भारतीय बजट को आप कितना जानते हैं?

भारतीय बजट को आप कितना जानते हैं?

भारतीय बजट को आप कितना जानते हैं?

दोस्तों, भारत सरकार ने अभी अभी एक फरवरी को

वर्ष 2018/2019 के लिए अपना अंतरिम बजट एक फरवरी 2019 को पेश किया है।

इस बजट के चर्चे आपने टीवी, रेडियो, अखबार के अलावा

गली के नुक्कड़ में पान की दूकान से परचून की दूकान तक में जरूर सुनी होगी।

एक हकीकत यह भी है कि ज्यादातर तर लोग बजट की अपनी अपनी तरह की व्याख्या करते हैं।

 

सत्तारूढ़ दल कहता है वाह क्या बजट है तो विरोधी दल सदैव यही कहते हैं कि आह, क्या बजट है।

खैर यह तो राजनीति की बातें हैं पर मैं यहां अपनी इस पोस्ट में

बजट की कुछ बेसिक चीजें बताना चाहता हूं जिनका संबंध केवल ज्ञान से है

जिसका उपयोग आप चाहें तो किसी भी प्रतियोगी परीक्षा में कर सकते हैं या फिर

भारतीय बजट आप कितना जानते हैं?

इस पोस्ट को आप अपनी सामान्य जागरूकता के लिए उपयोगी बना सकते हैं।

लोकतंत्र में बजट का अर्थ 

भारतीय बजट आप कितना जानते हैं?

इस सवाल का जवाब जानने से पहले आप यह जान लीजिये कि

सरकार की समस्त आर्थिक गतिविधियों का समावेश बजट के अंतर्गत होता है ।

बजट किसी भी देश की आर्थिक वृद्धि दर का प्रमुख संकेतक होता है।

बजट से ही यह पता किया जा सकता है कि देश का विकास किस दिशा में होगा।

इसका निर्धारण बजट के प्रावधानों से ही हो जाता है।

सच कहें तो भले ही आप किसी छोटे से घर की बात

करें या किसी बड़े देश की बजट इन्हीं की आर्थिक गतिविधियों का सार होता है।

इसे और भी स्पष्ट भाषा में कहें तो बजट वस्तुतः किसी

भी लोकतांत्रिक देश की आर्थिक व्यवस्था का प्रमुख मापक होता है।

भारत में बजट 

भारत में सामान्यतः बजट एक वित्तीय वर्ष यानी 1अप्रैल से 31 मार्च तक के दौरान की

सरकार की प्राप्तियों यानी आय और सरकार के व्ययों यानी खर्च के अनुमान का विवरण होता है।

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 112 में वार्षिक वित्तीय विवरण के रूप में

बजट का उल्लेख किया गया है।

भारत में बजट वित्तीय वर्ष के आधार पर देश की आय व्यय का अनुमान होता है।

भारत का वित्तीय प्रशासन जो कि लोक प्रशासन का एक महत्वपूर्ण भाग होता है

वह बजट के माध्यम से ही कार्य करता है।

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 266 में कहा गया है कि कानूनी प्रावधान के बिना

कोई भी कर नहीं लगाया जा सकता और न ही उसकी उगाही की जा सकती है।

अनुच्छेद 266 में यह भी कहा गया है कि संसदीय अनुमति के बिना

कोई भी व्यय नहीं किया जा सकता।

भारत में प्रत्येक वित्त वर्ष के लिए वार्षिक वित्तीय लेखा जोखा

संसद के सामने रखा जाना अति आवश्यक है। 

 

बजट का इतिहास क्या है?

बजट शब्द फ्रेंच भाषा के बोगेट से लिया गया है।

फ्रेंच भाषा के इस शब्द का अर्थ चमड़े का थैला होता है।

सन् 1773 में ब्रिटिश वित्तीय प्रस्ताव चमड़े के एक थैले में से निकाले गए थे।

उसी समय से बजट शब्द का प्रयोग सरकार के वार्षिक आय व्यय के विवरण के लिए किया जाने लगा।

बजट शब्द का प्रयोग सबसे पहले 1803 में किया गया था।

भारत में सर्वप्रथम 18 फरवरी 1860 में बजट प्रस्तुत करने का श्रेय

लार्ड कैनिंग के कार्यकाल में कार्यरत वित्तीय सदस्य जेम्स विल्सन को है।

इसीलिए जेम्स विल्सन को भारतीय बजट का प्रणेता कहा जाता है।

भारत में बजट परंपरा की जड़ें वर्ष 1944 में निर्मित बम्बई प्लान से जुड़ी मानी जाती हैं।

जैसा कि आप सभी जानते हैं कि इस प्लान की रचना जान मथाई,

जीडी बिरला, जे आर डी टाटा ने की थी। 

स्वतंत्र भारत का पहला बजट

स्वतंत्र भारत का पहला बजट 26 नवंबर 1947 को पेश किया गया था।

इसे भारत के पहले वित्त मंत्री आर के षड़मुखम सेट्टी द्वारा पेश किया गया था।

जान मथाई को 1950 में गणतंत्र भारत का पहला बजट पेश करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ था।

अंग्रेज़ी सरकार ने भारत में बजट पेश करने का समय

शाम पांच बजे रखा था। 

यह परंपरा भारत में 1998 तक चलती रही थी लेकिन 1999 में

राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार के वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने

सुबह 11 बजे बजट पेश करके इतिहास बदल दिया था।

भारत के बजट में अगले वित्त वर्ष अर्थात एक अप्रैल

से लेकर 31 मार्च तक की अवधि की वित्तीय योजना होती है।

भारत में यह भी प्रावधान है कि बजट पेश करने के 75

दिन के भीतर बजट को पारित करना आवश्यक होता है।

बजट की तैयारी नवंबर माह से प्ररारंभ हो जाती है ।भारतीय बजट के मूलत:तीन पक्ष होते हैं।

जैसे पिछले वित्त वर्ष के अंतिम आंकड़े चालू वित्त वर्ष

के संशोधित अनुमान और अगले वित्त वर्ष के अग्रिम अनुमान। 

भारतीय बजट संबंधी महत्वपूर्ण तथ्य 

भारतीय बजट अनुमानित आय एवं व्यय का एक विवरण है।

बजट एक सीमित अवधि के लिए होता है।

बजटकोको स्वीकृत करने के लिए एक सार्वजनिक निकाय की जरूरत होती है।

बजट नियंत्रण से मुक्त नहीं होता है।

2017 से पहले भारत के संघीय बजट को रेल बजट तथा आम बजट के तौर पर पेश किया जाता था

लेकिन 2017/18 के बजट में रेल बजट को समाहित करके प्रस्तुत किया गया था।

आमतौर पर रेल बजट को पहले रेल मंत्री तथा आम बजट को वित्त मंत्री पेश करते थे

लेकिन अब केवल वित्त मंत्री का दायित्व निश्चित किया गया है।

1924 में सर विलियम एकवर्थ कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर रेल बजट को

आम बजट से अलग प्रस्तुत करना प्रारंभ किया गया था।

जहां तक बात बजट के उद्देश्य की है तो बजट का उद्देश्य विधायिका के प्रति

कार्यपालिका की वित्तीय एवं न्यायिक जवाबदेही को सुनिश्चित करना है।

यह वास्तव में सामाजिक और आर्थिक नीतियों का उपकरण होता है।

बजट सरकारी कार्यों और सेवाओं के कुशल क्रियान्वयन को सुनिश्चित करता है। 

बजट के प्रकार

बजटीय प्रक्रिया के दौरान विभिन्न सरकारी हस्तक्षेप, सरकार के कल्याणकारी स्वरूप

देश हित आदि आधार पर बजट के अनेक रूप हैं इनका वर्णन निम्नलिखित है:

बजट का सबसे सामान्य स्वरूप आम बजट होता है जिसे 

पारंपरिक बजट के नाम से भी जाना जाता है।

इसमें सभी प्रकारके  आय व्यय का लेखा जोखा होता है।

इस बजट का विकास 18 वीं तथा 19 वीं शताब्दी में माना जाता है।

इस बजट में वस्तुओं या मद का महत्व उद्देश्य की अपेक्षा अधिक होता है। 

 

 

धन्यवाद

के पी सिंह किर्तीखेड़ा 04022019

About KPSINGH

मैने बचपन से निकल कर जीवन की राहों में आने के बाद सिर्फ यही सीखा है कि "जंग जारी रहनी चाहिए जीत मिले या सीख दोनों अनमोल हैं" मैं परास्नातक समाज शास्त्र की डिग्री लेने के अलावा CTET और UP TET परीक्षाएं पास की हैं ।मैंने देश के हिन्दी राष्ट्रीय समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में लेखन किया है जैसे प्रतियोगिता दर्पण विज्ञान प्रगति आदि ।

View all posts by KPSINGH →

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *