घर वाली बाहर वाली “व्यंग्य”

 

घर वाली बाहर वाली “व्यंग्य” 

घर वाली बाहर वाली।

जी हाँ दोस्तों, यह एक प्रेम कहानी का किसी के गम से सराबोर ऐसा शीर्षक है

जिसकी तपिस हर पाठक को होना मुश्किल है।

लेकिन मेरे प्रेम सहोदर बंधु बांधवो जिसने भी प्रेम की

जिल्लत के साथ किल्लत के भी मनोहारी भव्य दर्शन इस मंहगाई में किए हैं, 

तो हमे कतई धोखा नहीं हो रहा यह जानने में कि

वह आदमी निहायत ही सरताजों का सरताज होगा।

दोस्तों,, मैं अपने दिल की अनंत और दुर्लभ गहराइयों के बल पर

आज पहली बार धीर, वीर गम्भीर सुप्रीम कोर्ट को कोटि कोटि धन्यवाद करते हुए 

हजारों हजार शाश्टांग प्रणाम करता हूँ, 

जिसने  मेरी वर्षों की हसरत एक झटके में ही पूरी कर दी है।

सुप्रीम कोर्ट की जय हो! 

दोस्तों, निश्चित ही  मेरे साथ साथ आपने भी यह

कमाल की न्यूज  देेखी, पढी या सुनी होगी, 

जिसमें यह कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने हर आदमी

के लिए घर वाली के साथ साथ बाहर वाली का भी

टिकट कन्फर्म कर दिया।

दोस्तों सोचिये, ऐसे में वे लोग कितने खुश होंगे जो

अभी तक यही सब कुछ तो चाहते रहे थेे

लेकिन दुनिया थी कि हम पर शक कर रही थी। 

दोस्तों वह लोग निहायत ही किस्मत के सनी लियोन होते हैं, 

जो प्रेम की पींगे बढाने का सुअवसर कहीं से भी हवा चूसक यंत्र के समान ग्रहण कर लेते हैं।

अब चूंकि हम अभी प्रेम की इस करतब प्रधान शैली से दूर थे, 

इसलिए हम प्रेम की डाइरेक्ट पींगे बढाने की बजाय प्रेम की पिचकारी की तलाश में थे।

अब होंगी हसरतें हमारी पूरी 

वाह रे सुप्रीम कोर्ट, आपने तो न केवल हम बुजुर्गों

को बल्कि हर उस भारतीय जवान को खुश कर दिया जिन्हें खुश हुए काफी साल हो गए थे।

जो बात रह रह कर हमारी आफत बन कर ही दम लेती थी

आज वही बात गुलाब फूल बन गई है।

और हाँ इस गुलाबी भेंट को थाली में सजा कर खुद 

सुप्रीम कोर्ट आफ इंडिया ने हर भारत वासी को प्रदान किया है। 

किसी ने ठीक ही कहा है,

करत करत अभ्यास के जड़ मति होत सुजान। 

रसरी आवत जात तेल सिल पर होत निशान।।

मेरे प्यारे बंधु बांधवों इन चार पंक्तियों के अर्थ से पैदा हुए अनंत उत्साह से मैं तो धन्य हो गया था।

इन लाइनों में साफ साफ लिखा था कि प्रयास करते रहना चाहिए।

दिल लगा कर प्रयास करने से सफलता ही नहीं बल्कि भारी सफलता मिलती है।

खुदा झूठ न बुलवाए हम सचमुच सच्चे दिल से ही नहीं बल्कि

दिलों के दिल उर्फ दरिरा दिल से आपको बताना चाहेंगे कि बुजुर्ग जो भी कह कर गए हैं, 

वह पूरा का पूरा एक सौ एक बटा सौ कह कर गए हैं।

मेरी इस बात का मतलब यह है मेरे प्यारे दोस्तों कि जब हमने पवन पुत्र 

बजरंग बली के पूरा पहाड़ ही उठा लने कीअसाधारण कथा पर नजर डाली

तो उसी के आस पास ही हमें गोवर्द्धन पर्वत को धारण

करने वाले प्यार के देवता श्रीकृष्ण की बात याद आ गई।

बस फिर क्या था उसी क्षण हम ने गोवर्धन पर्वत को उठाने की कसम तो नहीं खाई

लेकिन हमने मन ही मन फेवीकोल टाइप की यह प्रतिज्ञा जरूर कर ली कि

अब हम भी मन मसोस कर नहीं जिएंगे। 

आज जब हमारे देश के सबसे बड़े कोर्ट ने शादी के बाद भी

अनुचित, अवैध, असंगत प्रेम प्रसंग को अवैध नहीं माना

तो कोई और कौन होता है, हमें हमारे भूले हुए प्यार से दूर रखने वाला। 

धन्यवाद

के पी सिंह किर्तीखेड़ा 11102018

 

About KPSINGH

मैने बचपन से निकल कर जीवन की राहों में आने के बाद सिर्फ यही सीखा है कि "जंग जारी रहनी चाहिए जीत मिले या सीख दोनों अनमोल हैं" मैं परास्नातक समाज शास्त्र की डिग्री लेने के अलावा CTET और UP TET परीक्षाएं पास की हैं ।मैंने देश के हिन्दी राष्ट्रीय समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में लेखन किया है जैसे प्रतियोगिता दर्पण विज्ञान प्रगति आदि ।

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