रावण पूर्वजन्म और पुनर्जन्म में क्या था

रावण पूर्वजन्म और पुनर्जन्म में क्या था

  रावण पूर्वजन्म और पुनर्जन्म में क्या था | रावण अपने समय का परम शक्तिशाली , ज्ञानी ,पंडित राजा था |इसके कुछ बुरे कर्मों की वजह से समय से पहले ही काल का ग्रास बनना पड़ा |
रावण  पूर्वजन्म और पुर्नजन्म में क्या था |इसके बारे में भी पुराणों में एक कथा है |आज इसी कथा को जानेंगें |
बहुत समय पहले सनकादिक नाम के ऋषि हुआ करते थे |ये चार भाई थे – सनक, सनंदन,  सनातन और संत कुमार |ये चारों भाई तेजस्वी और ज्ञानी थे |
एक बार इनके मन में भगवान विष्णु के दर्शन की इच्छा हुई |अपनी इच्छा को पुर्ण करने के लिए ये बैकुण्ठ धाम की ओर चल दिये |
बैकुण्ठ धाम के दरवाजे पर पहुँचने पर द्वारपाल जय और विजय ने उन्हें अन्दर जाने से मना कर दिया |
सनकादिक ऋषियों ने इसे अपना अपमान समझकर क्रोधित हो गये और दोनों द्वारपालों को राक्षस में जन्म लेने का श्राप दे दिया |
श्राप सुनकर द्वारपालों ने क्षमा माँगी |भगवान विष्णु भी द्वारपालों की गलती को माफ करने करने के लिए कहे |
तब सनकादिक ऋषियों ने कहा कि दिया हुआ श्राप तो वापस नहीं लिया जा सकता है, परन्तु इन द्वारपालों को तीन जन्मों तक राक्षस योनि में जन्म लेना पड़ेगा और उसके बाद फिर से ये बैकुण्ठ धाम के द्वारपाल बन पायेंगे |
साथ ही यह शर्त भी लगा दी कि इनकी मुक्ति के लिए स्वयं भगवान विष्णु को अवतार लेकर वध करना पड़ेगा |

रावण का पूर्वजन्म —

श्राप के कारण दोनों द्वारपालों जय और विजय का पहला जन्म हिरण्याक्ष और हिरण्यकश्यप के रुप में हुआ |
हिरण्याक्ष राक्षस एक बार पृथ्वी को उठाकर अपने साथ पाताल लोक ले गया था |
भगवान विष्णु वाराह रुप में अवतार लेकर पाताल में जाकर हिरण्याक्ष के साथ भयंकर युद्ध किये |
भगवान विष्णु हिरण्याक्ष का वध करके पृथ्वी को मुक्त कराये और उसे अपनी जगह स्थापित किये |
 
हिरण्यकश्यप भी एक शक्तिशाली राक्षस था |जब उसे अपने भाई हिरण्याक्ष के वध का समाचार मिला तो वह भगवान विष्णु का दुश्मन बन गया और बदला लेने के लिए ब्रह्मा जी की कठोर तपस्या की |
जब्रह्मा जी को प्रसन्न करके उसने यह वरदान लिया कि उसे न तो मनुष्य और न ही पशु मार सके, न ही अस्त्र से और न ही शस्त्र से मारा जाये, न तो दिन में और न ही रात में कोई मार सके, न तो घर के भीतर और न ही घर के बाहर मर सके, न तो जमीन पर और न ही आसमान पर मारा जाये |

 ब्रह्मा जी से ऐसा वरदान पाकर हिरण्यकश्यप और भी शक्तिशाली और घमंडी हो गया था |
लोगों से अपनी पुजा करवाने लगा और जो भी भगवान विष्णु की अराधना करता उसे मौत की सजा देता था |
परन्तु हिरण्यकश्यप का अपना पुत्र प्रह्लाद बचपन से ही भगवान विष्णु का भक्त था |
हिरण्यकश्यप अपने पुत्र के विद्रोह के कारण कई बार उसे मारने का प्रयास किया, परंतु हर बार भगवान की कृपा से बच जाता |
अंत में भगवान विष्णु हिरण्यकश्यप के अत्याचार रोकने और भक्त प्रह्लाद की रक्षा हेतू नरसिंह अवतार लिये और हिरण्यकश्यप को घर की दहलीज पर अपनी जाँघ पर रखकर सायंकाल में अपने नाखुनों से वध किया |
          
इस प्रकार ब्रह्मा जी के वरदान की भी रक्षा की |

रावण का जन्म —

जय और विजय द्वारपालों का दूसरा जन्म त्रेतायुग में रावण और कुंभकर्ण राक्षस के रुप में हुआ था |दोनों राक्षस अति शक्तिशाली और अत्याचारी थे |
 
तब श्राप के कारण भगवान विष्णु को इनका वध करने के लिए श्रीराम के रुप में अवतार लेना पड़ा |

             

रावण का पुनर्जन्म —-

दोनों द्वारपाल जय और विजय का तीसरा जन्म द्वापर युग में शिशुपाल और दंतवत्र के रुप में हुआ था |इन दोनों का वध करने के लिए भगवान विष्णु ने श्रीकृष्ण का अवतार लिया था |
         
इस प्रकार द्वारपाल जय और विजय सनकादिक ऋषियों को श्राप से मुक्त हो गये और पुनः बैकुण्ठ धाम में द्वारपाल के रुप में स्थापित हो गये |
आपको यह कथा कैसी लगी कमेंटस में जरूर बतायें |यदि अच्छी लगी हो तो इसे लाइक और शेयर भी करें |

आपका ——- प्रमोद कुमार

अन्य रोचक पोस्ट —–
1.  कलयुग की भयानक और कँपा देने वाली भविष्यवाणी
2.  महादेव ने सुदामा का वध क्यों किया
3.  भगवान शिव शेर की खाल क्यों पहनते हैं
4.  माता सीता जीवित निगल गई थी लक्ष्मण को जानिये कब और क्यों
5.  श्रीराम और लक्ष्मण की मृत्यु का रहस्य
6.  सोने की लंका न तो रावण की थी और न ही इसे हनुमान जी ने जलाया था

 

 

 

 

 

3 Comments on “रावण पूर्वजन्म और पुनर्जन्म में क्या था”

  1. दोस्त हिन्दू धर्म कदम कदम पर विवादास्पद है । जैसे यदि रावण महान पण्डित था तो राक्षस कैसे हो सकता है । इत्यादि ।
    But good work.
    ऐसी ही रोचक जानकारियों से अवगत कराते रहना ।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *