रास बिहारी बोस,एक महान क्रांतिकारी नेता।

रास बिहारी बोस ,एक महान क्रांतिकारी नेता।

 

 

रास बिहारी बोस :- जी हाँ दोस्तो आज हम रास बिहारी बोस के बारे मेें कुछ बात करना चाहेेंगे। ये भारत के महान क्रांंतिकारी
नेता थे। अंग्रेेजी शासन के विरुद्ध इनके गदर षड़यंत्र व आजाद हिंंद फौज के गठन में अहम भूमिका रही। इन्होंने भारत में
क्रांंतिकारी गतिविधियाँँ तो संचालित की हीं, साथ में विदेेेश में रहकर भी आजीवन भारत को स्वतंत्र कराने के     लिए भी
प्रयासरत रहे। जापान जाकर इंडियन इंडीपेंडेंस लीग की स्थापना व दिल्ली के तत्कालीन वायसराय लार्ड चार्ल्स हार्डिंग पर
बम फेंकने की योजना बनाने में भी इनका हाथ था। भले ही भारत को आजाद कराने में इनके प्रयास असफल रहेे हों, लेकिन
फिर भी इनकी भूूूमिका को किसी भी तरह से कमतर करके नहीं आंँका जा सकता। तो आइए दोस्तो इनके बारे में और भी
जानकारी हासिल करने की कोशिश करते हैैं।

 

 

इनसे जुुडे़ महत्वपूर्ण तथ्य :-

(1) रास बिहारी बोस का जन्म सुुबालदह गाँव,जिला बर्धमान(बंंगाल) में 25 मई सन् 1886 को हुआ था।
(2) इनके पिता का नाम श्री विनोद बिहारी बोस था।
(3) इनके पिता के चंदन नगर में नियुक्त होनेे की वजह से इनकी प्रारंभिक शिक्षा-दीक्षा   चंदन नगर मेें ही हुई।
(4) इनके मस्तिष्क में हमेेेेशा यही विचार कौंधा करता था कि किस तरह अपने देश को अंग्रेजों की गुलामी की बेेेड़ियों से
      आजाद कराया जाए।

 

 

(5) इस तरह उन्होंने क्रांंतिकारी गतिविधियों में दिलचस्पी दिखाना शुरू कर दिया।
(6) रास बिहारी बोस जब वन अनुसंधान संस्थान, देेेहरादूूून में हैड क्लर्क के पद पर नियुुुक्त थे,तभी इनकी मुुलाकात
      युगान्तर नामक क्रांतिकारी संगठन के एक सदस्य अमरेन्द्र चटर्जी सेे  हुई।
(7) अरविंद घोष ,जो कि बाद मेें इनके राजनीतिक गुरु बने,के सम्पर्क मेें आते ही इनकी क्रांतिकारी गतिविधियाँ प्रारंंभ हो
       गईं।
(8) जैसे ही इनका सम्पर्क जतीन्द्र नाथ बनर्जी से हुआ, इनका संंयुक्त प्रांत(वर्तमान उत्तर प्रदेश) व पंजाब केे मुख्य
      क्रांतिकारियों से भी इनका जुड़ाव हो गया।

 

 

(9) अमरेन्द्र चटर्जी के शिष्य बसंत कुमार विश्वास द्वारा जब दिल्ली के वायसराय लार्ड हार्डिंग पर बम फेेंका गया,तब इस
       मामले में इनकी प्रमुख भूूमिका रही।
(10) इन पर शक हुआ ,अंंग्रेजी पुलिस इनके पीछे पड़ गई,लेकिन रातों ही रात में ये देहरादूून रवाना हो गए और अगले ही
         दिन वाइसराय पर बम फेंकने की निंदा कर यह जता दिया कि इस मामले मेंं इनका हाथ नहीं है।
(11) जतिन मुुुखर्जी से रास बिहारी बोस की मुुलाकात सन् 1913 में बाढ़ राहत कार्य के दौरान हुई।
(12) यह मुलाकात इनमें जोश भरने के लिए काफी थी और अब वे दो गुने उत्साह केे साथ क्रांतिकारी गतिविधियों मेें लिप्त
        हो गए।

 

 

(13) प्रथम विश्व युद्ध के दौरान इनके द्वारा देेेश में गदर फैलाने की योजना बनाई गई। इनका विचार था कि अधिकांश
          अंग्रेजी सेना के भारत के बाहर जाने से देश को अंग्रेजों से मुक्त कराया जा सकता है,लेकिन इनकी यह योजना सफल न            हो सकी।
(14) सन् 1915 में ब्रिटिश पुलिस से बचनेे हेतु जापान के शंघाई शहर पहुँँच गए और अपना नाम राजा पी०एन०टैगोर
         रखकर पुन: देश को आजादी दिलाने हेतु कार्य मेें लिप्त हो गए।
(15) कई बार ब्रिटिश पुलिस जापान सरकार से इनकेे प्रत्यर्पण की माँग करती रही,लेकिन सफल न हो सकी।
(16) जापान में रहकर जापानी भााषा सीखने के बाद लेखन कार्य भी प्रारंंभ कर दिया।

 

 

(17) सन् 1916 में इनका विवाह पैन एशियाई समर्थक सोमा आइजो और सोमा कोत्सुको की पुत्री सेे हो गया। सन् 1923 में
         जापान की नागरिकता भी इनके द्वारा ले ली गई।
(18) जापान के अधिकारियों को ,भारत के आजाद करानेे के समर्थन में लाने में रास बिहारी बोस की अहम भूूमिका रही।
(19) 28 मार्च सन् 1942 को टोकियो में एक सम्मेेेलन बुलाकर इन्हीं के द्वारा इंंडियन इंडीपेेंडेेंस लीग की स्थापना की गई।
(20) सितम्बर 1942 में आई० एन०ए० का गठन ,रास बिहारी बोस की एक सैन्य शाखा के रूप मेें किया गया और सुभाष
          चन्द्र बोस को अध्यक्ष बना दिया गया।

 

 

(21) बाद मेंं किसी कारणवश इस आई० एन० ए० का आजाद हिंद फौज के नाम से सुभाष चन्द्र बोस ने पुनर्गठन किया।
(22) जीवन पर्यंत देश को आजाद कराने के लिए अथक प्रयास करने वाले रास बिहारी बोस का 21 जनवरी सन् 1945 को
         टोकियो,जापान में देेेहान्त हो गया।
(23) मृृत्यु से पूर्व जापान सरकार द्वारा इन्हें “आर्डर ऑफ राइजिंग सन” का पुरस्कार देेेकर सम्मानित किया गया।
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                                                                                                                                                             धन्यवाद

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