होली त्यौहार

         होली   त्यौहार

लेखक – विनोद सिंह

दोस्तों नमस्कार! आज हम होली त्यौहार के विषय में पढेंगें। होली  त्यौहार  बहुत नजदीक है। होली त्यौहार वसंत ऋतु में फाल्गुन मास की पूर्णिमा से शुरु होकर अगले दो तीन तक मनाया जाता है।

पुरानी कहावत है कि राजा हिरण्यकश्यप अपने पुत्र प्रह्लाद से बहुत दुखी था, क्योंकि प्रह्लाद सदैव  राम का नाम जप ( भक्ति ) करता था। हिरण्यकश्यप तामसिक वृत्ति का होने के कारण स्वयं को ईश्वर मानने लगा था। उसने प्रह्लाद को भक्ति से रोकने के लिए उसे तरह-तरह की यातनाए दिया, लेकिन सफल नहीं हुआ। अन्ततः हिरण्यकश्यप अपनी वहन होलिका से सहायता माँगता है।

होलिका को व्रह्मा से वरदान प्राप्त था कि वह अग्नि से नहीं जलेगी। इसलिये उसने फाल्गुन मास की पूर्णिमा की रात्रि में प्रह्लाद को लेकर अग्नि में प्रवेश कर जाती है। ईश्वर को कुछ और ही मंजूर था। हुआ यूँ कि होलिका तो जल कर राख हो गई, लेकिन प्रह्लाद जीवित बच गए। सुबह जब नगर निवासियों ने देखा तो वे सब खुशी से झूमते हुए प्रह्लाद पर पुष्प पंखुड़ियों की वर्षा करने लगे।

जैसा कि हम सभी जानते हैं कि होलिका के लिए आज भी तरह-तरह के खर-पतवार, लकड़ी इत्यादि एकत्रित करके जलाया जाता है और हम सभी अगले दिन से होली का ताँडव शुरू कर देते हैं। क्या होलिका जलाने मात्र से ही हमारा दायित्व समाप्त हो जाता है? नहीं! वह तो एक प्रतीक मात्र होता है।हमें अपनी तामसी वृत्तियों, मदिरा, माँस और अन्य सामाजिक विकृतियों को जलाना अर्थात त्यागना है।

होलिका दहन के अगले एक दो दिनों में जो तामसी ताँडव देखने को मिलता है उससे बहुत दुःख और चिंता होती है। हमारे जैसे बहुत से लोग कीचड़, गंदा पानी, काला तेल कोयला, विभिन्न प्रकार के हानिकारक रसायन, जहरीले रंगों इत्यादि का प्रयोग करते हैं। बहुत से एक दूसरे के कपडे़ तक फाड़ डालते हैं।

यह वीभत्स रूप चिंतनीय है। इससे कितने लोगों को शारीरिक और अन्य पीडा़ओं को सहन करना पड़ता है। बहुत से लोग अपनी जान भी गँवा बैठते हैं।

आज होली का विकृत रूप हमारे सामने है। क्या यही वास्तविक रूप था। अब हमारे सभ्य समाज के लोग यह भूल गए हैं कि जो त्यौहार कभी आपसी ममत्व, भाईचारा, सौहार्द्र को बढा़वा देता था अब वह कितना परिवर्तित हो चुका है।

इसलिए साथियों हमें पुनः अपने अतीत में झाँककर सीख लेनी चाहिए और वर्तमान विकृत स्वरूप को सुधारने के लिए स्वयं को तामसी वृत्तियों से मुक्त रखते हुए उन ताँडवकारी लोगों को समझाना होगा कि तुम जो यह कर रहे हो इससे दूसरों के साथ-साथ तुम्हारा भी नुकसान होता है।

 

 

 

 

 

 

 

 

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