इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन

 

   इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग                मशीन

इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन क्या है और यह कैसे काम करती है।

इस लेख में इसी सच्चाई को बताने की कोशिश की गई है।

आशा है आप को यह जानकारी प्रासंगिक और कुछ खास जरुर लगेगी।

इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन की एक गलत खबर

यह है कि इससे किसी तरह का घपला हो सकता है।

कुछ राजनैतिक दलों ने केवल जनता में भ्रम फैलाने के लिए,

इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन की सटीकता पर संदेह जताया है।

जो बिलकुल बकवास है।

हकीकत यह है कि इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन में किए गए सुरक्षा संबंधी,

इंतजाम के साथ साथ इसकी विशिष्ट कार्य क्षमता और इसकी अभेद्यता निर्विवाद, लाजवाब है।

मशीन उत्पादन और प्रारूप 

भारत में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन का   निर्माण

या उत्पादन सार्वजनिक क्षेत्र की केवल दो कंपनी करती हैं।

ये हैं  भारत  इलेक्ट्रॉनिक्स  लिमिटेड  BEL  और

इलेक्ट्रॉनिक्स कार्पोरेशन आफ इंडिया लिमिटेड।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इसके स्रोत कोड

की जानकारी कुछ चुनिंदा इंजीनियरों को ही होती है।

स्रोत कोड को गोपनीय रखने के सारे इंतजाम किए जाते हैं।

इंजीनियरों को भी इस बात की जानकारी नहीं

होती कि कौन सी मशीन किस निर्वाचन क्षेत्र में जाने वाली है।

कि इसका निर्धारण बहुत बाद में किया जाता है। 

ईवीएम में दो इकाई होती हैं 

🔵 नियंत्रण इकाई सीयू को मतदान केंद्र के                    निर्वाचन अधिकारी के पास रखा जाता है।

🔵बैलेट इकाई बीयू का उपयोग मतदाताओं द्वारा        बटन दबा कर वोट डालने के लिए किया जाता        है। 

ईवीएम के दो माडल M1तथा M2, M3

एम 1

ईवीएम के विभिन्न माडलों में प्रमुख हैं M1 M2 व M3।

M1 का प्रचलन देश में 1989 से 2006 के बीच होता रहा है।

अंतिम बार इन मशीनों का प्रयोग 2014 के आम चुनावों में हुआ था।

ध्यान रखें इसके बाद हुए किसी भी चुनाव में M1 ईवीएम मशीन का प्रयोग नहीं किया गया।

वर्तमान में इन ईवीएम मशीनों का स्टॉक 9.2 लाख बीयू और सीयू सहित माना जाता है।

करीब 14 लाख अब तक ये नष्ट की जा चुकी हैं। 

एम 2

एम 2 ईवीएम का उत्पादन वर्ष 2006 से 2012 है।

इनका वर्तमान स्टाक बैलेट इकाई 5.57 लाख तथा नियंत्रण इकाई 5.3 लाख है।

वास्तविक समय वाली घड़ी और गतिशील रूप से

कोडिंग के रूप में दो प्रमुख विशेषताएँ   इनसे जोड़ी गई हैं। 

एम 3

ईवीएम एम 3 का उत्पादन वर्ष 2013 और उस के बाद का है।

जहां तक इनके वर्तमान स्टाक की बात है तो

इसकी बैलेट इकाई 3.4 लाख तथा नियंत्रण इकाई 3.36 लाख है।

किसी भी तरह की छेड़छाड़ की रोकथाम करने वाली इनमें विशेषता जोड़ी गई है।

यह डिवाइस बिना प्राधिकृत अनुमति के इस्तेमाल करने पर कार्य करना बंद कर देती है। 

कुछ खास बातें 

2006 के बाद की सभी ईवीएम में लगाई गई सीयू

सिर्फ कूट और गतिशील रूप से कूट बद्ध आंकड़ों को ही बीयू से ग्रहण करती है।

कोई भी वायरलेस यंत्र इसके साथ संचार या छेड़छाड़ नहीं कर सकता।

क्योंकि इनमें कोई भी रिसीवर या डिकोडर नहीं होता।

हर बार बटन दबाने के समय को अंकित करने के

लिए बीयू के नए संस्करण में वास्तविक समय दर्शाने वाली घड़ी लगाई गई है।

वर्ष 2019 तक भारत में होने वाले अगले आम

चुनाव तक 1395306 बीयू और 930716 सीयू हासिल करने का लक्ष्य रखा गया है। 

ईवीएम की तैनाती और ढुलाई 

🔵  ईवीएम को कहीं भी ले जाने के दौरान उन्हीं सुरक्षा उपायों का पालन किया जाता है,

🔵जो कि RBI द्वारा विभिन्न स्थानों पर नकदी को ले जाने में किया जाता है।

🔵मशीनों को कारखाने से निकालकर सीधा जिला मुख्यालय ले जाते हैं।

🔵बीच में किसी भी जगह या राज्य की राजधानी में इनका भंडारण नहीं किया जाता है।

🔵ईवीएम को जिला निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय स्थित स्ट्रांग रूम में रखा जाता है।

🔵स्ट्रांग रूम में दो ताले लगाए जाते हैं।

🔵जिनमें से एक ताले की चाबी जिला निर्वाचन अधिकारी के पास तथा,

🔵दूसरे ताले की चाबी अतिरिक्त जिला निर्वाचन अधिकारी के पास होती है।

🔵इस स्ट्रांग रूम को खोलने के लिए दोनों चाबी की जरूरत होती है।

🔵ईवीएम को इस्तेमाल से पहले राजनीतिक दलों

के प्रतिनिधियों के सामने,

🔵बीईएल ईसीआईएल के अधिकृत इंजीनियरों द्वारा,

तकनीकी व भौतिक परीक्षण किया जाता है।

इस समय हाल के प्रवेश में पाबंदी लगा दी जाती है।

यहां कैमरा तथा मोबाइल ले जाना वर्जित होता है।

खराब ईवीएम को कारखाने वापस भेज दिया जाता है। 

धन्यवाद
KPSINGH 16052018 

 

 

 

About KPSINGH

मैने बचपन से निकल कर जीवन की राहों में आने के बाद सिर्फ यही सीखा है कि "जंग जारी रहनी चाहिए जीत मिले या सीख दोनों अनमोल हैं" मैं परास्नातक समाज शास्त्र की डिग्री लेने के अलावा CTET और UP TET परीक्षाएं पास की हैं ।मैंने देश के हिन्दी राष्ट्रीय समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में लेखन किया है जैसे प्रतियोगिता दर्पण विज्ञान प्रगति आदि ।

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