रहस्य :जिसके आगे डिस्कवरी चैनल भी हार गया

रहस्य :      जिसके आगे  डिस्कवरी चैनल भी हार                       गया

Mystery : Discovery Channel is also failed 

               रहस्य जिसके आगे डिस्कवरी चैनल भी हार गया, जी हाँ दोस्तो हमारे देश में कई ऐसे रहस्य हैं जो आज भी एक पहेली बने हुए हैं |
इनके रहस्य को जानने में कई वैज्ञानिक भी असफल रहे हैं |
आज हम एक ऐसे ही रहस्य के बारे में जानेंगे, जिसके आगे डिस्कवरी चैनल भी हार गया |
 
       वेलकम दोस्तो, हमारे देश में एक ऐसा रहस्यमयी कुंड  है जो दिखने में साधारण लगता है परन्तु यह असाधारण कुंड है |
इसकी विशेषता यह है कि जब भी एशिया महाद्वीप में कोई प्राकृतिक आपदा घटने वाली होती है | इस रहस्यमयी  कुंड का पानी अपने – आप बढ़ने लगता है |
           डिस्कवरी चैनल ने इस रहस्यमयी  कुंड की गहराई नापने का प्रयास किया परन्तु असफल रहा |
पुराणों में यह नील कुंड के नाम से वर्णित है पर लोग इसे भीम कुंड के नाम से जानते हैं |
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मध्य प्रदेश के छतरपुर से 77 किमी दूर बाजन गाँव के समीप भीम कुंड एक प्रसिद्ध तीर्थस्थल है |
यहाँ एक जल कुंड है जो ऊपर से देखने पर 50 से 75 मी चौड़ा दिखता है |
यह जल कुंड भू – वैज्ञानिकों के लिए रहस्य और जिज्ञासा का विषय बना हुआ है |
इसकी गहराई नापने के लिए गोताखोर कई बार प्रयास कर चुके हैं |
लेकिन अभी तक इसकी गहराई को कोई नहीं नाप सका है |                                                            यह जल कुंड पहाड़ पर एक गुफा में है जिसमें ऐसा कटाव है कि सूर्य की किरणें पानी पर पड़ती हैं जिससे पानी कई रंगों में चमकता है |
सामान्यतया जब कोई इंसान पानी में डूबकर मर जाता है तो उसका मृत शरीर कुछ समय बाद पानी पर तैरने लगता है, परन्तु इस कुंड में डूबकर मरने वाले का शरीर गायब हो जाता है और मृत शरीर कभी ऊपर नहीं आता है |

 

❄ प्राकृतिक आपदा घटने के पूर्व सूचना देता है यह कुंड ❄

 
लोगों का कहना है कि जब भी कोई प्राकृतिक आपदा आने वाली होती है तो इसका जलस्तर बढ़ने लगता है |
नेपाल और गुजरात में आये भूकम्प के दौरान भी इसका जलस्तर बढ़ा था |
                 2004 में जब सुनामी आई थी तब इस कुंड में 15 मी ऊँची लहरें उठी थी, जिसके बाद यह कुंड देश – विदेश की सुर्खियों में आया |
इसी समय डिस्कवरी चैनल की टीम इसके रहस्यों को जानने के लिए यहाँ आई |
इसके गोताखोरों ने इस कुंड में डुबकी लगाये पर वे न तो इसकी गहराई नाप सके |
और न ही ये पता कर पाये कि सुनामी के समय यहाँ लहरें उठने का क्या कारण था |
हालांकि उन्हें गहराई में दुर्लभ और विचित्र जलीय जीव – जंतु देखने को जरूर मिले |
                डिस्कवरी चैनल ने बताया कि इसकी गहराई में दो जल कुंड है — एक से पानी निकलता है दूसरे में जाता है,
जिसके  कारण  तेज  बहाव रहता है और कुंड का जलस्तर कभी कम नहीं होता है |
लगभग 80 फीट की गहराई में तेज जलधारा का स्त्रोत है जो शायद इसे समुद्र से जोड़ती है |
 
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❄रहस्य जानने के अन्य प्रयास❄

               एक बार भारतीय नौसेना के गोताखोरों ने इसकी गहराई नापने का प्रयास किया परन्तु वे भी असफल रहे |
प्रयास यहीं खत्म नहीं होता है, एक बार जिला प्रशासन ने तीन पंप लगाकर इस कुंड के पानी को निकालने का प्रयास किया |
परन्तु सात दिन तक लगातार पंप चालू रहने के बावजूद इस कुंड का जलस्तर एक इंच भी कम नहीं हुआ |
ऐसा माना जाता है कि जहाँ कुंड है वह जमीन के अंदर बहती तेज जलधारा के कारण बना है|
परन्तु आज तक कोई भूगर्भ वैज्ञानिक ये पता नहीं कर सका कि यह जलधारा किस जलस्त्रोत से जुड़ी है |
 

  ❄ पौराणिक कथा❄

 
      एक अन्य कथा के अनुसार भीम कुंड का सम्बन्ध महाभारत काल से है |
अज्ञातवास के समय पाण्डव पहाडों और जंगलों में छुपकर रहते थे |
दूर – दूर तक जलस्त्रोत नहीं होने के कारण उनके पास उपलब्ध पानी समाप्त हो गया था |
इसी दौरान एक पहाड़ पर पहुँचने के बाद द्रोपदी को प्यास लगी और पानी पीने की इच्छा जताई |
दूर – दूर तक कोई जलाशय नहीं था तो भीम ने अपनी गदा से पहाड़ पर प्रहार किया |
जिससे पहाड़ जमीन में थँस गया और जलधारा फूट पड़ी , तब द्रोपदी सहित पाण्डवों ने प्यास बुझाई |
भीम द्वारा बनाये जाने के कारण इसका नाम भीम कुंड पड़ा |
 

❄कुंड की खासियत❄

 
   कुंड की खासियत है कि इसका पानी हमेशा स्वच्छ नीले रंग का पारदर्शी रहता है जिसके आर – पार गहराई तक देखा जा सकता है |
कहा जाता है कि इसका पानी हिमालय के पानी जैसा गुणवत्तापूर्ण है |
अठारहवीं शताब्दी के अन्तिम दशक में विजावर रियासत के राजा ने मकर संक्रांति पर मेले का आयोजन किया |
तब से यहाँ लगातार मकर संक्रांति पर भव्य मेला लगता है |
ऐसा माना जाता है कि मकर संक्रांति में इस कुंड में डुबकी लगाने से सारे पाप धुल जाते हैं |
इस मेले में हजारों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं |
दोस्तो आपको यह जानकारी  कैसी लगी कमेन्टस करके जरुर बतायें क्योंकि आपके मार्गदर्शन से मुझे एक नई दिशा मिलेगी |

 

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आपका ———–  प्रमोद कुमार

 

 

 

About PRAMOD KUMAR

मेंने ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन राजस्थान में कम्पलीट किया |इसके बाद B. Ed कर्नाटक से किया | लेखन की चाह बचपन से ही थी, कॉलेज आते आते इसमें कुछ निखार आ गया |कॉलेज में यह स्थिति थी कि यदि कोई निबंध प्रतियोगिता होती और उसमें मेरे शामिल हो जाने से प्रतियोगिता दूसरे और तीसरे स्थान के लिए रह जाता | वापस राजस्थान आने पर अपना विद्यालय खोला ,सरकारी शिक्षक बनकर त्याग पत्र दे दिया |बिजनेस में एक सम्मानित ऊँचाई को पाकर धरातल पर आ गया |अब अपने जन्म स्थल पर कर्म कर रहा हूँ, जहाँ शिक्षा देना प्रमुख कर्म है | बचे समय में लिखने का अपना शौक पुरा करता हूँ |

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5 Comments on “रहस्य :जिसके आगे डिस्कवरी चैनल भी हार गया”

  1. अच्छी जानकारी है सभी को जानकारी मिलने के बाद देखने की इच्छा जागृत हो जाती है। धन्यवाद।

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