चले जाओगे बेशक मेरी जिंदगी से

चले जाओगे बेशक मेरी जिंदगी से

1. चले जाओगे बेशक मेरी जिंदगी से

मगर इस दिल से किस तरह जाओगे।

आयेगी जब मेरी याद आंसू ही बहाओगे।

चाहोगे मुझसे मिलना मगर मिल नहीं पाओगे।

सोचोगे मेरे बारे में तो फिर पछताओगे।

पूछेगा कोई मेरे बारे में तो गलती मेरी बताओगे।

होंगे आपकी महफिल में सभी मगर हमें नहीं पाओगे।

महफिल में रहकर भी तन्हा हो जाओगे।

माना कि बना लोगे एक और दोस्त अपना।

मगर दूसरा चन्द्र किशोर कहां से लाओगे…….!!!

 

2. लोग डूबते हैं तो समंदर को दोष देते हैं।

     मंजिल न मिले तो किस्मत को दोष देते हैं।

     खुद तो संभलकर चलते नहीं।

     जब लगती है ठोकर तो पत्थर को दोष देते हैं।

     जमाना क्या कहेगा ये मत सोचो।

     क्योंकि जमाना बहुत अजीब है

     नाकामयाब लोगों का मजाक उड़ाता है।

     ओर कामयाब लोगों से जलता है।

     अगर लोग समझाने से समझते 

     तो वांसुरी वाला कभी महाभारत नहीं होने देता।

 

 

लेखक 

    चन्द्र किशोर

     9458511577

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चले जाओगे बेशक मे री जिंदगी से मगर इस दिल से किस तरह जाओगे। आयेगी जब मेरी याद आंसू ही बहाओगे। चाहोगे मुझसे मिलना मगर मिल नहीं पाओगे। सोचोगे मेरे बारे में तो फिर पछताओगे। पूछेगा कोई मेरे बारे में तो गलती मेरी बताओगे। होंगे आपकी महफिल में सभी मगर हमें नहीं पाओगे। महफिल में रहकर भी तन्हा हो जाओगे। माना कि बना लोगे एक और दोस्त अपना। मगर दूसरा चन्द्र किशोर कहां से लाओगे.......!!!

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9 Comments on “चले जाओगे बेशक मेरी जिंदगी से”

  1. योग्यता और प्रतिभा किसी एक कि नही होती ,
    बहुत अच्छा लिखा है आपने
    धन्यबाद।

  2. आज के जमाने को आपने बहुत ही अच्छी शिक्षा का आईना दिखाया है।

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