सम्भोग कैसे शुरू हुआ

सम्भोग कैसे शुरू हुआ

सम्‍भोग कैसे सुरू हुआ तो, यह बात शतलोक की है जब  सम्‍भोग क्रिया नही  थी। उस समय ज्योति निरंजन तप कर रहा था । उस समय हम अात्माअो को  सम्भोग के बारे मे पता  नहीं  था।  तब हम सब  अात्मा इसको देख कर इस पर मोहित हो गये अौर ज्योति निरंजन को चहिने लगे। ज्योति निरंजन तप कर रहा था,  तब प्रभु ने ज्योति निरंजन से कहा बताअो तुम्हें क्या चाहिये तब ज्योति निरंजन ने रहने के लिये जगह  मागी,  तब प्रभु ने 21 ब्रह्माण्ड दे दिये।  लेकिन कुछ समय बाद ज्योति निरंजन ने 70  युग तप करके कुछ रचना सामग्री मागी तब प्रभु ने तीन गुण अौर पाँच तत्व प्रदान किये।

फिर ज्‍योति निरंजन ने सोचा कि इसमें कुछ आत्‍मा होनी चाहिए।

फिर उसने 64 युग तप किया तब प्रभु ने पूछा कि अब तुझे क्‍या चाहियें। 

ज्‍योति निरंजन कौन है

तब ज्योति  ने कहा कि प्रभु  मुझे कुछ अात्मा चाहिये तब प्रभु ने मना कर  दिया  कि मैं तुम्हें अात्मा नही दे सकता परन्‍तु अगर अात्मा अपनी इछा से जाना चाहिती है तो मैं नही रोकुंगा  लेकिन मेरे सामने हाथ खड़ा करके उन अात्माओं को ब‍ताना होगा।
तभी प्रभु ने हम सभी  अात्मों को समझाते हुए कहा,  इसकी बातों में मत अाना।
लेकिन जब ज्योति निरंजन हमारे पास अाया  तो हम  सब उसके साथ जाने को राजी हो गये।
प्रभु के सामने पहुचे तो किसी ने भी नही हाथ उठा कुछ देर बाद एक अात्मा ने हाथ उठया।
उसके बाद हम सब अात्माअों ने हाथ उठा दिये।
तो उसी समय प्रभु ने हम सब अात्माअों को उस ज्योति  निरंजन के साथ जाने की अनुमति दे दी।
तब ज्योति निरंजन से कहा कि तुम जाअो मैं अपने  अनुसार सभी अात्माअों को तुम्हारे पास भेज देगें ताब प्रभु ने जो पहली अात्मा ने हाथ उठाया था उसको लड़की बना दिया अौर उसमें सभी अात्माओं को प्रवेश कर दिया उस समय उस अात्मा के योनि नही थी उसके पास शब्द शक्ति थी। 
जिससे वह अात्मायें उत्पन्न कर देती वही प्रथम अात्मा का नाम दुर्गा था।
तब परमात्मा ने उस अात्मा को ज्योति निरंजन के पास भेज दिया अौर परमात्मा को पता था।
कि ज्योति निरंजन इसके  साथ गलत बरताअो करेगा एसा ही हुआ। जब इस ब्रह्माण्ड पर कुछ भी नही था। 
सिर्फ ज्योति निरंजन और दुर्गा थी दोनों जवान थे दुर्गा का रंग रुप निखरा हुआ था। 
ज्योति निरंजन ने दुर्गा को देखा  दुर्गा तो ज्योति  निरंजन के अन्दर विषय वासना उत्पन्न हो गई।
तो दुर्गा के साथ छेड़छाड़ करने लगा। 
तो दुर्गा विनती करने लगी तुम मेरे साथ एेसा क्यो कर रहे में तो तुम्हारी बहन हुँ।
 
मेरे पास शब्द शक्ति है अाप जितनी अात्मा चाहो में उत्पन्न कर देगें अाप मेरे बडे भाई हो मै अापकी बहन हुँ लेकिन ज्योति निरंजन नहीं माना उसने अपनी शब्द शक्ति द्वारा नाखूनों स्त्री इद्री दुर्गा के लगा दी। उससे सम्भोग करने की ठान ली तो उसी समय दुर्गा ने सुक्ष्म रूप रख के ज्योति निरंजन के पेट में चली गई।
दुर्गा परमात्मा से विनती करने लगी तभी परमात्मा ने अपने पुत्र का रूप रखके ज्योति निरंजन के सामने अाया।
अौर दुर्गा को ज्योति निरंजन के पेट से बाहर निकाला।

कैसे फसे जन्म मरण में

कैसे फसे जन्म मरण में:-  ज्‍योति निरंजन को शाप दिया की अाज से तेरा नाम काल होगा तू एक दिन में एक लाख जीव खाएगा अौर सवा लाख पैदा करेगा अौर तेरे साथ जितने जीव है उनके जन्म म्रत्यु होते रहेंगे।
दुर्गा अौर ज्योति निरंजन (काल) को सतलोक से निकाल दिया।
जब काल और दुर्गा अाई तब काल ने उससे सम्‍भोग किया यही कारण है कि जीव को जीव उत्पन्न करना है।
तो सम्भोग (मैथुन) करना पड़ता है यही कारण है।
कि संसार में हर एक बस्तु तथा जीव नासवान है तथा जीवन मरण है।
 
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        धन्‍यवाद

                                                                                                                                                                                             भूपेश कुमार

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