मोतीलाल नेहरू,प्रमुख स्वतंत्रता संग्राम सेनानी।

मोती लाल नेहरू,प्रमुख स्वतंत्रता संग्राम सेनानी।

 

 

मोतीलाल नेेेहरू :- मोतीलाल नेेेहरू प्रमुख  स्वतंत्रता संंग्राम सेनानी ,जी हाँ दोस्तो आज हम इनके बारे में जानकारी साझा
करना चाहेंंगे। देश के बुद्धिमान वकीलोंं में से एक मोतीलाल नेेेहरू के नाम से कौन परिचित नहीं हैै ? स्वराज पार्टी की
स्थापना करने वाले ,दो बार कांंग्रेेेस पार्टी के अध्यक्ष चुुुने जाने वाले इस महान व्यक्तित्व के बारे में आज कुछ और जानकारी
लेने की कोशिश करते हैं। तो चलिए शुरू करते हैं।

 

 

 

प्रारंभिक जीवन एवं शिक्षा :-

(1) इनका जन्म 6 मई सन् 1862 को आगरा,उ०प्र० मेें हुुआ था।
(2) इनका पूरा नाम पं० मोतीलाल नेहरू था।
(3) इनके पिता पं० गंगाधर नेहरू, जो कि दिल्ली शहर मेें कोतवाल थे।
(4) इनकी माँ का नाम श्रीमती जीवरानी था।
(5) सन् 1857 की क्रान्ति के समय इनके पिता दिल्ली छोड़कर आगरा मेें आकर बस गए।
(6) इनके पिता का देेहान्त इनके जन्म से पूर्व 34 वर्ष की उम्र में सन् 1861 में हो गया।
(7) पं० गंगाधर नेहरू के तीन पुत्र थे।
(8) इनके बडे़ पुुत्र बंंसीधर नेेहरू महारानी विक्टोरिया के शासन में न्याय विभाग मेंं नौकरी करते थे।

 

 

(9) इनसे छोटे पुुत्र पं नंंदलाल नेेेहरू खेेेतडी़, राजस्थान में दीवान के पद पर थे।
(10) पिता की मृत्यु के बाद पं० नंदलाल नेहरू आगरा आ गए और यहीं वकालत करना शुरू कर दिया।
(11) इन्होंने ही अपने छोटे भाई पं० मोतीलाल नेहरू के लालन-पालन व पढा़ने की जिम्मेदारी संभाली।
(12) बार-बार इलाहाबाद हाईकोर्ट जाने की वजह सेे नंदलाल नेेहरू ने इलाहाबाद में एक मकान भी ले लिया।
(13) मोतीलाल की उम्र जब 25 वर्ष थी, तभी इनके भाई नंदलाल नेहरू का निधन हो गया।
(14) प्रारंभ मेंं पं० मोतीलाल नेहरू को पढा़ई में दिलचस्पी नहीं थी।
(15) इसी कारण इनकी बी०ए० की परीक्षा अधूरी रह गई।
(16) आगे की पढा़ई इन्होंनेे कानपुर और इलाहाबाद में की और कानून की पढा़ई प्रथम श्रेेणी के साथ पूरी की एवं वकालत
        करना शुरू कर दिया।

 

 

इनसे सम्बन्धित और महत्वपूर्ण तथ्य :-

(1) ये पश्चिमी सभ्यता से बहुुुत प्रभावित थे।
(2) उसी के अनुरूप रहन-सहन,वेेशभूषा को अपनाकर खुद को ढाल लिया।
(3) कानून के पेशे को अपनाकर इन्होंने बहुत ऊँँचा मुकाम हासिल कर लिया।
(4) इलाहाबाद मेंं इनकी गिनती सर्वश्रेष्ठ वकीलों में की जाती थी।
(5) सन् 1909 मेंं “प्रिवी कौंंसिल” ग्रेट ब्रिटेन में अपनी कानून की योग्यता दिखाकर कैैैरियर के सर्वोच्च शिखर पर पहुुँचे।
(6) सन्1918 में ये महात्मा गाँधी केे सम्पर्क मेें आए। उनसे प्रभावित होकर पाश्च्चात्य सभ्यता छोड़ गाँधी जी के रंंग-ढंग मेें
       ढल गए।
(7) इनका विवाह स्वरूप रानी के साथ हुआ, जो कि एक कश्म्मीरी ब्राह्मण थीं।

 

 

(8) इलाहाबाद मेंं इन्होंनेे एक घर खरीदा,जिसका नाम आनन्द भवन रखा।
(9) इनकी तीन संतानेें थीं,एक पुत्र और दो पुत्री।
(10) पुत्र का नाम पंं० जवाहर लाल नेहरू, जिनका जन्म सन् 1889 में हुुआ।
(11) एक पुुत्री का नाम विजय लक्ष्मी पंंडित व दूूसरी का नाम कृष्णा हठी सिंंह था।
(12) कानून मेें अच्छी पकड़ होने के कारण ये सन् 1927 मेंं सर्वदलीय सम्मेलन केे सदस्य बने।
(13) इनकी समिति ने एक रिपोर्ट बनाई,जिसेे नेहरू रिपोर्ट कहा जाता हैै।
(14) सन्1910 मेंं ये संंयुक्त प्रांत(उ०प्र०) से विधान सभा के लिए निर्वाचित हुए।

 

(15) ये दो बारअर्थात् सन् 1919 व 1920 में कांग्रेस केे अध्यक्ष भी बनाए गए।
(16) सन् 1923 मेें देशबन्धु चितरंजन दास के साथ मिलकर स्वराज पार्टी का भी गठन किया।
(17) आजादी के समय भारतीयोंं का पक्ष रखने हेतु इनके द्वारा एक अखबार भी चलाया गया,जिसका नाम था,”इंडिपेेंडेेंट
         अखबार”।
(18) देश की आजादी हेतु कई बार जेल जाने वाले इन महान व्यक्ति का 6 फरवरी सन् 1931 को लखनऊ में निधन हो गया।
तो दोस्तो यह जानकारी आपको यदि पसंद आई हो,तो लाइक,कमेंंट व शेयर करना न भूलेेंं।
                                                                                                                                                                             धन्यवाद

8 Comments on “मोतीलाल नेहरू,प्रमुख स्वतंत्रता संग्राम सेनानी।”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *