मैं यूं ना तेरे सामने बैठा हूं।तेरी जुल्फें गिरने के इंतजार में बैठा हूं।।

  मैं यूं ना तेरे सामने बैठा हूं।तेरी जुल्फें गिरने के इंतजार में बैठा हूं।।

मैं यूं ना तेरे सामने बैठा हूं।तेरी जुल्फें गिरने के इंतजार में बैठा हूं।।

मैं यूं ना तेरे सामने बैठा हूं।तेरी जुल्फें गिरने के इंतजार में बैठा हूं।।

दोस्तों ये Title देख कर आपको थोड़ा मज़ा तो जरूर आया होगा ।तो चलिए दोस्तों।  मैं आपके लिए कुछ ऐसे ही खास  ग़ज़ल लाया हूं ।जिसे आप पढ़ने के बाद खुशी से झूम जाएंगे ।

जी हां दोस्तों, इस ग़ज़ल में आप देखेंगे। कि किस तरह से एक दीवाना, अपने माशूका के दीदार के लिए उसके सामने जाता हैं।

और किस तरह से वो ग़ज़ल व शायरी करता हैं।और किस तरह से वो उसकी तारीफ करता हैं ।मुहब्बत भरी अंदाज़ मैं।

दोस्तों ,शायद आपको भी कभी किसी से मुहब्बत हुई होगी।इसलिए दोस्तों,पूरा मज़ा लेने के लिए।इस ग़ज़ल को पूरा पढ़ें ।

और अपनी माशूका (Girlfriend)को जरूर सुनाए।

अब आगे ग़ज़ल के रूप में देखिए ।

मैं यूं  ना तेरे सामने बैठा हूं।तेरी जुल्फें गिरने के इंतजार में बैठा हूं।।

जो नुर देख ना सका कोई।वो नूर तेरे चेहरे पर , मैं देखने आया हूं ।।

फिज़ा हो जाते है देख,जिसे दीवाने।उन्हीं की नज़ाकत मैं  देखने आया हूं ।।

कई सुना मैं,पारियों की कहानियां।यकीन ना हुआ,तो देखने आया हूं।।

मैं यूं ना तेरे सामने बैठा हूं।तेरी जुल्फें गिरने के इंतजार में बैठा हूं।।

अब जो देखा तो लगा , जां निसार कर दूं तुझपे ।दिल अपना ,कैद भी ना कर पाया हूं ।।

इल्तिज़ा है तुझसे ,मेरी हाथों को थाम लें।मैं परवाना हूं , शम्मा में तेरे बुझने आया हूं ।।

मैं यूं ना तेरे सामने बैठा हूं ।तेरी जुल्फें गिरने के इंतजार में बैठा हूं ।।

Writter : मनीष देव

मैं यूं ना तेरे सामने बैठा हूं।तेरी जुल्फें गिरने के इंतजार में बैठा हूं।।

#नीचे कुछ ग़ज़ल है आप इसे भी पढ़ सकते है।

1.जब मां की याद आती है,आंखो से अश्क आती है।

2.कौन कहता है हम आजाद है हम तो कैद है।

3.कोई तो पता दो यारों उनके शहर का।

4.उसके दिल के निकले भटक रहे है

दोस्तों ,अगर आपको ये ग़ज़ल अच्छा लगा ,तो जरूर LIKE करें ,और SHARE करे ।

दोस्तों, इसी तरह से आप मेरे पोस्ट पर बने रहें ,अगर आप किसी टॉपिक पर ग़ज़ल पढ़ना चाहते हैं,तो जरूर हमें कॉमेंट में बताए।

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