क्रोध को क्यों पियें

क्रोध को क्यों पियें

    क्रोध को क्यों पियें

क्रोध को क्यों पियें

क्रोध को क्यों पियें

 

 

नमस्कार दोस्तो,हम सभी जानते हैं कि गुस्सा हमारे मनोमस्तिष्क को झकझोर कर किंकर्तव्यविमूढ बना देता है।

यह हमारे मनोबल , तपोबल और अन्य सभी प्रकार के बल का ह्रास कर देती है।

यह शक्तिह्रास के  साथ – साथ हमारे अन्दर कई प्रकार के बीमारियों को  बढ़ाता है  तथा जिससे रक्त  – चाप (blood-pressure)  भी  बढ़ जाता है। 

तो  आइये! हमलोग आज  जानेंगे –

‘क्रोध  हमारी आंतरिक शांति का शत्रु है –  कैसे?

एक संत थे।वह अपने शिष्य के पास बैठे- बैठे ज्ञान- चर्चा  कर रहे थे।

 दोनों अध्ययन और अध्यापन में रते थे तभी वहाँ एक दुराचारी व्यक्ति आया और संत के शिष्य को बुरा – भला कहने लगा।

शिष्य चुपचाप उस दुष्ट के कठोर वचन को सुनते रहा और प्रत्युत्तर में कोई जवाब नहीं दिया।

पर वह दुष्ट चुप ही नहीं हो रहा था।

आखिर उसकी सहनशीलता असहनीय हो गया और वह भड़क उठा।

वह जिस लहजे में दुष्ट बात कर रहा था , उसकी भाषा में ही जवाब देने लगा।

शिष्य के इस व्यवहार से संत को बड़ी ठेस  पहुँची और संत उठकर चलने लगे।

शिष्य ने कहा – “हे भगवन !जब तक यह दुष्ट मुझे बुरा – भला कहे जा रहा था ।

तब तक तो आप शांतचित्त बैठे – बैठे सब – कुछ सुनते जा रहे थे लेकिन जब मैं मुँह खोला तो आप उठकर जाने लगे।

आपके इस रहस्य को मैं बिल्कुल नहीं समझ पाया।यह सब क्या है ?

“संत ने समझाया -“बेटे , जब तक तुम चुपचाप बैठे थे ।

तब तक ईश्वर तुम्हारे अंदर से मौन रूप में पुकार रहा था , किन्तु जब तुम्हारी जीभ भी बुरे शब्दों का प्रयोग करने लगी तो परमात्मा पीछे हट गये ।

तुम्हारा यह गुस्सा दानवी प्रवृत्ति है ।इस राक्षस का साथ छोड़ने में ही अपनी भलाई है।

तो दोस्तों,आप भी अपने जीवन में सफल होना चाहते हैं

क्रोध को क्यों पियें

 

तो अवश्य क्रोध को तिलाञ्जलि दे दें तथा अपने जीवन के लुक्ष्य के  प्रति अग्रसर हो जायें।

धन्यवाद !

आपका

नन्द किशोर सिंह

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वसुधैव कुटुम्बकम् की परिभाषा चरितार्थ करते हुए मनुष्य को सम्पूर्ण प्राणीजगत की सेवा करनी चाहिए।ऐसा करने से आत्मा परमात्मा से मिलकर अनन्त काल तक शाश्वत और सनातन सुख को प्राप्त करता है।

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10 Comments on “क्रोध को क्यों पियें”

  1. नंद किशोर जी, कहानी भी अच्छी और पोस्ट में बताये गये विचार भी सुन्दर हैं |

    1. रोहित जी,
      आपने बिल्कुल सही कहा – गुस्सा हमारे सभी कार्यों में। व्यवधान पैदा करता है।
      धन्यवाद मित्र!

  2. संजीव जी,
    आपने हमारे पोस्ट को दिल से पढ़कर लाइक किया है
    इसलिए आपको बहुत-बहुत धन्यवाद!

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