बिना किसी बचत के कैसे करें बचत?

बिना किसी बचत के कैसे करें बचत?

बिना किसी बचत के  कैसे करें बचत?

लो जी कर लो बात, क्या इस बात पर 1%भी विश्वास

किया जा सकता है कि बिना किसी बचत के भी बचत की जा सकती है?

दोस्तों, जब भी आप मेरी पोस्ट “बिना किसी बचत के कैसे करें बचत”?

को पढेंगे तो आप वही कहेंगे जो मैने अपनी पोस्ट को

लिखने के पहले ही लिख दिया है।

मेरे कहने का मतलब यह है कि हम साधारण तौर पर यही जानते हैं कि हम बैंक तभी जाते हैं

जब हमारे पास अतिरिक्त रकम होती है, और जिसे हम बैंक मे जमा करते हैं।

लेकिन क्या यह बात सच है?

इसका सटीक जवाब यही है कि हम बैंक में केवल तभी नहीं जाते

जब हमें वहां रकम जमा करना हो। 

हकीकत यह भी है कि हम बैंक में तब भी जाते हैं, 

जब हमें बैंक से खुद रकम उधार चाहिए यानी कर्ज लेना हो।

ठीक यही नियम बचत के लिए भी  लाागू होता है।

हम भले ही अच्छी खासी बचत करने लायक सेलरी यानी वेतन न पाते हों

लेकिन हम बचत तब भी कर सकते हैं यह सच है।

यह सच यहाँ तक सच है कि  हम सेलरी नहीं भी पाते

हों तब भी हमसाधारण इंसान के तौर पर भी बहुत कुछ बचत कर सकते हैं। 

बिना बचत की बचत कैसे? 

मेरी बात सबको समझ में नहीं आएगी यह बात मुझे

बहुत ही अच्छे ढंग से पता है।

लेकिन मैं फिर भी चाहता हूं कि आप मेरी बात समझें

क्यों कि मेरे कहने का आशय यही है कि हमें हर हाल में बचत करने के बारे में

सोचना चाहिए और बचत करना भी चाहिए।

दोस्तों, मैं जब भी यह बात दोहराता हूं कि बिना बचत

के कैसे करें बचत?

तो मेरे दिमाग में वही बात घूम रही होती है 

जिसके अनुसार कमाने से भी ज्यादा श्रेष्ठ बचत करना होता है। 

जी हां दोस्तों मैं पहले इस बात को सिरे से ही नकार देता था कि

कमाने से बेहतर होता है बचत करना।

मैं सोचता था यह बात सही नहीं है क्योंकि कमाएंगे

नहीं तो बचाएंगे कैसे?

लेकिन मेरा सोचना सही नहीं है सचमुच यह एक

सच्चाई भरी बात है कि

कमाने से कहीं बेहतर होता है बचत करना। 

लेकिन कैसे,,?

बिना किसी बचत के कैसे करें बचत?

यह सुनने में जितना अजीब और असंभव सा लगता है

हकीकत में

यह उतना ही आसान और संभव होता है।

सवाल उठता है लेकिन,, कैसे? जिसका तत्काल जवाब है ऐसे,,,,, 

करुणा और प्रदीप की शादी अभी नई नई हुई थी।

करुणा आंगनवाड़ी कार्य करती थी जबकि प्रदीप कुछ नहीं करता था।

इसका कारण यह भी था कि करुणा का आंगनबाड़ी केंद्र दूर था

इसलिए प्रदीप को ही उसे लेकर जाना पड़ता था  

अतः वह कुछ कर भी नहीं सकता था।

खैर, एक छोटी सी नौकरी में बेहतर से बेहतर सपने देखना था

 

इसलिए प्रदीप ने एक योजना बनाई और करुणा को

पूरी तरह समझाने के बाद

उसके पूरे वेतन को अपनी योजना के अनुसार खर्च

करने लगा।

नो फालतू खर्च, नो इधर-उधर,

नो फालतू खरीदारी, नो फालतू रिश्तेदारी

नो फालतू शानो शौकत नो फालतू दोस्ती यारी । 

 दोस्तों, यह कोई कविता नहीं बल्कि प्रदीप की योजना है,

जिसके आधार पर वह दोनों तब तक चलते रहे जब

तक वह दो से तीन न हो गए।

दोस्तों.आपको आश्चर्य होगा लेकिन हकीकत में इसका

एक चमत्कारी परिणाम हुआ।

हुआ यह कि इन तीन चार सालों में छोटी छोटी बचत

से ही इन्होंने इतनी रकम बना ली थी कि

एक अच्छा निवेश किया जा सके।

दोनों ने पहले धन इकट्ठा किया फिर उसे सही दिशा दिया।

इसका फायदा यह हुआ कि आज इन दोनों का जीवन स्तर

किसी भी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता से बेहतर है, जिसका

सारा श्रेय जाता है प्रदीप की योजना को।

यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि प्रदीप कुछ भी

कमाता नहीं था फिर भी उसने एक बेहतर निवेश किया।

यह सच में सोचने वाली बात है  कि अगर आप नहीं भी कमाते

तब भी आप केवल अपनी आदतों में ही सुधार करके बहुत कुछ

फालतू के खर्चों से खुद को बचा सकते हैं।

वहीं भले ही आप पचासों हजार रुपया महीना कमाते हैं

लेकिन आप की आदतें बिगड़ी हुई हैं तो आप कभी न

तो सुख शांति का जीवन जी सकते हैं

न ही बताने लायक कुछ बचत कर सकते हैं।

 

धन्यवाद

के पी सिंह किर्तीखेड़ा 08102018

About KPSINGH

मैने बचपन से निकल कर जीवन की राहों में आने के बाद सिर्फ यही सीखा है कि "जंग जारी रहनी चाहिए जीत मिले या सीख दोनों अनमोल हैं" मैं परास्नातक समाज शास्त्र की डिग्री लेने के अलावा CTET और UP TET परीक्षाएं पास की हैं ।मैंने देश के हिन्दी राष्ट्रीय समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में लेखन किया है जैसे प्रतियोगिता दर्पण विज्ञान प्रगति आदि ।

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