भारत में लोकपाल का इतिहास और वर्तमान

भारत में लोक पाल का इतिहास और वर्तमान 

भारत में लोक पाल का इतिहास और वर्तमान जैसे लेख का मकसद कुछ और नहीं बल्कि 

सिर्फ इतना मात्र है कि आपको अन्ना हजारे के वर्तमान में फिर से 

किए जा रहे लोक पाल आन्दोलन को जानने और समझने में मदद मिलेगी ।

आपको पता होगा कि महान समाजसेवी अन्ना हजारे ने

दिल्ली की सरकार के खिलाफ एक बार फिर से किसान हित,

लोक पाल आदि को लेकर रामलीला मैदान में राष्ट्र व्यापी आन्दोलन की शुरुआत कर दी है ।

इसी के संदर्भ में इस लेख में ,

पहले और आज की तमाम सच्चाइयों  की जानकारी आपको

मिल सकती है ।

तो आइए जानें कुछ बातें लोक पाल के बारें में, ,,,,  

लोक पाल क्या है? 

संयुक्त राष्ट्र संघ के एक सेमिनार में राजनीतिज्ञों और नौकरशाहों के,

आचरण तथा कर्तव्य पालन की विश्वसनीयता पर पारदर्शिता को लेकर दुनिया की विभिन्न राजनीतिक प्रणालियों  में उपलब्ध संस्थाओं की जांच की गई ।

इसमें संसदीय जांच समितियां, रूस की पराकयूरेसी तथा अंग्रेजी विधि के अनुरूप सकैअंडिनेवियन देशों के ओम्बड्समैन शामिल हुए ।

ओम्बड्समैन की स्थापना स्वीडन में 1809 में हुई थी ।

इसे गार्जियन आफ सिटीजन राइट माना जाता है। 

यह एक ऐसा स्वतंत्र और सर्वोच्च निकाय है जो लोक सेवकों के विरुद्ध शिकायत सुनता है ।

और सम्बंधित जांच पड़ताल कर के  उचित कार्रवाई  की  सिफारिश करता है ।

भारत में लोकपाल 

ओम्बड्समैन को भारत में लोकपाल कहा जाता है ।

ध्यान दें कि   केंद्र में लोकपाल तथा राज्य में लोकायुक्त कहा जाता है ।

यह नामकरण लक्ष्मीमल सिंघवी ने किया था ।

भारत में सर्वप्रथम 1960 में के एम मुंशी ने लोकपाल संबंधी मुद्दे को संसद में उठाया था ।

 प्रथम प्रशासनिक सुधार आयोग ,1966 की सिफारिश के आधार पर  ,

पहली बार लोकपाल विधेयक 9 मई  1968 को इंदिरा गांधी के प्रधान मंत्री रहते संसद में पेश हुआ था ।

ध्यान दें इस विधेयक के अनुसार इसके दायरे में खुद प्रधान मंत्री का भी पद था

यह बात अलग है कि बाद में  इससे इस आवश्यक पद को छूट दी गई और तमाम काट छांट करके इसे अंततः पास करा लिया गया ।

प्रधान मंत्री के पद को लोकपाल के दायरे से 1971 में बाहर किया गया था ।

मजेदार बात यह है कि इसके बाद 1977 में और फिर 1985 में प्रधान मंत्री पद को इसके दायरे में लिया गया ।

1989 में वीपी सिंह के कार्यकाल में इसमें वर्तमान तथा निवर्तमान प्रधान मंत्री को शामिल कर लिया गया ।

1996 में HDदेव गौडा के काल में और 1998 तथा 2001 में बाजपेयी सरकार के समय भी इसमें प्रधान मंत्री को शामिल किया गया था ।

हां ध्यान देना तब इसमें नौकरशाह शामिल नहीं थे ।2002 में वेंकट चेलैया आयोग ने संविधान समीक्षा आयोग में लोकपाल आयुक्त की जरूरत पर बल दिया था ।

2005 में दूसरा प्रशासनिक सुधार आयोग वीरप्पा मोइली के नेतृत्व में बना था ।

इसने भी लोकपाल की जरूरत बताई थी ।2011 में प्रणव मुखर्जी के नेतृत्व में मंत्रियों के समूह ने भी इसकी जरूरत बताई थी ।

और इस तरह भारत में पास हुआ लोक पाल 

करीब साढे चार दशक और 8 नाकाम प्रयासों के बाद 17 दिसम्बर 2013 को राज्य सभा में ,

तो 18 दिसम्बर 2013 को लोक सभा में लोकपाल विधेयक पास हुआ था ।

इसे राष्ट्र पति की स्वीकृति भी मिलने में देर नहीं लगी ।

इस तरह भारत में लोकपाल विधेयक के पास होने में कुल समय जो लगा वह है 45 वर्ष 7माह 9 दिन ।

भारत में लोकपाल विधेयक की प्रारंभिक तिथि है 9 मई 1968 तो अंतिम तिथि है 18 दिसम्बर 2013 ।

इसके पक्ष में सभी दल थे ,

केवल  समाजवादी पार्टी और शिवसेना को छोड़कर ।

हां आम आदमी पार्टी रूठी थी ।

हिम्मत

धन्यवाद

के पी सिंह किर्तीखेड़ा 23032019

 

About KPSINGH

मैने बचपन से निकल कर जीवन की राहों में आने के बाद सिर्फ यही सीखा है कि "जंग जारी रहनी चाहिए जीत मिले या सीख दोनों अनमोल हैं" मैं परास्नातक समाज शास्त्र की डिग्री लेने के अलावा CTET और UP TET परीक्षाएं पास की हैं ।मैंने देश के हिन्दी राष्ट्रीय समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में लेखन किया है जैसे प्रतियोगिता दर्पण विज्ञान प्रगति आदि ।

View all posts by KPSINGH →

7 Comments on “भारत में लोकपाल का इतिहास और वर्तमान”

  1. लोकपाल की जानकारी पाकर बहुत ही सन्तुष्टि महसूस हो रही है। काफी प्रयास के बाद कामयाबी तो मिली। परन्तु आम जनता को इसका फायदा कब मिलने लगेगा।

  2. कागजी लोकपाल बिल से क्या होने वाला है क्योंकि वह तो निर्जीव है। आपरेटर तो हल्लातंत्र करेगा

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *