रेप और कमजोर समाज

रेप बलात्कार और कमजोर समाज

रेप भारत में ऐसा घटना अब आम बात सी हो गई है, यह कमजोर समाज,राजनेता या कानून सिस्टम  को दोष दिया जाये |

हमलोग विज्ञान में सफल हो रहे है, लेकिन समाज विज्ञान सफल नहीं हो रहा है, मनुष्य चाँद पर पहुँच गये , मंगल ग्रह पर जीवन बसाने की दिशा में प्रयास जरी है, लेकिन पृथ्वी पर अस्मिता व अस्मित्व की सुरक्षा की गारंटी नहीं है, सभ्य समाज का निकृष्टतम: कार्य रेप बलात्कार के रूप में मानव समाज में आम बात हो गयी है, बलात्कार की बढती घटनाएँ विकृत मनोदशा के साथ सामाजिक जीवन बिखर सा गया है,ऐसे कमजोर सामाजिक धरातल पर राष्ट्र का भी कमजोर होना निश्चित है, गांव –देहात हो या नगर –महानगर  हर जगह पापी लोग बच्चियों  और महिलाओ को अपने हवस का शिकार बनाते रहते है, किशोरवस्था से लेकर वृद्धवस्था तक के बलात्कार और बचपना से लेकर वृद्धवस्था तक की पीडिता को देखकर सामाजिक जीवन पर बुरा असर पड़ता जा रहा है, यह भारत में प्रथम अपराध सा हो गया है |

3 Comments on “रेप और कमजोर समाज”

  1. सामाजिक रूप से असंस्कृत लोगो के मन मे संस्कृत नही आयेग्गी तब तक कोई सुधार नही सकता।

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