नवरात्रि उत्सव

 

    नवरात्रि – उत्सव

                   दुर्गा

लेखक – विनोद सिंह

नमस्कार दोस्तों ! आज मैं नवरात्रि उत्सव के विषय में चर्चा करूंगा । हम  नवरात्रि् में दुर्गा पूूजा करके कैसेे शक्तिशाली बना जाता है ,इसी विषय में चर्चा करेंगे। हिंदू धर्म व्रत, उत्सव और त्यौहारों से भरा पडा़ है।  नवरात्रि उत्सव भी उन्हीं में से एक है। एक साल में चार नवरात्रि होती हैं। जिनमें से दो गुप्त नवरात्रि कही जाती हैं। गुप्त नवरात्रि का महत्व तंत्र एवं साधना क्षेत्र में होता है। चारों नवरात्रि तीन-तीन महीने के अंतराल में होती हैं।

आश्विन नवरात्रि और चैत्र नवरात्रि प्रकट होती हैं। अर्थात इन नवरात्रों में खूब पूजा पाठ और उत्सव मनाया जाता है इसलिए सभी लोग इन दोनों नवरात्रों के बारे में जानते हैं।  दोस्तों चैत्र नवरात्रि ( 18 मार्च से 26 मार्च 2018 )का समय नजदीक आ गया है ।

नवरात्रि की अधिष्ठात्री शक्ति   💐दुर्गा  🎂 हैं। नवरात्रि के दिनों में हम सभी शक्तिपुँज दुर्गा के नौ दिनों में नौ रुपों की पूजा उपासना करते हैं और माँ भगवती से आशीर्वाद तथा समस्याओं से संघर्ष करने की शक्ति प्राप्त करते हैं। पूरे व्रह्माण्ड में माँ ही ऐसी होती है जो शक्ति प्रदाता होती है। बिना शक्ति के शिव भी शव बन जाते हैं। माँ तो माँ होती है फिर चाहे मानवीय माँ हो या दैवीय माँ। माता की ममता की किससे की जा सकती है? उसकी ममता अपरंपार होती है।

नवरात्रि के नौ स्वरूप निम्नवत हैं

1 –  👍शैलपुत्री 👌

पर्वतराज हिमालय के घर में जन्म लेने के कारण इनका नाम शैलपुत्री पडा़। इनका वाहन बैल है। यह बाएँ हाथ में त्रिशूल और दाएँ हाथ में कमल पुष्प लिए हैं। साधक की चेतना इस दिन मूलाधार में वास करती है। साधकों को इस दिन अपना ध्यान मूलाधार में केंद्रित करना चाहिए। इस चक्र में गणेश जी का वास होता है।

2  –💐व्रह्मचारिणी🎂

इस स्वरूप की उपासना दूसरे दिन की जाती है। यह शक्ति व्रह्मचर्य को धारण करने वाली होती है और माँ का यह स्वरूप तपस्यारत रहता है। इस स्वरूप की उपासना करने से उपासक को त्याग, वैराग्य और संयमवृद्धि मिलती है। इसके दाएँ हाथ में माला और बाएँ हाथ में कमल है। इस दिन साधक को स्वाधिष्ठान चक्र में ध्यान लगाना चाहिए। इस व्रह्मा और गायत्री देवी का वास होता है।

3 – 😊चँद्रघंटा 😢

माँ के इस स्वरूप की उपासना तीसरे दिन की जाती है। माथे पर अर्द्धचंद्र धारण करने के कारण इनका नाम चँद्रघंटा पडा़।इनके तीन नेत्र और दस भुजाएं हैं। सिंह इनका वाहन है। यह देवी शांतिदायक और कल्याणकारी हैं। इस दिन साधक को मणिपुर चक्र अर्थात नाभि में ध्यान करना चाहिए। इस चक्र में विष्णु और लक्ष्मी का वास होता है।

4 –💐कूष्माण्डा 🎂

इस स्वरूप की उपासना नवरात्रि के चौथे दिन की जाती है। इनकी आठ भुजाएं हैं। आठों भुजाओं में कमंडल, धनुष, बाण, कमल, कलश, चक्र, गदा और जपमाला है। यह सिद्धि प्रदान करने वाली हैं। उपासक को इस दिन अनाहत चक्र में ध्यान करना चाहिए। इस चक्र में पार्वती और शिव का वास होता है।

5 –👍स्कंदमाता👌

देवी के इस स्वरूप की पूजा पाँचवें दिन की जाती है। इसका वाहन सिंह है। इसकी उपासना करने से मनोकामना पूरी होती है और शाँति का अनुभव होता है। साधकों को इस दिन विशुद्ध चक्र का ध्यान करना चाहिए। इस चक्र में सरस्वती का वास होता है।

6 – 😊कात्यायनी😢

इस स्वरूप की पूजा छठें दिन की जाती है। इनके पूजन से शरीर में शक्ति संचार होता है और वह शक्तिशाली बनकर दुश्मनों का संहार करने में सक्षम हो जाता है। साधकों को इस दिन आज्ञा चक्र में ध्यान करना चाहिए। इस चक्र का बीज मंत्र  हं होता है।

7 – 💐कालरात्रि🎂

इस स्वरूप की पूजा सातवें दिन की जाती है। इस देवी का स्वरूप बहुत ही भयंकर एवं डरावना होता है, लेकिन डरिये नहीं। यह डरावना स्वरूप केवल दुष्टों,दैत्यों और दुश्मनों के लिए होता है। साधक तो माँ के लिए शिशु की तरह होता है ।भला भी कभी डराती है क्या?  साधकों को इस दिन सहस्रार अर्थात सिर के मध्य भाग में ध्यान करना चाहिए । इस देवी के नासाछिद्र से ज्वाला निकलती है। इसका वाहन गधा है । यह देवी तंत्र की प्रमुख शक्ति है।

8 –😊महागौरी😢

इस देवी की पूजा आठवें दिन की जाती है। इस दिन पूरे देश में देवी पूजा का उत्साह देखते ही बनता है। इसकी चार भुजाएं हैं। यह शंख चक्र , धनुष और बाण धारण करती हैं ।इसकी पूजा से साधक के अंदर सहज प्रेम उत्पन्न हो जाता है, जिससे वह अपने पराये के भेदभाव से रहित हो जाता है और वह विश्वकल्याण की भावना से ओतप्रोत हो जाता है।

9- 💐सिद्धदात्री🎂

नवरात्रि के अंतिम दिन माँ भगवती के इस नवें स्वरूप की पूजा की जाती है और कन्याओं को देवी स्वरूप मानकर पूजा की जाती है तथा उन्हें भोजन कराकर यथासंभव उपहार दिया जाता है। देवी के इस स्वरूप की उपासना करने से साधक को सभी प्रकार की सिद्धियों की प्राप्ति हो जाती है और वह पुरुषोत्तम बन जाता है। यह देवी सभी सिद्धियों को देने में सक्षम है। इसीलिए इसे सिद्धदात्री कहा जाता है।

दोस्तों अब मैं एक अत्यंत प्रभावकारी एवं शक्तिशाली मंत्र लिख रहा हूँ जिसका विधिपूर्वक अनुष्ठान संपन्न करने से आप अपने अंदर अत्यंत शक्ति और चमत्कार का अनुभव करेंगे। आपके दुश्मन निष्क्रिय हो जायेंगे और आप सभी समस्याओं को बहुत ही सहज रूप से हल कर लेंगे। क्योंकि इसमें  नौ देवी देवताओं के वीजमंत्र शामिल हैं।

👌ऊँ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै।ऊँ ग्लौं हुं क्लीं जूँ सः ज्वालय ज्वालय ज्वल ज्वल प्रज्वल प्रज्वल ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चै ज्वल हं सं लं क्षं फट् स्वाहा।🎂

धनयवाद

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

4 Comments on “नवरात्रि उत्सव”

  1. माँ दुर्गा के नौ रुपों का सरल शब्दों में समझाया गया है |प्रत्येक व्यक्ति आसानी से नवरात्रि का महत्व समझ सकता है |

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