मानवता के परिचायक-युग नारायण सिंह

मानवता के परिचायक-युग नारायण सिंह

मानवता के परिचायक-युग नारायण सिंह

नमस्कार दोस्तों,मैं नन्द किशोरii सिंह आज आपके समक्ष एक महत्वपूर्ण विषय लेकर आया हूँ,जिनका नाम है-मानवता के परिचायक-युग नारायण सिंह।

मानवता के परिचायक-युग नारायण सिंह

परिचय-

नाम-

श्री युग नारायण सिंह

पिता-श्री भवानी सिंह

ग्राम-बकचप्पर

जनपद-भागलपुर(बिहार) के निवासी हैं।

जन्म तिथि-1952 ईसवी

व्यक्तित्व

आप सत्यनिष्ठ,धर्माचारी,बहुजन हिताय व बहुजन सुखाय, वसुधैव कुटुम्बकम् के रास्ते पर जीवनपर्यंत अग्रसर हैं।

आप मानस मर्मज्ञ,सारगर्भित प्रवचन – कर्ता,सरल भाषा  में खंडन करने वाले ,आपकी विद्वता का बखान करना सूरज को दीपक दिखाने के समान है।

आपने लोकसेवा व जनसेवा से लोगों के हृदय को जीता है।

आप प्रतिभा और विद्वता के धनी व्यक्ति हैं।

आपने कभी भी अपने दुख को  दुख  नहीं समझा बल्कि दूसरों के पीड़ा को हरसंभव कम करने  की कोशिश की है। 

आपने अपने दुख को दुख नहीं समझा  बल्कि ऐसे समय में भी लोगों की सेवा की है,जब आप अनेक प्रकार के संकटों से घिरे थे।

आप हर समय धर्माचरण में लगे रहते हैं  ,कभी भी बेराह पर नहीं चलते।

पूरे ग्राम में आपके जैसा बुद्धिजीवी,धर्ममर्मज्ञ कोई नहीं हैं।

गाँव में  भी जो आपसे बड़े हैं,वे भी अक्सर आपसे अनेक मद पर विचार करने आते हैं।

कई बार आपके जीवन में परीक्षा की घड़ी भी आयी लेकिन अपने अदम्य साहस के बल पर सत्य और ईमानदारी के मार्ग को धूमिल नहीं होने दिये।

सत्य के निर्वहन के कारण आपकी ढेर सारी संपत्ति का ह्रास हो गया लेकिन आपके चेहरे की कान्ति कभी धूमिल नहीं हुई।

इस कलि युग में सिर्फ आपने ईश्वर का  ही सहारा लिया अन्य किसी का नहीं।धन्य है आपकी महान आस्था!

ऐसे विरले ही कोई आप जैसे मिलते हैं परंतु आपके गाँव में ऐसा कोई दिखता नहीं है।इस गाँव में करीब चार सौ घर हैं।

आप अधिकांश समय भगवद्-भजन में बिताते हैं,यही कारण है, जो कभी भी आप निराश नहीं होते बल्कि कोई -न-कोई रास्ता निकाल लेते हैं।

आप सपने में भी कभी जीवन में आज तक किसी भी बुरे व्यसन के आदी नहीं हुए बल्कि पथप्रदर्शक के रूप में जनसेवा करते रहे।

आप  जैसे  महान ,सम्मानित,परम आदरणीय और  पावन महामानव को मेरा सादर शत्-शत् नमन !

दोस्तों,

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धन्यवाद!

आपका स्नेही

नन्द किशोर सिंह

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About NAND KISHORE SINGH

वसुधैव कुटुम्बकम् की परिभाषा चरितार्थ करते हुए मनुष्य को सम्पूर्ण प्राणीजगत की सेवा करनी चाहिए।ऐसा करने से आत्मा परमात्मा से मिलकर अनन्त काल तक शाश्वत और सनातन सुख को प्राप्त करता है।

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