अब धरती ही नहीं अंतरिक्ष में पैदा होंगे बच्चे

अब धरती ही नहीं अंतरिक्ष में पैदा होंगे बच्चे 

अब धरती ही नहीं अंतरिक्ष में पैदा होंगे बच्चे।

जी हां दोस्तों, इस खबर को पढने के बाद आप यह कतई न सोचें कि

यह कोई फिल्मी डायलॉग है और यह भी न सोचें कि यह महज एक कोरी कल्पना भर है।

विश्व के प्रथम अंतरिक्ष यान स्पुतनिक – 1 को जब रूस ने 1957 में प्रक्षेपित किया था

तो कुछ देश इसे समझ ही नहीं पाए थे कि यह कौन सी बला है और इसका क्या मतलब है?

लेकिन हां, जो थोड़ा बहुत समझते थे उनकी भी हकीकत यही है कि

उन्हें  यह तो पता था कि यह उपलब्धि अंतरिक्ष तक जाने का भविष्य में जरिया बनेगी

लेकिन उन सबने यह बात कतई नहीं सोचा था कि अंतरिक्ष में भेजे गए उपग्रह

पूरी धरती के मनुष्य के लिए एक दिन हर पल की जरूरत बन जाएंगे।

ठीक वही संदर्भ और प्रसंग आज इस खबर पर भी कायम है कि

आज नहीं तो कल अंतरिक्ष में मनुष्य के बच्चे पैदा होने की खबर की भी पुष्टि होगी।

 

अब अंतरिक्ष में पैदा होंगे बच्चे 

दूसरे ग्रह में बसने की चाहत रखने वाले मनुष्य के लिए यह शुभ समाचार है कि

अगर सब कुछ ठीक ठाक रहा तो वैज्ञानिकों का दावा है कि

मनुष्य की अंतरिक्ष में पैदा होने की हसरत 2024 तक पूरी हो सकती है।

2024 तक वैज्ञानिक अंतरिक्ष में पहले इंसान का जन्म करवाने में कामयाब हो सकते हैं।

आप सोच रहे होंगे कि यह आश्चर्यजनक कमाल कौन करेगा

तो इसका उत्तर यह है कि  यह कमाल नीदरलैंड की एक कंपनी स्पेस लाइफ ओरिजिन करेगी।

कंपनी के तय कार्यक्रम के अनुसार 36 घंटे के एक

मिशन क्रेडल नामक अभियान ही यह उपलब्धि हासिल करेगा।

इस अभियान में एक गर्भवती महिला को वैज्ञानिक डाक्टर अंतरिक्ष ले जाएंगे।

यह यात्रा 36 घंटे की होगी जिसमें न केवल विशेषज्ञ डॉक्टर प्रसव संपन्न कराएंगे

बल्कि भविष्य की तमाम संभनाओं पर सूक्ष्म दृष्टिपात करते हुए

धरती ही नहीं अंतरिक्ष में पैदा होंगे बच्चे

इस बात की पुष्टि करके मनुष्य की उपलब्धियों में एक और उपलब्धि शामिल करने की कोशिश करेंगे। 

क्या है इस मिशन का मकसद 

36 घंटो के इस महत्वाकांक्षी  मिशन क्रेडल का मकसद

अंतरिक्ष में मानव कालोनी बसाने का मंच तैयार करना है।

इस अभियान के नतीजे अन्य ग्रह पर मानव प्रजनन की संभावनाओं को टटोलने का काम करेंगे।

जहां तक बात मिशन क्रेडल की है तो यह 2024 तक

अंतरिक्ष में पहले मानव के पैदा होने से जुड़ा अभियान है।

देखा जाए तो किसी और ग्रह में बसने के लिहाज से इसे बेहद अहम मिशन मानना लाजिमी है।

ह एक ऐसा मिशन या अभियान है जो अंतरिक्ष में किसी शिशु के पहले जन्म को साकार करेगा।

सच कहें तो यह छोटा सा कदम मानव की विशालता का महान कदम भी साबित होगा।

इस अभियान के लिए 25 उन महिलाओं का चयन किया जाना है

जिनके गर्भ धारण का समय एक दूसरे के आसपास होगा।

सीधी सी बात है अंतत: इसमें वही महिला भेजी जाएगी

जिसका प्रसव समय 36 घंटे के इस अभियान से मेल खाएगा।

हालांकि अंतरिक्ष भेजी जाने वाली संभावित 25 महिलाओं का चयन अभी नहीं हुआ है

लेकिन 2022 में इसके प्रारंभ होने की पूरी सम्भावना है। 

चिकित्सा के इंतजाम क्या होंगे? 

अब धरती ही नहीं अंतरिक्ष में पैदा होंगे बच्चे क्यों कि इस

मानव इतिहास को बदलने वाले मिशन को लेकर

तमाम तरह के जरूरी सटीक और उचित इंतजाम किए गए हैं। 

जी हाँ दोस्तों, इस मिशन को पूरा करने के लिए  कंपनी महिलाओं को

अंतरिक्ष भेजने के पहले यहीं धरती पर पूरा मेडिकल चेकअप कराएगी।

इसमे जच्चा बच्चा की हर तरह की जांच की जाएगी

ताकि अगर कोई संभावित परेशानी के भी कुछ लक्षण दिखें तो उन्हें खत्म किया जा सके।

इस मिशन के दौरान गुरुत्वाकर्षण और खतरनाक विकिरण से

महिला और उसके बच्चे को बचाने के भी पूरे पूरे इंतजाम किए जाएंगे।

जहां तक सवाल इस मिशन के पूरा होने का है तो यह क्रम बद्ध ढंग से पूरा किया जाएगा।

इस क्रम में सबसे पहले चयनित गर्भवती महिला का पूरा चेकअप किया जाएगा।

इसके बाद महिला को डाक्टरों की पूरी टीम के साथ अंतरिक्ष भेजा जाएगा।

देखा जाए तो इस मिशन का असली मकसद यहीं से

स्टार्ट होगा क्योंकि इसके बाद महिला का प्रसव अंतरिक्ष में कराया जाएगा।

इस तरह जब सफलता पूर्वक प्रसव हो जाएगा तो

शिशु की गहन जांच साथ गए काबिल डाक्टरों की टीम करेगी।

इसके बाद यदि सब कुछ ठीक रहा तो शिशु और मां दोनों को वापस धरती पहुंचा दिया जाएगा।

यहीं पर आपको एक खास बात और बताना है कि

मिशन क्रेडल की तरह ही एक और मिशन लोटस भी चलाया जा रहा है।

इसका मुख्य उद्देश्य अंतरिक्ष में मानव निषेचन में सफलता पाना है।

मिशन लोटस को पूरा करने के लिए अर्थात अंतरिक्ष में मानव निषेचन को पूरा करने के लिए

धरती से स्त्री अंडाणु तथा पुरुष शुक्राणु अंतरिक्ष  भेजे जाएंगे ताकि वहां

पर इनका निषेचन कराया जा सके।

ध्यान देने की बात यह है कि जब निषेचन सम्पन्न हो जाएगा 

तो चार दिन बाद भ्रूण को पुनः वापस धरती भेज दिया जाएगा।

इस अभियान में विशेष रूप से सामान्य गुरुत्व बना कर रखा जाएगा

ताकि भारहीनता की स्थिति भ्रूण के लिए किसी भी तरह से घातक साबित न हो।

सच कहें तो निसंदेह विज्ञान के क्षेत्र में इसे एक बहुत बड़ा कदम माना जाएगा,

 इसमे कोई संदेह नहीं है।  

धन्यवाद

के पी सिंह किर्तीखेड़ा 04112018

About KPSINGH

मैने बचपन से निकल कर जीवन की राहों में आने के बाद सिर्फ यही सीखा है कि "जंग जारी रहनी चाहिए जीत मिले या सीख दोनों अनमोल हैं" मैं परास्नातक समाज शास्त्र की डिग्री लेने के अलावा CTET और UP TET परीक्षाएं पास की हैं ।मैंने देश के हिन्दी राष्ट्रीय समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में लेखन किया है जैसे प्रतियोगिता दर्पण विज्ञान प्रगति आदि ।

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