युवा पीढ़ी को स्वदेश प्रेम व वीरता की प्रेरणा….

युवा पीढ़ी को स्वदेश प्रेम व वीरता की प्रेरणा….

युवा पीढ़ी को स्वदेश प्रेम व वीरता की प्रेरणा….
 

     प्रेरणा:- जिंदगी का बेहतरीन पल व असली मज़ा उनके लिए नही है जो फूलों के छाँव के नीचे खेलते और सोते है,बल्कि फूलों के छाँव के नीचे अगर जीवन का कोई स्वाद छिपा है,तो वह भी उन्हीं के लिए है जो दूर रेगिस्तान से आ रहे है जिनका कंठ सूखा हुआ है,ओठ फटे हुए है तथा सारा बदन पसीने से तर है।पानी में घुली अमृत के तत्व को वही बेहतर अनुभव कर सकता है जो धूप में खूब सुख चुका हो,बल्कि वे नही जो कभी जो रेगिस्तान में कभी पड़ा ही नही।

वास्तव में हृदय वही है जो कोमल भावों और देशप्रेम से ओतप्रोत हो। प्रत्येक देशवासी को अपने वतन से प्रेम होता है,चाहे उसका देश सूखा, गर्म व दलदल से युक्त क्यों न हो।देशप्रेम के लिए किसी आकर्षक की आवश्यकता नही पड़ती बल्कि वह अपनी जन्मभूमि के प्रति मनुष्य का स्वाभाविक ममता है। सिर्फ इंसान को ही नही बल्कि पशु-पक्षियों को भी अपना देश बहुत प्यारा लगता है। शाम होते ही पक्षी भी अपना आशियाना की और उड़े चले जाते है।देश-प्रेम का अंकुर सभी में विधमान है। लेकिन कुछ लोग यह समझते है कि मातृभूमि के नारे लगाने मात्र से ही देश-प्रेम व्यक्त होता है। दिन-भर के त्याग,बलिदान और वीरता की कथा सुनते नही थकते,लेकिन परीक्षा की घड़ी जब आती है तो वे भाग खड़े होते है। ऐसे लोग स्वार्थ त्यागकर,जान जोखिम में डालकर देश की क्या सेवा करेंगे? ऐसे लोगों की आवश्यकता इस देश को नही है।

सच्चे देशप्रेमी अपने प्रेम के जोर से लोगों को हमेशा के लिए बाँधे रहते है। सच्चे वीर की अभिव्यक्ति कई तरह से की जा सकती है। कभी लड़ने-मरने से,कभी खून बहने,से तो कभी तोप तलवार के सामने बलिदान करने से होता है, तो कभी जीवन की गूढ़ रहस्य तथा सत्य की तलाश में भगवान बुद्ध जैसे राजा विरक्त होकर वीर हो जाते है। देश-प्रेम में वीरता एक प्रकार से अंत: प्रेरणा है जब कभी इसका विकास हुआ तब एक रंग, एक रौनक संसार में छा गया।वीरता हमेशा नई और निराली होती है। वीरों को बनाने के लिए कोई कारखाना नही होता। वे तो देवदार की वृक्षों की भांति जीवन रूपी वन में स्वच्छंद पैदा होते है ये बिना किसी के पानी दिए,बिना किसी के दूध पिलाये बढ़ते है। जीवन के केंद्र में निवास करो तथा सत्य की चट्टान में खड़े होकर देश की सेवा में अपना जीवन न्योछावर करने के लिए युवा आगे आवें।देश को आपकी जरूरत है धरती माँ अपनी झोली फैलाए खड़ी है देश को सच्चे,ईमानदार देशभक्त युवा आकर देश को भ्रष्टाचार से मुक्त करें, एक दूसरे की मदद करे तभी आप एक स्वदेश प्रेमी कहलायेगें।

धन्यवाद

लेखक:-प्रमोद सेठ

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हिम्मत के आगे किस्मत गरीब है, दो कदम आगे बढ़ो तो मंज़िल करीब है।

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6 Comments on “युवा पीढ़ी को स्वदेश प्रेम व वीरता की प्रेरणा….”

  1. सर नमस्कार ब्लॉगिंग करना चाहता हूं उसका इमेल ID चाहिए मेरे को ब्लॉगिंग करने का thank you thank you

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