विज्ञान क्विज :मानव का मंगल अभियान

 

मानव का मंगल अभियान

मानव का मंगल अभियान अद्भुत और रोमांच कारी है क्योंकि

जब से धरती में जीवन यापन करने वाले मनुष्य नाम के प्राणी ने

ज्ञान विज्ञान की पराकाष्ठा को प्राप्त किया है

उसने सदैव धरती के अलावा भी जीवन तलाशने की हर वक्त कोशिश की है।

आज यहां इस पोस्ट में मनुष्य द्वारा मंगल ग्रह की

खोज में किए गए तमाम प्रयासों की चर्चा की जानी है

जिसमें भारत द्वारा मंगल के लिए किया गया किया गया विशेष अभियान भी शामिल है।

दोस्तों आइए मानव के मंगल अभियान पर चर्चा करते हैं कुछ इस तरह से 

मंगल अभियान और भारत औ

भारत का ऐतिहासिक मंगल यान 5 नवंबर 2013 को

आंध्र प्रदेश के श्री हरिकोटा नामक स्थान से रवाना किया गया था ।

भारत के प्रथम मंगल यान को मार्स आर्बिटर मिशन नाम दिया गया था।

मार्स आर्बिटर मिशन को भारत ने पीएसएलवी – सी 25 से रवाना किया गया था।

भारत के प्रथम मंगल यन काका वजन 1350 किग्रा तथा इसका रंग सुनहरा था।

भारत का मार्स आर्बिटर मिशन 300 दिन की अनवरत यात्रा के बाद मंगल ग्रह पहुंचा था।

24 सितम्बर 2014 तक इसके लक्ष्य प्राप्त करने की पूरी सम्भावना रखी गई थी।

भारतीय मंगल अभियान को अपने लक्ष्य तक जाने में 40 करोड़ किमी की यात्रा करनी पड़ी थी।

विशेष ध्यान देने योग्य बात यह है कि भारत से पहले केवल तीन देश

अपने अपने मंगल अभियान में सफल हो चुके थे।

इस लिहाज से भारत के सफल मंगल अभियान के

बाद भारत यह कारनामा करने वाला चौथा देश बना था ।

भारत से पहले जो देश अपने अपने मंगल अभियान में सफल हो चुके हैं। 

वह हैं यूरोपीय स्पेस एजेंसी  अमरीकी स्पेस तथा मास्को स्पेस एजेंसी।

सफल भारतीय मंगल अभियान की एक विशेषता यह भी रही है कि

भारत ऐसा देश बन गया है जिसने मंगल अभियान की घोषणा के बाद

केवल एक साल के अंदर अपनी सफलता का परचम लहराया है ।

भारतीय मंगल अभियान से जुड़ने वाले प्रमुख वैज्ञानिकों के नाम इस प्रकार हैं:

एस के शिवा कुमार  डॉ माइल स्वामी अन्ना दुरई  पी

कुन्हीं कृष्णन  एस अरुनन तथा वी केशवा राजू।

क्या आपको पता है कि मंगल का तापमान पृथ्वी की तुलना में काफी ठंडा है। 

मंगल कुछ खास तथ्य 

मंगल ग्रह सूर्य से दूरी के अनुसार पृथ्वी के बाद
चौथा एंव आकार में सातवां ग्रह है। 

यह सूर्य से 22.78 करोड़ किमी तथा पृथ्वी से 5.5

करोड़ किमी दूरी पर स्थित है।

आयरन आक्साइड की उपस्थिति के कारण इसकी

सतह लाल दिखाई देती है।

इसीलिए इसे लाल ग्रह भी कहते हैं।

अपने अक्ष पर

मंगल को एक चक्कर पूरा करने में 24 घंटा 37 मिनट

22.6 सेकंड का समय लगता है ।

मंगल के दिन का मान तथा अक्ष का झुकाव पृथ्वी के समान है ।

मंगल में भी पृथ्वी के समान दो ध्रुव हैं।

मंगल का अक्ष परिभ्रमण तल से 25°12’के कोण पर

झुका हुआ है।

इसीलिए यहां पृथ्वी के समान ही ऋतु परिवर्तन होता है।

मंगल ग्रह का व्यास 6800 किलोमीटर है।

इसका द्रव्यमान 6.4×10की घात 23 किलोग्राम है।

पृथ्वी की तुलना में इसका घनत्व कम है जो यह दर्शाता है कि इसके

आंतरिक भाग की संरचना पृथ्वी की आंतरिक संरचना से भिन्न है।

मंगल ग्रह के वायुमंडल में 95% कार्बन डाई

ऑक्साइड, 1-3%नाइट्रोजन, 1-2 % आर्गन तथा 0.1 – 0.4% आक्सीजन पायी जाती है।

यहां पर ओजोन स्तर का अभाव है।

मंगल के दो उपग्रह हैं फोबोस तथा डीमोस।

फोबोस का व्यास 23 किमी तथा डीमोस का व्यास 12 किलोमीटर है।

डीमोस सौरमंडल का सबसे छोटा ग्रह है।

सौरमंडल का सबसे बड़ा ज्वालामुखी ओलंपस मेेसी

एवं सबसे ऊंचा पर्वत निक्स ओलंपिया जो एवरेस्ट से तीन गुना ऊंचा है  इसी ग्रह में  हैं। 

 

धन्यवाद

के पी सिंह किर्तीखेड़ा 11092018

 

 

About KPSINGH

मैने बचपन से निकल कर जीवन की राहों में आने के बाद सिर्फ यही सीखा है कि "जंग जारी रहनी चाहिए जीत मिले या सीख दोनों अनमोल हैं" मैं परास्नातक समाज शास्त्र की डिग्री लेने के अलावा CTET और UP TET परीक्षाएं पास की हैं ।मैंने देश के हिन्दी राष्ट्रीय समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में लेखन किया है जैसे प्रतियोगिता दर्पण विज्ञान प्रगति आदि ।

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