ज्ञानी जैल सिंह,भारत के पूर्व(सातवें) राष्ट्रपति।

ज्ञानी जैल सिंह,भारत के पूर्व(सातवें)राष्ट्रपति।

 

 

ज्ञानी जैल सिंह :- ज्ञानी जैल सिंह,भारत के पूर्व राष्ट्रपति,जी हाँ दोस्तो आज हम इनकेे बारे में कुछ चर्चा करना चाहेंंगे। भारत
के सातवें राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह नेेहरू गाँधी परिवार के प्रमुुुख समर्थकों में से एक थे। इस कारण इन्हेें कई बार आलोचना
का शिकार होना पडा़। इन अच्छेे सम्बन्धों के कारण ही इन्होंने कम समय में ही बुलंदियों को छूू लिया था। राष्ट्रपति बनने से
पहले ये भारतीय राष्ट्रीय कांंग्रेेेस पार्टी के कद्दावर नेताओं मेें से एक थे। ये कई पदों पर विराजमान भी रहे, जिसमें गृहमंंत्री पद
भी शामिल है। इनका राष्ट्रपतित्वकाल सन् 1982 से 1987 के बीच रहा। तो चलिए इनकेे बारे में और जानकारी लेने की
कोशिश करतेे हैं।

 

प्रारंभिक जीवन एवं शिक्षा :-

(1) ज्ञानी जैल सिंंह का जन्म गाँव सन्धवान,जिला फरीदकोट (पंजाब) मेें 5  सन् 1916 को हुआ था।
(2) जरनैैैल सिंह व जेल सिंह इनके ही उपनाम थे।
(3) इनके पिता का नाम किसान सिंह जो कि एक कृषक व कारपेंटर थे।
(4) इनकी माता का नाम इंद कौर था,जो कि इनको बचपन में छोड़कर चल बसीं।
(5) पढा़ई मेें लगाव न होने के कारण ये प्रारंभिक शिक्षा भी पूूरी न कर पाए।
(6) इन्हें उर्दू भाषा का विशेष ज्ञान था।
(7) पिता से आज्ञा मिलने पर इन्होंने  गुरुद्वारा मेें भजन कीर्तन करना शुरू कर दिया।
(8) शहीद सिख मिशनरीज कालेेेज, अमृतसर से गुरुुग्रंथ का पाठ सीखकर ये गुुुुरुग्रंथ साहिब के व्यावसायिक वाचक बन
       गए।
(9) यहीं से इन्हेें ज्ञानी की उपाधि प्राप्त हुुुई।

 

इनसे जुडे़ महत्वपूर्ण तथ्य :-

(1) मात्र 15 वर्ष की उम्र में ये अकाली दल के सदस्य चुने गए।
(2) इनके द्वारा सन् 1938 में प्रजा नामक एक पार्टी का गठन किया गया।
(3) ब्रिटिश विरोधी गतिविधियों के कारण इन्हेें पाँच वर्ष जेल मेंं रहना पडा़।
(4) स्वतंत्रता सेे पूर्व ज्ञानी जैैैैल सिंह ने देश में संचालित कई आंदोलनों में भागेदारी भी की।
(5) सन् 1946 में फरीदकोट मेेंं एक कार्यक्रम के दौरान पं० जवाहर लाल नेहरू ने इनकी शक्ति व योग्यता को पहचानकर
      अपनी पार्टी में शामिल कर लिया।
(6) स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात ये पटियाला व पूूूर्वी राज्यों के संघ के राजस्व मंंत्री बने।

 

 

 

(7) सन्1951 में ये राज्य के कृषि मंत्री बनेे।
(8) ज्ञानी जैल सिंह सन् 1956 से 1962 तक राज्य सभा के सदस्य मनोनीत किये गए।
(9) इसी बीच प्रधानमंत्री सेे सम्बन्ध मधुर होने के कारण इन्हेें सन् 1972 में पंजाब का मुख्यमंत्री नियुक्त किया गया।
(10) सन् 1980 में लोकसभा की सीट जीतने के बाद इन्हेें देश का गृृहमंत्री नियुक्त किया गया।
(11) सन् 1982 में राष्ट्रपति नीलम संजीव रेेेड्डडी केे कार्यकाल की समाप्ति के बाद 25 जुलाई सन् 1982 को इन्हेें
          राष्ट्रपति मनोनीत किया गया।
(12) इनके कार्यकाल में कुछ प्रमुख घटनाएँ घटीं, जैसेे :- अमृृतसर के स्वर्ण मंदिर में आपरेशन ब्लू स्टार, प्रधानमंत्री इंदिरा
          गाँधी की निर्मम हत्या, इनकी हत्या के विरोध मेें सिखों पर हुुुए अत्याचार इत्यादि।

 

 

 
(13) 25 जुलाई सन् 1987 को इनका कार्यकाल पूरा हुआ।
(14) इन्हें अपने धर्म से विशेेष लगाव था।
(15) इसी उद्देेेश्य हेतु , 29 नवम्बर सन् 1994 में तख्त श्री केेेशगढ़ साहिब जाने के दौरान रोपर जिले के कितारपुर के पास
         इनकी कार का ट्रक से एक्सीडेंट हो गया।
(16) उपचार के दौरान 25 दिसम्बर सन् 1994 को चंडीगढ़ मेें इनका निधन हो गया।
(17) दिल्ली में ज्ञानी जैल सिंह का जहाँ अंतिम संस्कार हुआ, उस स्थान को एकता स्थल के नाम से जाना जाता हैै।
(18) सन् 1995 में भारतीय डाक विभाग द्वारा इनकी सृमति मेें एक डाक टिकट भी जारी किया गया।
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                                                                                                                                                                      धन्यवाद

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