विनोद सिंह

नमस्कार दोस्तों! आज मैं आपको सिद्धाश्रम रहस्यय के विषय में जानकारी दूँगा जो हिमालय का अत्यंत दिव्य एवं गुप्त स्थान है। सिद्धाश्रम  पर रहने के लिए देवता भी लालायित रहते हैं। सिद्धाश्रम अर्थात् सिद्धों का स्थान। जहाँ सिद्ध दिव्य आत्माओं का वास होता है। यह कोई काल्पनिक स्थान नहीं है बल्कि वास्तविक है।

सिद्धाश्रम हिमालय में मानसरोवर झील के उत्तर-पूर्व कैलाश पर्वत के समीप स्थित है । सिद्धाश्रम को  सामान्य  नेत्रों या वैज्ञानिक उपकरणों से नहीं देखा जा सकता है। इसका कारण यह है कि इस स्थान का अस्तित्व वर्फीले पहाड़ों के नीचे है। यह इतना दिव्य स्थान है कि यहाँ दिन-रात नहीं होता है। यहां सदैव दूधिया प्रकाश विद्यमान रहता है।  सिद्धाश्रम में रहने  वाले को भूख-प्यास, काम-क्रोध, लोभ-मोह, सर्दी-गर्मी आदि का कोई आभास नहीं होता है।

सिद्धाश्रम में रहने वाले जरा-मरण से मुक्त होते हैं। इस स्थान का निर्माण स्वामी सच्चिदानंद जी की आज्ञा से विश्वकर्मा ने किया था। यहां रहने के लिए देवताओं को भी मनुष्य योनि में जन्म लेना पडता है। सिद्धाश्रम में हजारों वर्षों की आयु प्राप्त हजारों योगी अपनी-अपनी साधनाओं को पूर्णता प्रदान करते हैं।

  🎂 सिद्धयोगा झील

इस स्थल पर सिद्धयोगा झील है। इस झील में सदैव व्रह्मकमल खिले रहते हैं। इसका जल इतना स्वच्छ है कि इसकी तलहटी में मौजूद कोई भी वस्तु स्पष्ट दिखाई देती है। इसमें स्नान करने के बाद योगी रोगमुक्त और दिव्य बन जाता है। अब वह कोई भी साधना के योग्य हो जाता है।

 👌 सिद्धाश्रम प्रवेश

अब आप सोचते होंगें कि यहां तो सामान्य मानव जा ही नहीं सकता और न ही देख सकता है या फिर गृहस्थ व्यक्ति के लिए इसकी कोई उपयोगिता नहीं है। ऐसा बिल्कुल नहीं है क्योंकि सिद्धाश्रम में कोई भी जा सकता है, लेकिन कठिन है असंभव नहीं। इसका कारण यह है कि वहां मौजूद अधिकाँशतः साधक-साधिकाएं गृहस्थ थीं और हैं। उनमें से कुछ तो हमारे आपके बीच के ही हैं।

सिद्धाश्रम में प्रवेश की कसौटियाँ, परीक्षाएं कठिन होती हैं क्योंकि उस तपस्थली के रक्षक भारतीय प्रजातंत्र के चौकीदार नहीं है। वहां संचालक की अनुमति एवं निर्धारित मानदंड पूरा करने पर ही प्रवेश मिलता है, लेकिन इतना अवश्य है कि प्रवेश मिलने पर मानव जीवन की वास्तविकता फलीभूत हो जाती है। इस दिव्य स्थल में हम सिद्धाश्रम में पहुंचे हुए साधक के साथ ही प्रवेश कर सकते हैं। वह हमें उन्हीं साधनाओं को संपन्न करवाते हुए वहाँ ले जा सकता है जिन्हें संपन्न कर वह स्वयं सिद्धाश्रम जाता-आता है।

 💐 संचालन

सिद्धाश्रम की संचालन व्यवस्था प्रजातंत्र के विपरीत राजतंत्र से मिलती जुलती है। वहाँ एक राजा होता है। इस आश्रम की स्थापना से वर्तमान तक स्वामी सच्चिदानंद जी महाराज सिद्धाश्रम के राजा हैं। राजपद हेतु राजा को सर्वज्ञ होना चाहिए।जिसका आकलन साधनाओं के स्तर से किया जाता है। राजा स्वयं इसका संचालन नहीं करते। वह अपने किसी योग्य शिष्य को कार्यभार देकर सूक्ष्मावलोकन करते रहते हैं।

 👍 निष्कर्ष

निष्कर्ष स्वरूप अत्यंत दुर्लभ मनुष्य जन्म पाकर प्रत्येक मनुष्य को अपने-अपने मूल कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए सिद्धाश्रम प्राप्ति के लिए प्रयासरत रहना चाहिए। कभी-कभी तो इस मार्ग में अग्रसर रहने पर अप्रत्याशित कृपा प्राप्त हो जाती है जिससे सिद्धाश्रम में प्रवेश बिल्कुल ही सहज हो जाता है।

 

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