वोल्कन आफ फायर ग्वाटेमाला का भारी दुख

वोल्कन आफ फायर ग्वाटेमाला का भारी दुख 

वोल्कन आफ फायर ग्वाटेमाला का भारी दुख! 

उपर्युक्त पंक्ति के संदर्भ सहित प्रसंग में इस पोस्ट के जरिए हम आपको

ग्वाटेमाला में सोमवार 19नवंबर 2018 को अचानक पांच माह बाद फटे

भीषण विनाशक ज्वालामुखी वोल्कन आफ फायर के द्वारा मचाई गई तबाही की जानकारी देना है।

ग्वाटेमाला के इस्कुइंतला में स्थित यह सक्रिय ज्वाला

मुखी इस बार करीब पांच माह बाद 19/11/2018 को फटा है।

इस ज्वालामुखी से काफी उचाई तक लावा और राख

का भयानक गुबार उठा था जो अभी भी रह रह कर बाहर आ रहा है

जबकि इस समय इसे काफी देर हो चुकी है जब लावा अंतत: फूट ही गया था।

जान माल का नुकसान 

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक इस ज्वालामुखी से उठने

वाले राख के गुबार और बादल कई किलोमीटर की दूरी तक दिख रहे हैं ।

प्रशासन के अलर्ट के बाद  यहां से करीब 2000 लोगों को निकालकर सुरक्षित स्थान भेजा गया है।

आपको बताना चाहते हैं कि इससे पहले इस भयानक

विनाशकारी ज्वालामुखी में जून 2018 में ही विस्फोट हुआ था।

जून में हुए  विस्फोट में कम से कम 200 लोगों की

मौत हो गई थी साथ ही साथ 17 हजार लोग उससे प्रभावित हुए थे।

आपको बता दें कि वोल्कन आफ फायर ग्वाटेमाला का वह ज्वालामुखी है। 

इस भयानक  ज्वालामुखी की उंचाई 12300 फीट  है

और यह दक्षिण अमेरिका में स्थित सबसे सक्रिय ज्वाला मुखी है।

ग्वाटेमाला की राजधानी ग्वाटेमाला सिटी इस आग की खान से महज 45 किलोमीटर दूर है। 

ज्वालामुखी किसे कहते हैं 

वोल्कन आफ फायर ग्वाटेमाला का भारी दुख अर्थात ज्वालामुखी किसे कहते हैं?

इसका उत्तर इस प्रकार है, “ज्वालामुखी वह विवर या

छिद्र है, जिससे लावा, राख, गैस तथा जलवाष्प का उद्गार होता है।

ज्वालामुखी क्रिया के अंतर्गत पृथ्वी के आंतरिक भाग में मैग्मा व गैस के उत्पन्न होने से लेकर

भूपटल के नीचे व ऊपर लावा के प्रकट होने तथा शीतल व ठोस होने की

समस्त प्रक्रियाएं शामिल की जाती हैं।

लावा का यह उद्गार केंद्रीय विस्फोटक के रूप में या फिर

दरार के उद्भेदन के रूप में हो सकता है।

मैग्मा में सिलिका की मात्रा अधिक होने पर ज्वाला मुखी में विस्फोटक उद्गार देखे जाते हैं। 

वर्तमानमें  विश्व के सर्वाधिक सक्रिय ज्वाला मुखी 

वोल्कन आफ फायर ग्वाटेमाला का भारी दुख के बहाने ही सही

अगर हम वर्तमान समय में विश्व के सर्वाधिक सक्रिय

ज्वालामुखी की चर्चा करें तो सबसे पहले भारत की चर्चा बेहतर होगी।

भारत का एक मात्र सक्रिय ज्वाला मुखी अंडमान निकोबार द्वीप समूह के

बैरन द्वीप में पाया जाता है।

जहां तक बात सक्रिय ज्वालामुखी की है तो सक्रिय ज्वाला मुखी

उस ज्वालामुखी को कहा जाता है जिसमें लावा,  गैस और विखंडित पदार्थ सदैव निकलते रहते हैं

उसे सक्रिय ज्वालामुखी कहा जाता है।

विश्व में इस समय सक्रिय ज्वालामुखी की संख्या कुल 500 है।

इसमें सिसली के उत्तर में लिपारी द्वीप का स्ट्रांबोली ज्वालामुखी

जिसे भूमध्य सागर का प्रकाश स्तंभ भी कहा जाता है, इटली का एटना,

इक्वाडोर का कोटापैक्सी जो विश्व का सबसे ऊंचा सक्रिय ज्वालामुखी है,

अंटार्कटिका का एकमात्र सक्रिय ज्वालामुखी माउंट एर्बुस यानी इरेबस 

जापान का फ्यूजीयामा सक्रिय ज्वालामुखी प्रमुख नाम हैं। 

सुषुप्त और मृत ज्वाला मुखी भी होते हैं 

सुषुप्त ज्वालामुखी उस ज्वालामुखी को कहा जाता है जो बहुत साल पहले तो सक्रिय थे, 

लेकिन अब बहुत समय से वे निष्क्रिय हो चुके हैं। इटली कि विसुवियस,

इंडोनेशिया का क्राकाटाओ तथा अंडमान निकोबार

का नारकोंडम द्वीप पर स्थित ज्वालामुखी विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं।

रही बात मृत ज्वालामुखी की तो यह समझने की बात है कि जो ज्वालामुखी

हजारों साल पहले सक्रिय थे पर अब हजारों साल से निष्क्रिय हैं वे मृत कहलाते हैं।

केन्या का किलिमंजारो, इक्वाडोर का चिम्बाराजो,

म्यांमार का माऊंट पोपा, ईरान का देमबंद और कोह

सुल्तान वहीं एंडीज पर्वत श्रेणियों का एंकाका गुआ इसके प्रमुख उदाहरण हैं।

एक बेहद खास बात यह है कि प्लेट विवर्तनिकी के आधार पर

हम यह कह सकते हैं कि विश्व के 80% ज्वालामुखी विनााशकारी प्लेट के किनारे हैं।

इसके अलावा 15% रचनात्मकता प्लेट किनारों पर स्थित हैं।

शेष प्लेट के आंतरिक भागों में पाए जाते हैं। 

ज्वालामुखी कुछ खास तथ्य 

वर्तमान में विश्व में सबसे ऊंचा ज्वालामुखी पर्वत माउंट कोटापैक्सी है।

इसकी ऊंचाई 19613 फीट है जो इक्वाडोर में स्थित है।

इटली का स्ट्रांबोली ज्वालामुखी आम्लिक लावा शंकु का प्रमुख उदाहरण है।

हवाई द्वीप में मोनालोवा ज्वालामुखी पैठित लावा शंकु का प्रमुख उदाहरण है।

जापान का फ्यूजीयामा पर्वत मिश्रित शंकु का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण है।

इटली में क्ले ग्राइयन क्षेत्र में सोल्फहारा नामक गंधकीय धुआंरा स्थित है।

लावा में जब सिलिका की मात्रा अधिक होती है तो उसे अम्लीय लावा कहते हैं।

ज्वालामुखी से निकलने वाली गैसों में 8से10 %भाग वाष्प यानी

हाइड्रोजन और ऑक्सीजन होता है। 

ज्वालामुखी से  आखिर क्यों    निकलती है ज्वाला? 

जरा सोचिए! धरती के नीचे पाताल में तो पानी ही पानी है

फिर ज्वालामुखी में धरती के नीचे से धधकती हुई आग की ज्वाला क्यों निकलती है?

इसका उत्तर यह है कि ज्वालामुखी सक्रियता का मूूल कारण

भूपर्पटी के अंदर अधिक गहराई वाले संस्तरों में ठोस चट्टान का मैग्मा जब

तरल अवस्था में बदल जाता है तो वह एक न एक दिन पृथ्वी के गर्भ से बाहर निकलता है।

इसके बावजूद इस सवाल के निम्नलिखित उत्तर भी दिए जा सकते हैं।

🔵भूगर्भ में अधिक तापमान के कारण चट्टानों का पिघल कर बहना।

🔵अत्यधिक तापमान के कारण दबाव कम हो जाने पर लावा कई उत्पत्ति।

🔵विभिन्न प्रकार की गैसों तथा भूगर्भ में स्थित जल के वाष्पीकरण से प्राप्त

जल वाष्प की अधिक मात्रा।

🔵भूगर्भ से लावा  एवं गैसों का धरातल की ओर प्रवाहित होना।

🔵भूगर्भ में 50 से 60 किलोमीटर की गहराई पर स्थित

बेसाल्ट की परत धरातलीय दबाव में कमी हो जाने तथा पिघल जाने के कारण

अत्यधिक मात्रा में लावा का निर्माण।

जी हां दोस्तों, विश्व के भूगोलवेत्ता इन्हीं सब वजहों को मानते हैं

ज्वालामुखी की आग का असली कारण।

दोस्तों यह बात सही है कि ज्वालामुखी का विस्फोट कोई सुखद स्थिति नहीं होती

लेकिन इससे कुछ फायदा भी होते हैं जिन्हें हम नजर अंदाज कतई नहीं कर सकते।

क्योंकि कभी कभी पानी के अपार स्रोत झील बनने में भी

ज्वाला मुखी की मदद को चिन्हित किया गया है। इतना ही नहीं

बेसकीमती खनिजों का भी ज्वालामुखी से निकलना कोई साधारण बात नहीं है। 

धन्यवाद 

के पी सिंह किर्तीखेड़ा 20112018

 

About KPSINGH

मैने बचपन से निकल कर जीवन की राहों में आने के बाद सिर्फ यही सीखा है कि "जंग जारी रहनी चाहिए जीत मिले या सीख दोनों अनमोल हैं" मैं परास्नातक समाज शास्त्र की डिग्री लेने के अलावा CTET और UP TET परीक्षाएं पास की हैं ।मैंने देश के हिन्दी राष्ट्रीय समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में लेखन किया है जैसे प्रतियोगिता दर्पण विज्ञान प्रगति आदि ।

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