काम के साथ क्रोध हो तो विनाश निश्चित….

काम के साथ क्रोध हो तो विनाश निश्चित

काम के साथ क्रोध हो तो विनाश निश्चित….

 परिवार से चार चीज़ें हमेशा दूर रखें, काम, क्रोध, मद और लोभ। इन चारों चीज़ें एकजुट होने से विनाश का द्वार खुल जाता है। इन चारों में एक भी परिवार में प्रवेश करने से परिवार में कलह होने में तनिक भी देर नही लगती। परिवार में वो ही सुखी है जिस परिवार में ज्ञान, कर्म, धर्म और गुणों का वास हो। इन चारों का परिवार में कभी भी चर्चा का विषय नही बनाना चाहिए क्योंकि इनमें से एक का भी प्रभाव प्रवेश करते ही खुशियों में ग्रहण लगना शुरू हो जाता है। इन चारों में पहला काम आता है जब परिवार के दाम्पत्य जीवन में संचारित होता है। काम जब सिर पर चढ़ कर बोलने लगे और पूरा न हो तब क्रोध विनाश का रूप ले लेती है।

जिन पति-पत्नियों का रिश्ता काम पर टिका हुआ है उनका जीवन में शांति और आनन्ददायी का कल्पना व्यर्थ है। काम का सबसे बड़ा मित्र क्रोध है। जैसे ही काम असंतोष की दहलीज पर कदम रखता है, पति-पत्नी के रिश्ते में दरार आने शुरू हो जाता है। कामातुर पति, पत्नी की हर बात मानने को मजबूर हो जाता है। रामायण के इस अयोध्या कांड को देखने से मालूम होता है कि कैसे काम और क्रोध दोनो मिलकर रघुवंश को बिखराव की चौखट पर लाकर  पटक दिया था। दशरथ राम को युवराज घोषित किया। कैकयी को क्रोध हुआ। दशरथ की प्रिये पत्नी कैकयी थी। दशरथ अपने प्रिय पत्नी की आंखों में एक भी आंसू देखना नही कहते थे। कोपभवन में जब कैकयी सिंगरविहीन खड़ी थी राजा ने जब देखा तो वे कांप उठी क्योंकि राजा कैकयी के प्रति कामासक्त थे। राजा के अंदर काम प्रवेश हुआ तथा रानी के अंदर क्रोध। फिर क्या हुआ ये आप अच्छी तरह जानते है।

राम को 14 वर्ष का वनवास जाना पड़ा इसलिए परिवार में काम और क्रोध को प्रवेश न करने दे। सभी ईश्वर पर समर्पित हो। मर्यादा का उलंघन न करें तभी परिवार स्वर्ग बनता है।

धन्यवाद

लेखक:-

Pramod Seth

 

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हिम्मत के आगे किस्मत गरीब है, दो कदम आगे बढ़ो तो मंज़िल करीब है।

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