धरती की घटती उत्पादन क्षमता

धरती की घटती उत्पादन क्षमता 

           🔴धरती की घटती उत्पादन क्षमता 🔴

शायद आप इस हेडिंग को देखकर मेरी बेवकूफी के बारे में सोचने लगे होंगे।

आप कुछ भी सोच सकते हैं,आप इसके लिए भी स्वतंत्र हैं।

लेकिन आप उन आंकड़ों को गलत साबित नहीं कर सकते जिन्हें,

यूरोपीय कमीशन के ज्वाइंट रिसर्च सेंटर की रिपोर्ट में दर्ज किया गया है ।

ज्वाइंट रिसर्च सेंटर की खास रिपोर्ट” वर्ल्ड एटलस आफ डेजर्टीफिकेशन” के अनुसार,

आनेवाले कुछ ही वर्षों में दुनिया भर में खाने के लाले पड़ने वाले हैं।

अर्थात जल्द ही पूरी दुनिया में भुखभरी की स्थिति लाने वाली,

परिस्थितियों की, दस्तक महसूस की जाने, वाली है।

इस रिपोर्ट का सबसे खास और चिंता जनक पहलू यह है कि, 

भारत, चीन और उप सहारा अफ्रीकी देशों का हा-ल सब से बुरा होने वाला है।

इस भयंकर रिपोर्ट के मुताबिक जलवायु परिवर्तन के चलते,

प्रदूषण, भू क्षरण, और  सूखा  पड़ने  की ही  वजह से पृथ्वी के, 

तीन चौथाई भूमि क्षेत्र की गुणवत्ता खत्म हो गई है सदी के मध्य तक 

इस महत्वपूर्ण आंकड़े में और भी इजाफा होने की संभावना है ।

वैज्ञानिकों तथा पर्यावरण विदों का मानना है कि अगर ऐसे ही,

भूमि की गुड़वत्ता खत्म होती रही तो एक दिन वह भी दिन आएगा जब,

जब हमारे आपके खेतों में एक दाना भी पैदा नहीं होगा।

कृषि पैदावार को हैरान करने वाला  यह नुकसान 

2050 ई तक पूरी दुनिया को हलकान कर देगा ।

और हम भारतीय लोग दाने दाने को मारे मारे ही फिरते नजर आएंगे। 

रिपोर्ट के मुताबिक 

क्या खाएगा भारत जब अनाज ही नहीं होगा। यह कथन केवल कथन नहीं है ।

इसे आप इस तरह देख सुन और समझ कहते हैं।

🔴रिपोर्ट के मुताबिक सदी के मध्य तक यानी वर्ष

2050 तक धरती के 90%क्षेत्र की उर्वरता खत्म हो सकती है। 

🔴वैश्विक अनाज उत्पादन में 1/10 भाग की भी कमी आ सकती है ।

🔴पृथ्व के कृषि क्षेत्र में से 3/4 भाग की गुणवत्ता को भयंकर नुकसान होगा।

🔴भारत  चीन तथा उप सहारा अफ्रीकी देशों में अनाज उत्पादन घट कर केवल 50% रह जाएगा। 

भविष्य में खाद्य संकट उत्पन्न होने की आशंका के पीछे सबसे बड़ा हांथ कृषि का ही है।

इसके बाद जंगलों का कटाव और शहरों का अनियंत्रित शहरीकरण है।

पृथ्वी की एक तिहाई जमीन फसलों तथा पशुओं के चारे से युक्त है 

बावज इसके जलवायु परिवर्तन की वजह से अन्न का उत्पादन 

कम होने की आशंका लगातार बलवती हो रही है। 

क्या करें अब हम

इस जान लेवा भयंकर स्थिति से निपटने के लिए

हमें पर्यावरण संरक्षण के साथ साथ मिट्टी के रख

रखाव यानी संरक्षण और संवरधन पर भी ध्यान देना होगा।

हमें टिकाऊ नीतियां बनानी चाहिए ताकि हम अपने नष्ट होते जीवन को बचा सकें।

सबसे खास और महत्वपूर्ण बात यह है कि हमें अपनी अपनी आदतें भी बदलनी होंगी ।

क्योंकि यह जो जलवायु परिवर्तन पूरी दुनिया को

परेशान कर रहा है यह कहीं धरती के बाहर से नहीं आया। यह हम सबकी करतूतों का परिणाम है। 

 

धन्यवाद

KPSINGH 17072018

 

 

About kpsingh

मैने बचपन से निकल कर जीवन की राहों में आने के बाद सिर्फ यही सीखा है कि "जंग जारी रहनी चाहिए जीत मिले या सीख दोनों अनमोल हैं" मैं परास्नातक समाज शास्त्र की डिग्री लेने के अलावा CTET और UP TET परीक्षाएं पास की हैं ।मैंने देश के हिन्दी राष्ट्रीय समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में लेखन किया है जैसे प्रतियोगिता दर्पण विज्ञान प्रगति आदि ।

View all posts by kpsingh →

4 Comments on “धरती की घटती उत्पादन क्षमता”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *