तथ्यों के आइने में भारत में पर्यावरण कानून

 

तथ्यों के आइने में भारत में पर्यावरण कानून

तथ्यों के आइने में भारत में पर्यावरण कानून नाम के इस लेख में हम आपको,

यह बताने की कोशिश करेंगे कि पर्यावरण संरक्षण के लिए,

भारत में कौन कौन से महत्वपूर्ण कानून हैं, जिन्हें

हम सबको न केवल,

पालन करना चाहिए बल्कि हमें हर व्यक्ति को इस के लिए प्रेरित करना चाहिए।

तो आइये दोस्तों चलते हैं तथ्यों की दुनिया में कुछ इस तरह :

 ⚙भारत में पर्यावरण संरक्षण के लिए पहला प्रयास अंग्रेजी सरकार ने 1912 में किया था।

⚙जब उसने वन्य जीव एवं जंतु संरक्षण नियम बनाया था।

⚙भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21में पर्यावरण स्वच्छता का अधिकार शामिल किया गया है।

⚙आजादी के बाद भारत में प्रथम पंच वर्षीय योजना  के काल से पर्यावरण संरक्षण शुरू है।

⚙भारत में वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 को मील का पत्थर माना जाता है।

⚙भारत सरकार द्वारा 1972 में बनाया वन्यजीव संरक्षण अधिनियम,

स्टाक होम कान्फ्रेंस के उद्देश्यों की पूर्ति के लिए था।

⚙वन्य जीवों की रक्षा, अवैध तस्करी पर रोक,

वनोंत्पाद का अवैध कारोबार को बंद करना ही इस अधिनियम का मूल है।

⚙जनवरी 2003 में इस अधिनियम को संशोधित किया गया था।

⚙संशोधन के बाद इसका नाम भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 2002 रखा गया है।

⚙इसमें दंड तथा जुर्माना के प्रावधान को कठोर किया गया है।

⚙यह अधिनियम जंगली जानवरों, पक्षियों और

पौधों के लिए और भी ज्यादा सुरक्षा प्रदान करने वाला है।

⚙यह कानून या अधिनियम जम्मू-कश्मीर को छोड़कर पूरे देश में लागू किया गया है।

⚙इस अधिनियम की छ: श्रेणियां हैं।

 

⚙अनुसूची 1एवं अनुसूची 2 के भाग 2 में दी गई

श्रेणी के जीव को नुकसान पहुंचाना संपूण भारत में प्रतिबंधित है। 

⚙इस प्रतिबंध के उल्लंघन पर कठोर सजा का प्रावधान है।

⚙अनुसूची तीन तथा अनुसुची चार में श्रेणी बद्ध

जीव जंतुओं को नुकसान पहुंचाने पर अपेक्षाकृत कम कठोर सजा सुनाई जाती है।

⚙अनुसूची 4के जीवों का शिकार किया जा सकता है। 

⚙अनुसूची 5 में श्रेणी बद्ध किए गए पौधों के

कृषि गत उपयोगी एवं वाणिज्यिककरण पर प्रतिबंध लगाया गया है।

⚙इस अनुसूची के तहत ही अधिकारियों को

शिकार के संबंध में अपराध निर्धारित कर सजा

देने एवं जुर्माना लगाने  की शक्ति दी गई है।

⚙1982 में यह कानून लागू हुआ था।

दोस्तों, सच यह भी है कि एक नहीँ सैकड़ों ऐसे ही पर्यावरण संरक्षण कानून भारत में उपस्थित हैं,

बावजूद इसके आज हमारा आपका सबका

संयुक्त बयान यही है कि हमारा पर्यावरण इस समय अपने बुरे दौर से गुजर रहा है।

इसका कारण यह है कि जब तक हम यह नहीं

समझेंगे कि हम खुद कितने बड़े पर्यावरण के

दुश्मन हैं तब तक हम आप सब केवल हां में हां

मिलाकर पर्यावरण का रत्ती भर भला नहीं कर सकते हैं।। 

धन्यवाद KPSINGH 05062

 

 

 

About kpsingh

मैने बचपन से निकल कर जीवन की राहों में आने के बाद सिर्फ यही सीखा है कि "जंग जारी रहनी चाहिए जीत मिले या सीख दोनों अनमोल हैं" मैं परास्नातक समाज शास्त्र की डिग्री लेने के अलावा CTET और UP TET परीक्षाएं पास की हैं ।मैंने देश के हिन्दी राष्ट्रीय समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में लेखन किया है जैसे प्रतियोगिता दर्पण विज्ञान प्रगति आदि ।

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