ज्वार-भाटा क्या होता है Jwar-Bhata Kya Hota Hai

ज्वार-भाटा क्या होता है Jwar-Bhata Kya Hota Hai

ज्वार-भाटा क्या होता है, दोस्तों, जैसा कि आप लोग जानते हैं कि हमारी धरती का 71 फ़ीसदी हिस्सा समुद्र से घिरा हुआ है ।

और लगभग 29 फ़ीसदी हिस्से पर ही थलचर जीव रहते हैं ।

 दोस्तों, क्या आपने कभी गौर किया है कि नदियों और तालाबों का पानी स्थिर क्यों रहता है ।

और समुंद्र में हमेशा हलचल क्यों बनी रहती है । अगर आपने ऐसा नहीं किया है,

तो एक बार अवश्य देखें कि नदियों का और तालाबों का पानी हमेशा सामान्य स्थिति में बना रहता है ।

जबकि समुंद्र में हमेशा लहरें उठती रहती हैं । जी हां दोस्तों समुद्र में उठती और गिरती लहरों को ही ज्वार-भाटा का नाम दिया गया है ।

तो आइए हम जानते हैं कि ज्वार और भाटा क्या होता है ?

ज्वार –

आपने देखा होगा कि सागर में छोटी-छोटी और बड़ी-बड़ी लहरें बनती रहती हैं ।

इन छोटी-बड़ी लहरों का उफान मारकर आगे बढ़ना ही ज्वार कहलाता है ।

भाटा –

जब ज्वार आता है तो समुद्र का पानी तेजी से आगे बढ़ता है और आगे बढ़कर ये फिर से पीछे वापस जाता है ।

इसी को भाटा कहा जाता है । यानि ज्वार का पीछे लौटना भाटा कहलाता है ।

क्यों आता है ज्वार-भाटा –

पृथ्वी पर ज्वार-भाटा आने का कारण सूर्य और चंद्रमा हैं ।

चुकि प्रत्येक खगोलीय पिण्डों में अपनी गुरुत्वाकर्षण शक्ति होती है ।

तथा ये ब्रह्माण्ड के प्रत्येक तत्व को अपनी तरफ खींचते हैं ।

अतः जब पृथ्वी पर सूर्य और चंद्रमा का गुरुत्वाकर्षण बल पड़ता है ।

तो यहां के समुन्द्र का पानी उनके गुरुत्वाकर्षण बल के कारण ऊपर की तरफ उठता है जिस कारण समुद्र में ज्वार आता है ।

तथा पृथ्वी का अपना  गुरुत्वाकर्षण बल उस ज्वार को अपनी तरफ खिंच लेता है तो इसे भाटा कहते हैं ।

न्यूनतम ज्वार-भाटा –

चंद्रमा, महीने में लगभग 28 दिन सूर्य और पृथ्वी के अगल-बगल

अर्थात सूर्य और पृथ्वी के सीध में चंद्रमा नहीं रहता है ।

अतः इनका  गुरुत्वाकर्षण बल अलग-अलग लगता है । जिस कारण ज्वार-भाटा अपने न्यूनतम स्तर पर होता है ।

नोट – सामान्यतः ज्वार प्रतिदिन दो बार आता है ।

एक बार चंद्रमा के आकर्षण से और दूसरी बार पृथ्वी के अपकेंद्रीय बल के कारण ।

वृहद ज्वार-भाटा –

ज्वार-भाटा उस समय वृहद् रूप में आता है जब चन्द्रमा, सूर्य और पृथ्वी तीनों एक सीध में हों ।

महत्वपूर्ण बातें –

1 – चंद्रमा का ज्वार उत्पादक बल सूर्य के अपेक्षा दोगुना होता है ।

क्योंकि यह सूर्य की तुलना में पृथ्वी के काफी नजदीक है ।

2 – अमावस्या और पूर्णिमा के दिन चंद्रमा, सूर्य और पृथ्वी एक सीध में होते हैं ।

अतः इस दिन अधिकतम ज्वार उत्पन्न होता रहता है ।

3 – पृथ्वी के प्रत्येक स्थान पर प्रतिदिन 12 घंटे और 26 मिनट के बाद ज्वार

और ज्वार के 6 घंटे 13 मिनट के बाद भाटा आता है ।

4 – इंग्लैंड के दक्षिणी तट पर साउथहैंपटन में प्रतिदिन चार बार ज्वार आता है ।

5- ज्वार का असर पृथ्वी के हर जगह होता है परंतु

समुद्र में तरल पानी की वजह से इसका असर हमें अच्छी तरह दिखाई देता है ।

दोस्तों, यह जानकारी यदि आपको अच्छी लगी हो तो इसे शेयर जरूर करें ।

धन्यवाद ।

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