मुंह में राम बगल में छुरी – Knife in the mouth next to the rug

मुंह में राम बगल में छुरी – Knife in the mouth next to the rug

मुंह में राम बगल में छुरी । दोस्तों, ये लेख मैं उन लोगों के लिए लिख रहा हूँ जो समाज में अपना सुंदर और सजीला चेहरा सामने दिखाते हैं और अपना असल घिनौना और बदसूरत चेहरा , सुंदर और सजीले चेहरे के पीछे छिपा लेते हैं ।

और यही नहीं बल्कि इस सुंदर पर्दे रूपी चेहरे की बदौलत समाज में अपना अच्छा पकड़ भी बना लेते हैं ।

किन्तु सायद वे भूल जाते हैं कि पर्दा तो आखिर पर्दा है जो तनिक भी हवा के झोंके से पीछे का दृश्य दिखा देता है ।

ठीक वैसे ही जैसे आसाराम बापू का और राम रहीम का चेहरा दिख गया ।

और अब एक और फैशनेबुल बाबा सामने आ गया ।

जी हां वही लम्बे केशों वाला सुंदर से मुखड़े वाला देवकीनंदन ठाकुर ।

कहने को तो ये एक सन्यासी है पर सन्यास से इसका दूर – दूर तक वास्ता नहीं है ।

क्योंकि वाकई में यदि यह सन्यासी होता तो किसी एक समाज के लिए यह पूरे देश में बवाल न खड़ा करता ।

और सबसे बड़ी बात एक सन्यासी को समाज से क्या लेना देना ।

और ऐसे ही लोग मुंह में राम बगल में छुरी वाली कहावत को चरितार्थ करते हैं ।

महान लेखक का मुखौटा

एक विद्वान और महान लेखक पिछले कुछ महीनों से आरक्षण और एस0 सी0 एस0 टी0 एक्ट पर

कई सारे लेख लिखता जा रहा था । और वर्तमान सरकार का गुण भी गए जा रहा था ।

उसकी लेखन शैली से ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो वर्तमान सरकार और भारतीय जनता को इसी के निर्देशों का पालन करना है ।

कभी उसने आरक्षण के विरोध में लिखा तो कभी sc/st एक्ट के पक्षधर लोगों द्वारा किया गए भारत बंद के विरोध में ।

खैर बात यहीं तक होती तो ठीक होता । लेकिन हद तो तब हो गयी

जब उसने हमारे माननीय प्रधानमंत्री जी को यह बताया कि कौन उनका अपना है और कौन पराया ।

वाह भाई इतना बड़ा देश चलाने वाला व्यक्ति अब तक अच्छा था और अब उसे अचानक अपने – पराये की समझ ही नहीं रही ।

वो भी सिर्फ इस लिए कि वे sc/st एक्ट के शुरुआती प्रारूप के पक्षधर हो गए ।

सच क्या है

असल में हमारे विद्वान महाशय को शायद यह लगता है कि हमारे देश की वर्तमान सरकार मात्र सवर्णों के वोट से बनी है ।

और प्रधानमंत्री महोदय को वही करना चाहिए जो स्वर्ण समाज को पसंद हो ।

शायद महाशय को यह नहीं मालूम कि 15 – 17% जनसंख्या से इतने विशाल देश की सरकार नहीं बन सकती ।

यही विद्वान महोदय पहली बार जब दलित और निम्न समाज के द्वारा भारत बंद किया गया था तब

कहे थे कि भारत बंद करने से समस्या का समाधान नहीं होगा ।

भारत बंद करना कहाँ की समझदारी है । माननीय सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ किसी को बोलने का अधिकार नहीं है ।

भारत बंद से देश की अर्थव्यवस्था चरमरा जाती है । आदि – आदि ।

परन्तु अब यही विद्वान सवर्णों द्वारा भारत बंद के पक्ष में आ गया ।

क्या अब इनको माननीय सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ आवाज उठाने का अधिकार है ।

क्या इनके भारत बंद से भारत की अर्थव्यवस्था और मजबूत हो गयी ।

निष्कर्ष

मानो या न मानो निम्न समाज के कल्याण की बातें करने वाले खास तौर से सवर्ण समाज के लोगों का मुखौटा ही सुंदर होता है ।

असल में सच तो यह है कि ये इन लोगों को कभी ऊपर उठने देना ही नहीं चाहते ।

बस मुंह से चाटुकारिता भारी बातें करते हैं और बगल से गला काटने की तैयारी ।

दोस्तों, मैं ऐसी समाज तोड़ने वाली पोस्ट लिखना पसंद नहीं करता मगर

यदि कोई समाज तोड़ने की बात करता है तो उसे जोड़ने के लिए ऐसी पोस्ट लिखना भी जरूरी है ।

यदि इस पोस्ट से किसी को नाराजगी हो तो छोटा भाई समझ कर माफ़ कर दें ।

दोस्तों, यदि यह पोस्ट अच्छी लगी ही तो इसे लाइक और शेयर जरूर करें ।

धन्यवाद ।

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2 Comments on “मुंह में राम बगल में छुरी – Knife in the mouth next to the rug”

  1. Sir namaskar मुंह में राम बगल में छुरी
    यह लेख आपने बहुत अच्छा लिखा मैं चाहता हूँ की आप जैसे सभी व्यक्ति इस पृथ्वी पर आजाये तो ऐसे हराम खोरों को देश से बाहर निकाला जा सकता है।
    मैं आपको धन्यवाद करता हूँ

  2. बहुत ही अच्छा पोस्ट भारती जी।
    क्या आप मुझे बता सकते हैं कि मेरे में ब्लॉग लिखने का ऑप्शन क्यो नही आ रहा है। मैं क्या करूँ।

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