भारतीय संविधान में अनुसूचित जाति तथा जनजाति

 

भारत के संविधान में एससीएसटी 

भारत के संविधान में अनुसूचित जाति औरअनुसूचित

जनजाति के संदर्भ में कुछ विशेष प्रावधान हैं।

जिनका यहां वर्णन किया जाना है ।

ऐसा इसलिए क्योंकि मुझे इस लेख के माध्यम से,

आप तक यह बात पहुंचानी है कि भारत के संविधान में” सब समान” 

 होने के बाद भी कुछ को विशेष क्यों बनाया गया है ?

यह कितना उचित है?

कितना अनुचित है यह हमारी बहस का मुद्दा नहीं है ।

इस लिए हम इस पर विचार नहीं  करेंगे ।

हमारा असली मुद्दा यह है कि हमें यह जानना है कि भारत के संविधान में ,

अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए ,

क्या-क्या विशेष प्रावधान रखे गए हैं ।

यहां यह स्पष्ट कर देना बेहद जरूरी है कि यह आवश्यक विभेद,

इसलिए किया गया है भारत के संविधान द्वारा ,

ताकि इस वर्ग के लोगों को सामाजिक तथा आर्थिक के साथ-साथ ,

शैक्षिक तथा राजनीतिक संरक्षण प्रदान किया जा सके ।

और इनके विकास के लिए वातावरण विकसित किया जा सके ।

भारतीय संविधान में अनुसूचित जाति तथा

जनजाति संबंधी प्रावधान क्या हैं? 

इसकी पड़ताल करना ही इस पोस्ट का लक्ष्य है । 

अनुसूचित जाति किसे कहते हैं?

भारतीय संविधान में अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति। 

भारत में जितनी भी अनुसूचित जातियां हैं  इन्हें

अस्पृश्य जाति भी कहा जाता है ।

अतः इनकी परिभाषा अस्पृश्यता के आधार पर की गई है ।

साधारणतया अनुसूचित जाति का अर्थ उन

जातियों से लगाया जाता है ,

जिन्हें धार्मिक, सामाजिक, आर्थिक, और

राजनीतिक  सुविधाएं दिलाने के लिए ,

जिनका उल्लेख संविधान की अनुसूची में किया गया है ।

इन्हें अछूत जातियां, दलित वर्ग, बाहरी जातियां और हरिजन आदि नामों से जाना जाता है ।

अनुसूचित जातियों को ऐसी जातियों के रूप में परिभाषित किया गया है जो ,

घृणित पेशों के द्वारा अपनी आजीविका अर्जित करती हैं ।

लेकिन ध्यान दें अस्पृश्यता के निर्धारण का यह सर्वमान्य आधार नहीं है ।

क्योंकि कुछ ऐसी भी जातियां संविधान में  सूचीबद्ध हैं ,

जो घृणित पेशे से अलग हैं ,लेकिन फिर भी उन्हें ,

संविधान की दृष्टि में अनुसूचित जाति माना जाता है ।

इस संबंध में डाक्टर के एन शर्मा ने लिखा है कि

“अस्पृश्य जातियां वे हैं जिनके स्पर्श से एक व्यक्ति

अपवित्र हो जाए और उसे पवित्र होने के लिए कुछ कृत्य करने पड़ें।”

अनुसूचित जाति किसे कहते हैं ?इस विषय में जे

एच हट्टन का वर्णन इस प्रकार है,

●अस्पृश्य वे हैं जो ब्राह्मणों की सेवा प्राप्त करने के अयोग्य हों

●  सवर्ण हिन्दुओं की सेवा करने वाले नाई,

कहार, दर्जी की भी सेवा से वंचित हों ।

●हिन्दू मंदिरों में प्रवेश के अयोग्य हों, पाठशाला

, सड़क, कुआ, तालाब को प्रयोग करने के काबिल न हों,

वही अस्पृश्य या अनुसूचित जाति हैं ।

जहां तक मेरा अपना विचार है मैं  यह सब नहीं मानता ।

अनुसूचित जाति शब्द भारत में पहली बार

साइमन कमीशन द्वारा 1927 में प्रयोग किया गया था ।

इसके बाद इस शब्द का प्रयोग 1931 की राष्ट्रीय जनगणना में किया गया था ।

विदित हो कि अनुसूचित जातियों की संपत्ति

निर्योगयता से दुखी होकर ही विनोबा भावे ने भूदान आन्दोलन चलाया था ।

जो सच में किसी समस्या का समाधान नहीं ब समस्या का ही समर्थन था ।

अनुसूचित जनजाति किसे कहते हैं?

अनुसूचित जनजाति उन जनजातियों को कहा जाता है ,

जो संविधान में सूचीबद्ध हैं।

विभिन्न जनजातियों के भारतीय संविधान में

अनुसूचित होने के बाद भी जनजाति किसे कहा जाए ?

यह अभी तक विवाद का विषय है ।

कहने का मतलब यह है कि भारतीय संविधान में सूचीबद्ध होने के बाद भी

“जनजाति शब्द की न तो कोई सर्वमान्य परिभाषा है ,

और न ही कोई निश्चित आधार है कि जनजाति ,किसे कहें और किसे न कहें?

“रेडक्लिफ ब्राउन, इवान प्रिचारड तथा नाडेल

जैसे ब्रिटिश मानव शास्त्रियों ने

सर्वप्रथम जनजाति का प्रयोग एक ऐसे समूह के लिए किया था ,

जिसकी एक विशिष्ट एवं सामान्य से हटकर जीवनशैली थी ।

इनके निवास का एक निश्चित दायरा था

तथा वे एक स्वशासी राजनीतिक समूह के रूप में संगठित थे ।

एक सर्वमान्य परिभाषा के अभाव के कारण ही संसार के विभिन्न भूभाग में रहने वाले ,

कुछ जन समूहों को उनके कुछ विशिष्ट शारीरिक,

सांस्कृतिक, भौतिक विशेषताओं के  आधार पर ,

उन्हें जनजाति के रूप में चिन्हित किया जाता है ।

भारत में जनजाति उन्हें कहा जाता है जो:

●समाज में सभ्य कहे जाने वाले जनसमूह से दूर

मुख्यतः पठारी, पहाड़ी भूभाग के वन आच्छादित क्षेत्रों में निवास करते हैं ।

●जो आत्मा वाद जैसे आदिम धर्म को मानते हैं ।



●जिनकी जीविका किसी आदिम व्यवसाय पर आधारित हो ।

जैसे शिकार करना या फल फूल आदि का संकलन करना ।

●प्राचीन भाषा समूह के किसी ,

आदिम स्वरूप का जो इस्तेमाल करते हैं,

वे आदिम या जनजाति कहलाते हैं।

भारत के संविधान में क्या हैं विशेष प्रावधान?


भारतीय संविधान में अनुसूचित जाति तथा

जनजाति के लिए एक नहीं ,

अनेक विशेष प्रावधान किए गए हैं जो निम्नलिखित हैं :

●जहां तक भारत के संविधान मे अनुसूचित जाति के लिए,

●निर्धारित प्रावधान की बात है तो

●सबसे पहले भारतीय संविधान के अनुच्छेद 46 का वर्णन जरूरी है ।

●इसमें अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति

दोनों की शिक्षा तथा  आर्थिक हितों की रक्षा के प्रावधान हैं ।

●अनुच्छेद 330 एवं 332 में क्रमश लोक सभा तथा विधान सभा में ,

खास इनके लिए सीटों की आरक्षण संबंधी व्यवस्था है ।

●भारतीय संविधान के अनुच्छेद 335 के अनुसार इन्हें ,

यानी अनुसूचित जाति और जनजाति

दोनों को संघ तथा राज्य नियुक्तियों में नौकरी में आरक्षण का प्रावधान है ।

●भारतीय संविधान के अनुच्छेद 146 तथा 338 के अनुसार,

●अनुसूचित जातियों के कल्याण एवं हितों की रक्षा के लिए ,

●राज्य में सलाहकार परिषदों एवं पृथक पृथक विभागों की

स्थापना के गठन का प्रावधान है ।

●भारतीय संविधान द्वारा अनुसूचित जाति  तथा जनजाति

के कल्याण के लिए चलाए जा रहे ,

●कुछ विशेष प्रावधानों के कारण ही आज लोकसभा में ,

●कुल 543 सीटों में 79 तथा विधान सभा की कुल 4047 सीटों में से 557

सीटों पर अनुसूचित जाति को आरक्षण प्राप्त है ।

●वहीं अनुसूचित जनजाति के लिए यह आंकड़ा इस प्रकार है :

●लोक सभा के लिए 41 सीट तथा विधान सभा के लिए 527 सीटों के आरक्षण का प्रावधान है ।

SC&ST एक्ट और वर्तमान बहस 


इसकी वर्तमान बहस का कारण यही एस सी एस टी एक्ट है ,

जो वास्तव में इस बहस की भंवर में फंस गया है कि इसे बदला जाए या वही पुराना ही रखा जाए?

कुछ लोग इसमें परिवर्तन चाहते हैं क्योंकि उनका मानना है कि इसका बेहद दुरुपयोग हुआ है ।

कुछ लोग इस परिवर्तन की इच्छा और इसके कारण को ही गहरी साजिश बता रहे हैं ।

मेरे हिसाब से यह विरोध करने वाले तथा समर्थन करने वाले,

दोनों सही नहीं हैं ,क्योंकि इनके दोनों के तर्क,

सार्वभौमिक से कहीं ज्यादा व्यक्तिगत निष्कर्ष प्रतीत होते हैं ।

धन्यवाद

के पी सिंह किर्तीखेड़ा 25032018

 

About KPSINGH

मैने बचपन से निकल कर जीवन की राहों में आने के बाद सिर्फ यही सीखा है कि "जंग जारी रहनी चाहिए जीत मिले या सीख दोनों अनमोल हैं" मैं परास्नातक समाज शास्त्र की डिग्री लेने के अलावा CTET और UP TET परीक्षाएं पास की हैं ।मैंने देश के हिन्दी राष्ट्रीय समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में लेखन किया है जैसे प्रतियोगिता दर्पण विज्ञान प्रगति आदि ।

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11 Comments on “भारतीय संविधान में अनुसूचित जाति तथा जनजाति”

    1. अगर हम बात सर्व समाज की करें तो बेहद अच्छा है
      यहां मेरे लेख का अर्थ मेरी कोई विचारधारा का प्रदर्शन करना नहीं
      संविधान में जो लिखा है उसे बताना मात्र है
      धन्यवाद

  1. संविधान भारत का मूलमंत्र है जो डॉक्टर बी आर अम्बेडकर की देन है जय भीम जय भारत जय संविधान

  2. हमें भारतीय सविधान का सम्मान करना चाहिए क्योंकि हमारा भारत बर्ष का आधार डॉ भीमराव अंबेडकर जी द्वारा लिखित संविधान है
    जय भीम जय भारत जय संबिधान

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