कानून बनाने की प्रक्रिया

कानून बनाने की प्रक्रिया

लोकतांत्रिक व्यवस्था में कानून निर्माण करने का अधिकार सैद्दांतिक रूप से तो जनता का है, किन्तु तकनीकी तथा व्यवहारिक दृष्टि से जनता के प्रतिनिधि कानून का निर्माण करते है, भारत में कानून बनाने का दायित्व संविधान ने भारतीय संसद को दिया है, क्योकि संसद जनता के प्रतिनिधि है | संसद का एक प्रमुख कार्य कानून बनाना है | कानून बनाने के लिए एक निश्चित प्रक्रिया अपनाई जाती है|आम तौर पर जनता सबसे पहले समाज की समस्याओं के समाधान के लिए किसी खास कानून को बनाने के लिए आवाज उठाती है | जनता के उठाये गये मुद्दों को मंत्रिमंडल द्वारा उस विषय से सम्बंधित विभाग के पास सुझाव एंव विधेयक निर्माण के लिए भेजा जाता है | उसके बाद मंत्रिमंडल विधेयक को संसद में पेश करता है उसका मूल उद्देश्य एंव समय निर्धारित करती है | भारत में संसद के दो सदन है –लोकसभा  एंव  राज्यसभा | विधेयक को किसी भी सदन में रखा जा सकता है | विधेयक पर सदन में विस्तृत चर्चा होती है, जिसमे सुधर एंव संशोधन भी होता है |

                                                 जनता का मुद्दा /समाज में चर्चा एंव बहस

                                                 सरकार द्वार सदन में विधेयक पेश करना

                                                              सदन में चर्चा / बहस

                                 विधेयक पारित  ———————————–  विधेयक रद्द

 

  1.     पारित विधेयक को दुसरे सदन में भेजा जाता है,
  2.     दुसरे सदन में चर्चा /बहस एंव पारित अथवा संशोधन होता है,
  3.     राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के लिए भेजा जाता है,
  4.     सहमति के बाद विधेयक कानून बन जाता है,

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