समाज शास्त्र क्या है आओ जानें

समाज शास्त्र क्या है          आओ जानें 

 

समाज शास्त्र क्या है आओ जानें, अर्थात इस विषय का क्या मतलब है?

इसका क्या अर्थ है ?

यदि आपको जानना है और आने वाले समय में समाज शास्त्र जैसे ,

विषय की परीक्षा देकर उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड द्वारा ,

संचालित प्रवक्ता परीक्षा पास करना चाहते हैं तो  बनें रहें मेरे साथ ।

अगर आप धैर्य के साथ इस पूरे लेख को पढते हैं तो यह निश्चित है कि ,

आपके मन के कई सवाल  खुद ब खुद हल  हो जाएंगे ।

इतना ही नहीं ,समाज शास्त्र विषय का परिचय प्राप्त  होने के साथ-साथ ,

आपको इस अपनी तरह की खास  पोस्ट में यह विश्वास भी प्राप्त होगा,

कि आप भी इस परीक्षा को सफलता से पास कर सकते हैं ।

एक बात का ध्यान रखें एक नकली और फर्जी लेखक  भी प्रवक्ता परीक्षा पर कलम घिस रहा है इसी मंच पर ।

इसकी मूर्खता का प्रमाण यह है कि इसके अनुसार प्रवक्ता परीक्षा के प्रश्न पत्र में 150 प्रश्न होते हैं,

जबकि  आप जानते हैं की इस परीक्षा में केवल 125 प्रश्न होते हैं ।

उसकी दूसरी मूर्खता का प्रमाण यह है कि वह कहता है ,इसमें 30 सवाल GK  के आते हैं।

जबकि इसमें सभी सवाल समाज शास्त्र के ही होते हैं ।

उसकी तीसरी मूर्खता यह है कि उसके अनुसार बी एड, एमएड आदि ,

योग्यता धारियों को पांच प्रतिशत अंक मिलेंगे ।

कुल मिलाकर आप फर्जी और नकली प्रवक्ता लेखकों से बचे रहें तो अच्छा है ।

आइए अब करते हैं, मुद्दे की बात और जानते हैं समाज शास्त्र का अर्थ 

समाज शास्त्र का अर्थ 

समाज शास्त्र अन्य सामाजिक विज्ञानो की तुलना में  एक नवीन विधा है ।

समाज शास्त्र को अंग्रेजी में सोशियोलाजी  कहते हैं ।

यह सोशियोलाजी शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है ।

यानी यह सोशियस तथा लोगस के मेल से बना है ।

सोशियस शब्द लैटिन भाषा का है तो लोगस ग्रीक भाषा से लिया गया है ।

सोशियश का अर्थ समाज तथा लोगस का अर्थ है शास्त्र ।

अतः समाज शास्त्र का शाब्दिक अर्थ है समाज का शास्त्र या समाज का विज्ञान ।

समाज शास्त्र की परिभाषा 

आगस्ट काम्टे दुनिया के प्रथम व्यक्ति थे जिन्होंने 1838 में इस नवीन शास्त्र को समाज शास्त्र नाम दिया ।

इसीलिए काम्टे को समाज शास्त्र का जनक कहा जाता है ।

समाज शास्त्र में काम्टे के बाद दुरखीम,स्पेंसर, तथा मैक्स वेबर के नाम भी विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं ।

ध्यान देने की बात है कि जान स्टुअर्ट मिल ने समाज शास्त्र की जगह ,

इसका नाम इथोलाजी रखने का सुझाव दिया था ।

उनका मानना था कि चूंकि समाज शास्त्र का जन्म अलग अलग भाषाओं से हुआ है अतःयह अवैध संतान की तरह है ।

लेकिन सत्य यह है कि अधिकांश विद्वानों ने इनके सुझाव को भाव नहीं दिया ।

दोस्तों आगे की कहानी यह है कि 19 वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में हर्बट स्पेंसर ने समाज का क्रमबद्ध अध्ययन किया ,

और इसका विवरण अपनी किताब सोशियोलाजी में दिया है ।

समाज शास्त्र की परिभाषा को हम निम्न लिखित भागों में बांट सकते हैं ।

●समाज शास्त्र का समाज के रूप में अध्ययन करने वाले ।इसके अंतर्गत गिडिंगस ,समनर,वार्ड, ओडम आते हैं ।

●गिडिंगस के अनुसार “समाज शास्त्र समग्र रूप से समाज का व्यवस्थित वर्णन और उसकी व्याख्या है। ”

●समाज शास्त्र सामाजिक  संबंधों के अध्ययन विज्ञान के रूप में ।

मैकाइवर एंड पेज, कयूबर ,मैक्स वेबर, वान वीज,आर नोल्ड,एम रोज आदि ।

●मैकाइवर एंड पेज के अनुसार  सामाजिक संबंधों के जाल को समाज कहते हैं,

तथा उसके अध्ययन को समाज शास्त्र कहते हैं।

●समाज शास्त्र समूहों के अध्ययन के रूप में नोबस ,हाइन,फ्लेमिंग, सिमेल,एवं जानसन ।

●सिमेल के अनुसार समाज शास्त्र सामाजिक समूहों का विज्ञान है,

●सामाजिक समूह सामने अतः क्रियाओं की ही एक व्यवस्था है ।

●समाज शास्त्र सामाजिक अंतः क्रियाओं के अध्ययन के रूप में ।गिलिन एवं गिलिन ,गिनस वर्ग ,जार्ज सिमेल आदि ।

●गिलिन एवं गिलिन के अनुसार व्यक्तियों के एक दूसरे के सम्पर्क में आने के फलस्वरूप उत्पन्न होने वाली ,

अंतः क्रियाओं के अध्ययन को ही समाज शास्त्र कहा जा सकता है ।

●गिनस बर्ग के अनुसार “समाज शास्त्र मानवीय अंतः क्रियाओं तथा ,

●अंतः संबंधी उनके कारणों और परिणामों  का अध्ययन है।

●समाज शास्त्र में सामाजिक  अंतः क्रियाओं का अध्ययन होता है ।

●अंतः क्रियाओं का अर्थ है दो या दो से अधिक व्यक्तियों या समूहों का ,

●चेतन अवस्था में एक-दूसरेके सम्पर्क में आना और एक दूसरे के व्यवहारों को प्रभावित करना ।

●सामाजिक  अंतः क्रिया तीन प्रकार की होती हैं ।

व्यक्ति और व्यक्ति के बीच

व्यक्ति और समूह के बीच

समूह और समूह के बीच

●सामाजिक संबंधों के निर्माण की प्रमुख क्रिया ही अंतः क्रिया है ।

●यही कारण है कि समाज शास्त्र को सामाजिक अंतः क्रियाओं का विज्ञान भी माना जाता है ।

 

■By KPSINGH■

        16042018 

 

 

 

 

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About kpsingh

मैने बचपन से निकल कर जीवन की राहों में आने के बाद सिर्फ यही सीखा है कि "जंग जारी रहनी चाहिए जीत मिले या सीख दोनों अनमोल हैं" मैं परास्नातक समाज शास्त्र की डिग्री लेने के अलावा CTET और UP TET परीक्षाएं पास की हैं ।मैंने देश के हिन्दी राष्ट्रीय समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में लेखन किया है जैसे प्रतियोगिता दर्पण विज्ञान प्रगति आदि ।

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