हमारा चमत्कारी मस्तिष्क : कैसे रखें इसे दुरुस्त ?

हमारा चमत्कारी मस्तिष्क

हमारा चमत्कारी मस्तिष्क: कैसे रखें इसे दुरुस्त ?

हमारा चमत्कारी मस्तिष्क: हमारे जीवन के स्वस्थ स्तर को बनाये रखने के लिए हम जिस आध्यात्मिक शक्ति को लगाते हैं, वह हमारे स्वस्थ जीवन के निर्धारण के लिए एक  लाभदायक कारक सिद्ध होता है।

हम सभी को आध्यात्मिक प्रतिबिंब के लाभ की आवश्यकता है। इसके माध्यम से हम अपने दैनिक जीवन के विषाक्त पदार्थों को निकाल कर खुद को शुद्ध एवं स्वच्छ कर सकते हैं।

हमारा चमत्कारी मस्तिष्क, हमारे शरीर को ठीक रखने के लिए प्रतिबद्ध है। आध्यात्मिकता, स्वयं को नए सिरे से सुधारने और मनुष्य जीवन की परवाह करने के लिए, खुद का पुनर्जन्म करने का एक तरीका है। 
ध्यान प्रक्रिया और आत्मनिर्देशन के माध्यम से, हम एक संपूर्ण सुधार की स्थिति बनाये रख सकते है। यदि हम चाहें, तो हम अपने चमत्कारी मस्तिष्क को, समयसमय पर उचित निर्देशों के द्वारा अपने मन, शरीर और आत्मा के कल्याण की स्थिति बनाये रख सकते है।
चमत्कारी मस्तिष्क द्वारा ध्यान, हमारे मन के प्रति निवारक रखरखाव है। ध्यान हमें हमारे अंदरूनी आत्मबल को बढ़ाने का अवसर देता है। ध्यान, हमारे अंदर उस छोटीसी आंतरिक आवाज को सुनने के लिए, जिसे हमारी मानसिक प्रक्रियाओं को निर्देशित करने के लिए समझा जाता है,  आज के आधुनिक समय में हमारे बाहर के अत्यधिक शोर और प्रदूषण के कारण अक्सर, भटक जाता है।

हमारी आध्यात्मिक और ध्यान प्रक्रिया ऐसे उपाय हैं जो हमारे मनमस्तिष्क को स्वस्थ रखने के लिए उपलब्ध हैं। 

साथ ही साथ हम अपने शरीर को स्वस्थ रख सकते हैं। हमारा चमत्कारी मस्तिष्क हमारे शरीर के अंदर एक जटिल और बहुमुखी प्रतिभा वाली मशीन की तरह है। इसकी तुलना किसी अन्य से की ही नहीं जा सकती।
लेकिन अगर हम अपने चमत्कारी मस्तिष्क केा अच्छी तरह से रखने के लिए और देखभाल करने के लिए समय नहीं देते हैं, तो यह सही ढंग से कार्य करना बंद कर सकता है और सही तरीके से काम करने में असमर्थ हो सकता है।
हमारे चमत्कारी मस्तिष्क में कार्य करने के विभिन्न स्तर हैं। इन्हे मस्तिष्कीय तरंगें कहा जाता है। जैसा कि हम दिन के दौरान अपने विभिन्न चरणों से गुजरते हैं, हम अपने मस्तिष्कीय तरंगों की अनेक गतिविधियो के विभिन्न चरणों में प्रवेश करते हैं।
 हमारा चमत्कारी मस्तिष्क इस प्रकार की गतिविधि का उपयोग इस तरह से करता है कि हमारे व्यस्त मन को आराम करने के लिए कुछ समय मिल जाए

इस तरह हमारे मस्तिष्क के अंदर प्राप्त हुयी सभी सूचनाओं के रखरखाव का प्रबंधन कर, दिन के लिए एक प्रकार से इसके द्वारा एकदिमागी फ़ाइलतैयार कर दी जाती है।

जब हम इन प्रक्रियाओं के लिए पर्याप्त समय नहीं देते हैं, या हम पर्याप्त आराम प्राप्त नहीं कर पाते हैं, तो हमारा दिमाग स्वस्थता की स्थिति को बनाए नहीं रख सकता है, ठीक उसी तरह जैसे हमारा शरीर बिना आराम के स्वस्थता के लिए सक्षम नहीं हैं।
आधुनिक वैकल्पिक चिकित्सा और समग्र चिकित्सक, हमारे शरीर के माध्यम से बहने वाली ऊर्जा की शक्ति में विश्वास करते है। यह ऊर्जा हमारे चमत्कारी मस्तिष्क से भी उतनी ही फैलती है। यह माना जाता है कि यह ऊर्जा हमारे शरीर के तंत्रिकातंत्र के लिए परिवहन द्वारा प्रमुखता से संचार करने के लिए है।
साँस लेने की तकनीक, संगीत, अरोमा थेरेपी और मोमबत्ती चिकित्सा आदि ऐसे तरीके हैं जिनके माध्यम से वास्तव में हम अपने चमत्कारी मस्तिष्क को आराम करने के सुअवसर प्रदान करने और आगे उपयोग के लिए खुद को फिर से कार्य करने के लिए तैयार होने की अनुमति देते हैं।

हमें अपनी दैनिक दिनचर्या के दौरान मानसिक स्वास्थ्य बनाए रखने के लिए समय निकालना, याद रखना चाहिए क्योंकि, हम शारीरिक स्वस्थता को बनाए रखने का प्रयास करते हैं।

पूरी प्रक्रिया के बारे में अच्छी बात यह है कि जैसा हम इन कार्यों को पूरा करने के बारे में देखते हैं, अक्सर संरक्षण और देखभाल के लिए अवसर परस्पर विनिमय योग्य होते हैं।
अपने बीस मिनट की पैदल यात्रा अथवा टहलने के दौरान हम अपने चमत्कारी मस्तिष्क को शांत रखने में काफी मदद कर सकते हैं। हम चलते हैं, तो हम मांसपेशियों की ताकत बढ़ाने के सुअवसर का लाभ उठा सकते हैं। अक्सर संगीत सुनने के समय हमारे दिमाग को आराम और पुनर्गठन के अवसर की आवश्यकता होती है। आत्मनिर्देशन, ध्यान और योग प्रक्रियाएँ इसमे अत्यंत सहायक होती हैं।
यद्यपि, यह हमेशा अवसरों का सबसे औपचारिक समय नहीं होता है फिर भी, हमें अपनी आंतरिक आवाज को प्रतिबिंबित करने और सुनने का एक मौका उपलब्ध होता है। यह सुबह, शाम अथवा दिन के मध्य में हो सकता है, जब सुहावनी हवा आपके केशों को छूती हुई मंदमंद बह रही हो और किसी गाने की मधुर संगीत लहरी फिजां में गूँज रही हो।
यदि आप अपने चमत्कारी मस्तिष्क के बारे में जानना चाहें कि आप किस प्रकार से अपने मस्तिष्क के द्वारा जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में सफल हो सकते है तो अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर जाएँ
आपकी सफलता में सहयोगी
नागेंद्र दत्त शर्मा

http://dashsphere.com/EcBs

About nsharma3

My name is Nagendra Dutt Sharma residing at present in Dehradun, a city Capital of Uttarakhand, one of the famous States of India, the beautiful hilly area of Garhwal Himalayas, a very popular and famous touristic place that is also known as a hub for good education which also have a charming and fascinating climate to live. I've retired as an Assistant Accounts Manager after rendering more than 35 years of service in U P Forest Corporation and Uttarakhand Forest Development Corporation, Dehradun. I also worked as a Manager Accounts on deputation in District Project Management Unit, Swajal, Haridwar (a Govt. of India and World Bank project) during July 1,2009 to May 14, 2010. I am the author of the following books published and printed by Worldwide Trade, Dehradun— “How To Make R$.10,000 Every Month In A Perfect Home Mail Order Business!(1993),” “Your Educational Guide To Mail Order Success!(1995)” and “Business Success Secrets!(1996)” I was also an Honorary Editor of “The Mail Order India International,” a quarterly magazine, published between 1989 to 1996 which was then mailed in more than 100 countries around the world. My other books “How to Write and Self-publish Your Way to Riches!” and "how to Grow Rich in Online Home Business!" recently self-published by me through Amazon’s CreateSpace and Kindle publishing services. Both books are available on Amazon.com I also have got self-published my another book recently in Hindi Language, "Aapke Mastishk Ke Chamatkaar!" through Online Gatha, Lucknow which is also available on Amazon, Flipkart, Snapdeal, Shopclues and onlinegatha.com websites in both printed and eBook PDF format. http://tinyurl.com/huxe9tw My overall view in nutshell is: All people here on this planet earth are for help to each other. If we do not stick to this principle, we are not heading in the direction in which the Almighty is trying to lead us. Life is short, our memories will remain only if our deeds are thoughtful and kind. I understand that we people are unique creatures of that Almighty and everyone of us has excellent and incomparable features and came here on the earth for a particular purpose which each of us catches according to His direction. We must not act like animals as the animals have no mind and imagination to feel what is good and what is bad. If we do like them, then how are we different from them? We must think about others... all others on this earth. That,s why I believe in this quote from...Pope: "Honor and shame from no condition rise; Act well your part, there all the honor lies"

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